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Champawat News: 200 रुपये किलो बिक रहा बेमौसम काफल
Fri, 31 Jan 2025 11:30 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Fri, 31 Jan 2025 11:30 PM IST
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चंपावत। जिला मुख्यालय में रेहड़ी चलाने वालों के यहां इस साल काफल तीन महीने पहले ही आ गया है। जानकारों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते चंपावत में जनवरी में ही काफल पक गए हैं।
इस साल शीतकालीन बारिश और बर्फवारी कम हुई है जिसकी वजह से चैत में पकने वाला काफल माघ में ही बाजार में आ गया है। चंपावत से सात किमी दूर पल्सों में काफी ठंड रहती है, लेकिन पल्सों से काफल पककर चंपावत बाजार में बिक रहा है। वहीं जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर दियूरी में भी काफल पेड़ों पर पक गया है। नगर में रेहड़ी चलाने वाले कुंदन सिंह ने बताया कि 100 रुपये किलो के हिसाब से खरीदा गया काफल वह 200 रुपये प्रति किलो बेच रहे हैं।
कोट
जलवायु में बदलाव के कारण काफल समय से पक रहा है। तापमान में बढ़ोतरी होने से हिमालय में भी बर्फ अधिक देर तक नहीं टिक पा रही है। समय से पहले काफल के पकने से बीज अपरिपक्व होंगे। इससे भविष्य में काफल के पेड़ों में भी असर पड़ेगा। - डॉ. बीपी ओली, विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान।
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इस साल शीतकालीन बारिश और बर्फवारी कम हुई है जिसकी वजह से चैत में पकने वाला काफल माघ में ही बाजार में आ गया है। चंपावत से सात किमी दूर पल्सों में काफी ठंड रहती है, लेकिन पल्सों से काफल पककर चंपावत बाजार में बिक रहा है। वहीं जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर दियूरी में भी काफल पेड़ों पर पक गया है। नगर में रेहड़ी चलाने वाले कुंदन सिंह ने बताया कि 100 रुपये किलो के हिसाब से खरीदा गया काफल वह 200 रुपये प्रति किलो बेच रहे हैं।
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जलवायु में बदलाव के कारण काफल समय से पक रहा है। तापमान में बढ़ोतरी होने से हिमालय में भी बर्फ अधिक देर तक नहीं टिक पा रही है। समय से पहले काफल के पकने से बीज अपरिपक्व होंगे। इससे भविष्य में काफल के पेड़ों में भी असर पड़ेगा। - डॉ. बीपी ओली, विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान।
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