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Champawat News: दस साल में आधी रह गई अदरक की खेती
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सतीश जोशी सत्तू
चंपावत। गुणकारी और औषधीय उपयोग के बावजूद अदरक की खेती में गिरावट आ रही है। चंपावत जिले के आंकड़े बता रहे हैं कि एक दशक में अदरक की खेती और उत्पादन दोनों में 50 प्रतिशत की गिरावट आ गई है। अदरक की सामूहिक खेती से भी इसके उत्पादन में इजाफा नहीं हो पा रहा है। ऐसे ही हाल हल्दी की खेती के भी है।
चंपावत जिले में पहाड़ और मैदान दोनों ही जगह अदरक की खेती होती है। लेकिन अब इस खेती (क्षेत्रफल में 53.62 प्रतिशत और उत्पादन 49.98 प्रतिशत) में भी गिरावट हुई है। एक दशक में अदरक की खेती में 266 हेक्टेयर कमी आई है। वहीं उत्पादन में भी 2239 मीट्रिक टन की गिरावट हुई है। इसी तरह हल्दी की खेती भी इस जिले में सिर्फ 97 हेक्टेयर में हो रही है जिससे 876 मीट्रिक टन उत्पादन होता है।
गिरावट का कारण: इसकी बड़ी वजह बंदर और जंगली जानवरों का नाक में दम करना है।
जिले में अदरक की पैदावार
वर्ष: खेती (हेक्टेयर में) उत्पादन (मीट्रिक टन)
2013 496 4479
2023 230 1240
पहाड़ी क्षेत्र में किसानों को लुभा रही कीवी की खेती
चंपावत। अदरक से दूर होते पहाड़ के काश्तकार अब कीवी की खेती से उम्मीद लगाए हैं। चार हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर होने वाली कीवी की खेती के लिए बंदर और जंगली जानवरों का खतरा भी कम है। 2023 में चंपावत जिले में उद्यान विभाग ने कीवी के 130 नए बागान विकसित किए जा चुके हैं। डीएचओ टीएन पांडेय का कहना है कि अगले एक साल में कीवी के 100 और नए बागान विकसित किए जाएंगे। संवाद
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कोट
चंपावत जिले में बंदरों के साथ ही अन्य जंगली जानवरों और विभिन्न कारणों से अदरक की खेती का क्षेत्रफल में गिरावट आ रही है। इसके चलते काश्तकार अब अदरक के स्थान पर दूसरी खेती करने पर जोर दे रहे हैं। उद्यान विभाग भी काश्तकारों को कीवी और जलवायु के अनुकूल अन्य खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। - टीएन पांडेय, जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।
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चंपावत। गुणकारी और औषधीय उपयोग के बावजूद अदरक की खेती में गिरावट आ रही है। चंपावत जिले के आंकड़े बता रहे हैं कि एक दशक में अदरक की खेती और उत्पादन दोनों में 50 प्रतिशत की गिरावट आ गई है। अदरक की सामूहिक खेती से भी इसके उत्पादन में इजाफा नहीं हो पा रहा है। ऐसे ही हाल हल्दी की खेती के भी है।
चंपावत जिले में पहाड़ और मैदान दोनों ही जगह अदरक की खेती होती है। लेकिन अब इस खेती (क्षेत्रफल में 53.62 प्रतिशत और उत्पादन 49.98 प्रतिशत) में भी गिरावट हुई है। एक दशक में अदरक की खेती में 266 हेक्टेयर कमी आई है। वहीं उत्पादन में भी 2239 मीट्रिक टन की गिरावट हुई है। इसी तरह हल्दी की खेती भी इस जिले में सिर्फ 97 हेक्टेयर में हो रही है जिससे 876 मीट्रिक टन उत्पादन होता है।
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गिरावट का कारण: इसकी बड़ी वजह बंदर और जंगली जानवरों का नाक में दम करना है।
जिले में अदरक की पैदावार
वर्ष: खेती (हेक्टेयर में) उत्पादन (मीट्रिक टन)
2013 496 4479
2023 230 1240
पहाड़ी क्षेत्र में किसानों को लुभा रही कीवी की खेती
चंपावत। अदरक से दूर होते पहाड़ के काश्तकार अब कीवी की खेती से उम्मीद लगाए हैं। चार हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर होने वाली कीवी की खेती के लिए बंदर और जंगली जानवरों का खतरा भी कम है। 2023 में चंपावत जिले में उद्यान विभाग ने कीवी के 130 नए बागान विकसित किए जा चुके हैं। डीएचओ टीएन पांडेय का कहना है कि अगले एक साल में कीवी के 100 और नए बागान विकसित किए जाएंगे। संवाद
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कोट
चंपावत जिले में बंदरों के साथ ही अन्य जंगली जानवरों और विभिन्न कारणों से अदरक की खेती का क्षेत्रफल में गिरावट आ रही है। इसके चलते काश्तकार अब अदरक के स्थान पर दूसरी खेती करने पर जोर दे रहे हैं। उद्यान विभाग भी काश्तकारों को कीवी और जलवायु के अनुकूल अन्य खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। - टीएन पांडेय, जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।