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सात साल पहले बनी सड़क पर नहीं हुआ डामरीकरण
अमर उजाला ब्यूूूूराे लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Fri, 05 Jan 2018 10:43 PM IST
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बदहाल पड़ी लोहाघाट की डिग्रीकॉलेज-पोखरीबोरा सड़क
- फोटो : अमर उजाला
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लोहाघाट ब्लाक के गंगनौला, नसखोला, पोखरी बोरा समेत कई गांवों के लिए सात साल पहले बनी सड़क पर अभी भी डामरीकरण नहीं हो पाया है। इस सड़क से जुड़े गांवों के लोग कच्ची सड़क पर सफर करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों द्वारा कई बार मांग उठाने के बाद डामरीकरण के लिए कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
स्पेशल कंपोनेंट प्लान (एससीपी) के अंतर्गत वर्ष 2006 में लोहाघाट डिग्री कालेज से गंगनौला, नसखोला होते हुए अंबेडकर गांव पोखरी बोरा तक 25 किलोमीटर लंबी सड़क स्वीकृत हुई थी। ग्रामीणों के अनुसार करीब वर्ष 2010 में इसकी कटिंग का कार्य पूरा हो गया था। कटिंग का कार्य पूरे हुए अब सात साल पूरा हो गए हैं।
लेकिन अभी तक डिग्री कालेज से डैंसली गधेरे तक मात्र तीन किमी सड़क पर ही डामरीकरण हो पाया है। डैंसली गधेरे से पोखरी गांव तक 22 किमी सड़क अभी तक कच्ची है। सड़क से जुड़े गांवों के लोग धूल के बीच सफर करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों यह भी आरोप है कि विभाग की ओर से इस सड़क का निर्माण मानकों के अनुसार नहीं किया गया है। सड़क की चौड़ाई बमुश्किल से तीन से चार मीटर के बीच है। दुर्घटनाएं होने का भय बना रहता है। उनका कहना है कि भुमलाई, गल्लागांव, डैंसली, कोयाटी, गंगनौला, नसखोला, खतेड़ा, पोखरी बोरा गांव की करीब 10 हजार की आबादी इस सड़क पर आश्रित है।
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मानकों के अनुसार नहीं हुई सड़क की कटिंग
ग्राम प्रधान संगठन जिलाध्यक्ष व गंगनौला के प्रधान ललित मोहन जोशी का कहना है कि लोनिवि द्वारा काटी गई सड़क की चौड़ाई मानकों के अनुरूप नहीं है। कई काश्तकारों को सड़क के निर्माण में लगी जमीन का मुआवजा तक नहीं मिल पाया है।
डामरीकरण न होने से खतरनाक बनी है सड़क
नारायण दत्त सुतेड़ी का कहना है कि डामरीकरण नहीं होने से यह सड़क खतरनाक बनी हुई है। जगह-जगह पर गड्ढे बने हैं। सोलिंग किए गए रोड़ा-पत्थर उखड़ रहे हैं। लोग जान जोखिम में डाल सफर करने को मजबूर हैं।
आसान नहीं इस सड़क से सफर
हरीश चंद्र राय का कहना है कि कच्ची सड़क होने से वाहन स्वामी वाहनों को इस सड़क पर डालने से कतराते हैं। मार्ग पर वाहनों की कम आवाजाही के चलते लोगों को अधिक किराया देने को भी मजबूर होना पड़ता है।
कोट
डिग्री कॉलेज-पोखरीबोरा सड़क पर तीन किमी डामरीकरण का काम पूर्व में हो चुका है। इससे आगे तीन किमी और डामरीकरण के लिए 2.46 करोड़ रुपये का संशोधित आगणन शासन को भेजा गया है। धन स्वीकृत होते ही डामरीकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा। इस सड़क को ग्रामीण मार्ग से राज्य मार्ग में परिवर्तन करने का भी प्रस्ताव भेजा गया है।
बीसी पंत, अधिशासी अभियंता, लोहाघाट खंड।
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स्पेशल कंपोनेंट प्लान (एससीपी) के अंतर्गत वर्ष 2006 में लोहाघाट डिग्री कालेज से गंगनौला, नसखोला होते हुए अंबेडकर गांव पोखरी बोरा तक 25 किलोमीटर लंबी सड़क स्वीकृत हुई थी। ग्रामीणों के अनुसार करीब वर्ष 2010 में इसकी कटिंग का कार्य पूरा हो गया था। कटिंग का कार्य पूरे हुए अब सात साल पूरा हो गए हैं।
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लेकिन अभी तक डिग्री कालेज से डैंसली गधेरे तक मात्र तीन किमी सड़क पर ही डामरीकरण हो पाया है। डैंसली गधेरे से पोखरी गांव तक 22 किमी सड़क अभी तक कच्ची है। सड़क से जुड़े गांवों के लोग धूल के बीच सफर करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों यह भी आरोप है कि विभाग की ओर से इस सड़क का निर्माण मानकों के अनुसार नहीं किया गया है। सड़क की चौड़ाई बमुश्किल से तीन से चार मीटर के बीच है। दुर्घटनाएं होने का भय बना रहता है। उनका कहना है कि भुमलाई, गल्लागांव, डैंसली, कोयाटी, गंगनौला, नसखोला, खतेड़ा, पोखरी बोरा गांव की करीब 10 हजार की आबादी इस सड़क पर आश्रित है।
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मानकों के अनुसार नहीं हुई सड़क की कटिंग
ग्राम प्रधान संगठन जिलाध्यक्ष व गंगनौला के प्रधान ललित मोहन जोशी का कहना है कि लोनिवि द्वारा काटी गई सड़क की चौड़ाई मानकों के अनुरूप नहीं है। कई काश्तकारों को सड़क के निर्माण में लगी जमीन का मुआवजा तक नहीं मिल पाया है।
डामरीकरण न होने से खतरनाक बनी है सड़क
नारायण दत्त सुतेड़ी का कहना है कि डामरीकरण नहीं होने से यह सड़क खतरनाक बनी हुई है। जगह-जगह पर गड्ढे बने हैं। सोलिंग किए गए रोड़ा-पत्थर उखड़ रहे हैं। लोग जान जोखिम में डाल सफर करने को मजबूर हैं।
आसान नहीं इस सड़क से सफर
हरीश चंद्र राय का कहना है कि कच्ची सड़क होने से वाहन स्वामी वाहनों को इस सड़क पर डालने से कतराते हैं। मार्ग पर वाहनों की कम आवाजाही के चलते लोगों को अधिक किराया देने को भी मजबूर होना पड़ता है।
कोट
डिग्री कॉलेज-पोखरीबोरा सड़क पर तीन किमी डामरीकरण का काम पूर्व में हो चुका है। इससे आगे तीन किमी और डामरीकरण के लिए 2.46 करोड़ रुपये का संशोधित आगणन शासन को भेजा गया है। धन स्वीकृत होते ही डामरीकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा। इस सड़क को ग्रामीण मार्ग से राज्य मार्ग में परिवर्तन करने का भी प्रस्ताव भेजा गया है।
बीसी पंत, अधिशासी अभियंता, लोहाघाट खंड।