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अंधेरे के बीच उजाले की राह बनाई अमित ने

Sat, 26 May 2018 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत।
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत। Updated Sat, 26 May 2018 11:40 PM IST
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Amit took the path of light in the dark
अमित सिंह,93 प्रतिशत, विवेकानंद विद्या मंदिर चंपावत। - फोटो : अमर उजाला

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चंपावत।गरीबी को बेहद करीब से देखने वाले अमित सिंह अधिकारी ने कामयाबी के झंडे गाड़े हैं। इंटर में 93 फीसदी अंकों के साथ प्रदेश की मेरिट लिस्ट में 20वें नंबर पर रहे हैं। दूरस्थ गांव में ढिबरी की रोशनी में पढ़ाई करने वाले अमित अंधेरे के बीच उजाले की राह बनाने में कामयाब हुए। ऐसा इसलिए कि इससे पहले वह हाईस्कूल की परीक्षा में भी जिले में पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। अमित के पिता गांव में मजदूरी करते हैं।

अमित दूरस्थ क्षेत्र बकोड़ा ग्राम पंचायत के संगरून तोक में रहते हैं। ये तोक अब भी बिजली से रोशन नहीं हो सका है। गांव तक पहुंचने के लिए मंच से करीब 15 किमी की दूूरी पैदल नापनी पड़ती हैं। अमित ने प्रारंभिक परीक्षा गांव से हासिल की। इसके बाद उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए जिला मुख्यालय के एमईएस कैंप के पास 1500 रुपये में कमरा किराए पर लिया। यहां उन्होंने अपनी दादी एवं छोटे भाई के साथ रहकर संघर्ष की राह पर चलना शुरू किया और साल 2016 में उन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा में 89.2 फीसदी अंकों के साथ जिला टॉप किया। अमित को हाईस्कूल की मेरिट में नहीं आने पर मलाल जरूर हुआ, लेकिन वो निराश नहीं हुए।
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इंटरमीडिएट की मेरिट में आने के लिए उन्होंने पूरी ताकत लगा दी और इस बार इंटरमीडिएट की परीक्षा में उन्होंने 20वां स्थान हासिल किया। उनका कहना है कि टॉप टेन में आने की पूरी उम्मीद थी। रोज आठ घंटे पढ़ाई करने वाले अमित बताते हैं कि छुट्टियों में जब भी गांव जाते हैं तो ढिबरी के उजाले में पढ़ाई करते हैं। अमित के पिता जगत सिंह गांव में मजदूरी करते हैं, जबकि मां सरिता देवी गृहणी हैं। अमित अपनी सफलता का श्रेय माता, पिता, दादी और शिक्षकों को देते हैं।
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पार्ट टाइम जॉब के साथ करेंगे इंजीनियरिंग की तैयारी
चंपावत। अमित इंजीनियर बनना चाहते हैं, लेकिन उनकी राह में एक बार फिर गरीबी आड़े आ रही हैं। बुलंद इरादों के धनी अमित ने इसका भी हल निकाल लिया है। उनका कहना है कि पार्ट टाइम जॉब करते हुए वह आगे की पढ़ाई के साथ ही इंजीनियरिंग की तैयारी भी करते रहेंगे।



गुड़ खिला कर मनाया सफलता का जश्न
चंपावत। बेटे की इतनी बड़ी सफलता की खबर सुनकर मां सरिता और पिता जगत सिंह की आंखें छलक गई। उन्होंने गांव के लोगों के साथ ही बेटे अमित को गुड़ खिलाकर खुशी मनाई। अमित छुट्टियों में गांव गए हैं। दोस्तों के जरिये उन्हें परीक्षाफल की जानकारी मिली। इसके बाद गांव में जश्न का दौर शुरू हो गया।
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