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जिले के पांच औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में लटके ताले
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मंच में निर्माणाधीन आईटीआई का भवन।
- फोटो : CHAMPAWAT
प्रदेश में आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) का एक ओर शुल्क बढ़ाकर 480 से 3900 करने का फैसला लिया गया है, इधर चंपावत जिले में पांच आईटीआई पर ताला लटक गया है। इन संस्थानों में आधारभूत ढांचा दुरुस्त नहीं होने से बंदी की नौबत आई है।
बताया गया है कि जरूरी सुविधाओं के नहीं होने पर इनके संचालन पर रोक लगाई गई है। वहीं शुल्क वृद्धि के फैसले से छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है।
उत्तराखंड बनने के बाद स्वीकृत छह आईटीआई में से जिले में पांच संचालित थे। इनमें रेगड़ू का आईटीआई शुरू नहीं हो सका था। ये सभी आईटीआई स्टेट काउंसिल ऑन वोकेशनल ट्रेनिंग (एससीवीटी) से मान्यता प्राप्त थे, जबकि बनबसा के नाम से खुले आईटीआई का संचालन टनकपुर में होता था। इनमें से ज्यादातर संस्थानों में महज एक ही ट्रेड था और पर्याप्त जगह भी नहीं थी।
वर्तमान शिक्षण सत्र से इनमें प्रवेश नहीं करने के आदेश जारी किए गए हैं। इसके चलते जिले के इन पांचों आईटीआई में ताले लटक गए हैं। अब इन केंद्रों के अनुदेशकों और स्टाफ को दूसरी जगह समायोजित किया जा रहा है। तकनीकी ज्ञान देने वाले इन संस्थानों के बंद होने से ग्रामीण नौजवानों को सबसे ज्यादा समस्या होगी।
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बंद होने वाले आईटीआई- स्थापना वर्ष
दिगालीचौड़-2011
बाराकोट- 2012
बनबसा- 2015
भिंगराड़ा- 2015
मंच- 2017
एससीवीटी से मान्यता प्राप्त आईटीआई को संचालित करने का नोटिफिकेशन नहीं है। अगर इस तरह का आदेश मिलेगा तो बंद आईटीआई को फिर से संचालित कर दिया जाएगा। तब तक इन्हें बंद कर दिया गया है। यहां के अनुदेशक और अन्य स्टाफ को दूसरे आईटीआई में समायोजित किया जाएगा। आरएस मर्तोलिया, निदेशक, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान,
भारत सरकार से मान्यता प्राप्त हैं तीन आईटीआई
चंपावत। नेशनल काउंसिल ऑन वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) से मान्यता प्राप्त चंपावत जिले के तीन आईटीआई यूपी के दौर के हैं। सबसे पुराने टनकपुर आईटीआई के अलावा चंपावत और खेतीखान का आईटीआई इस श्रेणी में है। ये तीनों आईटीआई पूर्ववत संचालित रहेंगे।
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बताया गया है कि जरूरी सुविधाओं के नहीं होने पर इनके संचालन पर रोक लगाई गई है। वहीं शुल्क वृद्धि के फैसले से छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है।
उत्तराखंड बनने के बाद स्वीकृत छह आईटीआई में से जिले में पांच संचालित थे। इनमें रेगड़ू का आईटीआई शुरू नहीं हो सका था। ये सभी आईटीआई स्टेट काउंसिल ऑन वोकेशनल ट्रेनिंग (एससीवीटी) से मान्यता प्राप्त थे, जबकि बनबसा के नाम से खुले आईटीआई का संचालन टनकपुर में होता था। इनमें से ज्यादातर संस्थानों में महज एक ही ट्रेड था और पर्याप्त जगह भी नहीं थी।
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वर्तमान शिक्षण सत्र से इनमें प्रवेश नहीं करने के आदेश जारी किए गए हैं। इसके चलते जिले के इन पांचों आईटीआई में ताले लटक गए हैं। अब इन केंद्रों के अनुदेशकों और स्टाफ को दूसरी जगह समायोजित किया जा रहा है। तकनीकी ज्ञान देने वाले इन संस्थानों के बंद होने से ग्रामीण नौजवानों को सबसे ज्यादा समस्या होगी।
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बंद होने वाले आईटीआई- स्थापना वर्ष
दिगालीचौड़-2011
बाराकोट- 2012
बनबसा- 2015
भिंगराड़ा- 2015
मंच- 2017
एससीवीटी से मान्यता प्राप्त आईटीआई को संचालित करने का नोटिफिकेशन नहीं है। अगर इस तरह का आदेश मिलेगा तो बंद आईटीआई को फिर से संचालित कर दिया जाएगा। तब तक इन्हें बंद कर दिया गया है। यहां के अनुदेशक और अन्य स्टाफ को दूसरे आईटीआई में समायोजित किया जाएगा। आरएस मर्तोलिया, निदेशक, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान,
भारत सरकार से मान्यता प्राप्त हैं तीन आईटीआई
चंपावत। नेशनल काउंसिल ऑन वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) से मान्यता प्राप्त चंपावत जिले के तीन आईटीआई यूपी के दौर के हैं। सबसे पुराने टनकपुर आईटीआई के अलावा चंपावत और खेतीखान का आईटीआई इस श्रेणी में है। ये तीनों आईटीआई पूर्ववत संचालित रहेंगे।