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जूना, अग्नि और आह्वान से आखिरी खेप रवाना
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
प्रयाग में कुंभ का पहला स्नान 14 जनवरी को करने के लिए सभी अखाड़ों के संत प्रयाग चले गए हैं। बुधवार की दोपहर नागा संन्यासियों के जून अखाड़े से संतों का आखिरी दल रवाना हो गया। अग्नि और आह्वान अखाड़ों से भी तमाम संतों के जाने अखाड़े पूरी तरह खाली हो गए हैं। हरिद्वार के अखाड़ों में अब केवल रखवाल महंत और चौकीदार रह गए हैं।
प्रयाग कुंभ का पहला स्नान मकर संक्रांति पर पड़ रहा है। अधिकांश साधु संत पेशवाईयों के दौरान ही प्रयाग चले गए थे। बाकी संत बुधवार को रवाना हो गए। जूना अखाड़े के साथ नागाओं का एक दल भी गया है। इस प्रकार तीन बैरागी अणियों से वैष्णव संतों के तमाम काफिले रवाना हुए।
पहले स्नान पर निकलने वाले शाही जुलूसों के लिए अखाड़ों के का साजो-सामान पहले ही जा चुका है। जूना अखाड़े के प्रवक्ता स्वामी गोपालानंद ने बताया कि माईबाडे़ का दल भी कुंभ के लिए जा चुका है। इसी प्रकार महिला दंडी स्वामियों की टीम प्रयाग भेज दी गई है। उन्होंने बताया कि जूना, अग्नि और आह्वान तीनों अखाड़े एक साथ कुंभ और अर्द्धकुंभ के स्नान करते हैं। उधर, निरंजनी और महानिर्वाणी अखाड़ों के साधु भी अब प्रयाग में हैं। इन दोनों अखाड़ों के साथ क्रमश: आनंद और अटल अखाड़े स्नान करते हैं। इन चारों संन्यासी अखाड़ों का कोई साधु इस समय हरिद्वार में नहीं है। महानिर्वाणी अखाड़े के संतों की अंतिम रवानगी दो दिन पहले हो गई थी। इसी प्रकार दोनों उदासीन अखाड़ों के तमाम संत दो दिन पूर्व प्रयाग चले गए। निर्मल अखाड़ा पहले ही काफी समय पूर्व खाली हो चुका है।
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प्रयाग में कुंभ का पहला स्नान 14 जनवरी को करने के लिए सभी अखाड़ों के संत प्रयाग चले गए हैं। बुधवार की दोपहर नागा संन्यासियों के जून अखाड़े से संतों का आखिरी दल रवाना हो गया। अग्नि और आह्वान अखाड़ों से भी तमाम संतों के जाने अखाड़े पूरी तरह खाली हो गए हैं। हरिद्वार के अखाड़ों में अब केवल रखवाल महंत और चौकीदार रह गए हैं।
प्रयाग कुंभ का पहला स्नान मकर संक्रांति पर पड़ रहा है। अधिकांश साधु संत पेशवाईयों के दौरान ही प्रयाग चले गए थे। बाकी संत बुधवार को रवाना हो गए। जूना अखाड़े के साथ नागाओं का एक दल भी गया है। इस प्रकार तीन बैरागी अणियों से वैष्णव संतों के तमाम काफिले रवाना हुए।
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पहले स्नान पर निकलने वाले शाही जुलूसों के लिए अखाड़ों के का साजो-सामान पहले ही जा चुका है। जूना अखाड़े के प्रवक्ता स्वामी गोपालानंद ने बताया कि माईबाडे़ का दल भी कुंभ के लिए जा चुका है। इसी प्रकार महिला दंडी स्वामियों की टीम प्रयाग भेज दी गई है। उन्होंने बताया कि जूना, अग्नि और आह्वान तीनों अखाड़े एक साथ कुंभ और अर्द्धकुंभ के स्नान करते हैं। उधर, निरंजनी और महानिर्वाणी अखाड़ों के साधु भी अब प्रयाग में हैं। इन दोनों अखाड़ों के साथ क्रमश: आनंद और अटल अखाड़े स्नान करते हैं। इन चारों संन्यासी अखाड़ों का कोई साधु इस समय हरिद्वार में नहीं है। महानिर्वाणी अखाड़े के संतों की अंतिम रवानगी दो दिन पहले हो गई थी। इसी प्रकार दोनों उदासीन अखाड़ों के तमाम संत दो दिन पूर्व प्रयाग चले गए। निर्मल अखाड़ा पहले ही काफी समय पूर्व खाली हो चुका है।
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