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हल्द्वानी में भी नहीं हुआ कामिनी का इलाज, दिल्ली के अस्पताल में भर्ती-हल्द्वानी
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हल्द्वानी/चंपावत। सोने की बाली निकलने वाली लोहाघाट की आठ साल की बच्ची को सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचने के बाद भी इलाज नसीब नहीं हुआ। अस्पताल के डॉक्टरों ने संसाधनों के अभाव की बात कहकर परिजनों को बच्ची को हायर सेंटर ले जाने की सलाह दे दी। परिजन रविवार को किसी तरह बच्ची को इलाज के लिए दिल्ली ले गए। जहां एक निजी अस्पताल में बच्ची का इलाज चल रहा है।
लोहाघाट निवासी स्व. कृष्ण सिंह फर्त्याल की बेटी कामिनी फर्त्याल (8) ने शुक्रवार को खेल-खेल में सोने की बाली निगल ली। जानकारी होने पर परिजनों ने लोहाघाट के सरकारी अस्पताल में इलाज कराया लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। फिर जिला अस्पताल ले जाया गया जहां से उसे सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर कर दिया गया। उसे 108 एंबुलेंस से रविवार की रात सुशीला तिवारी अस्पताल लाया गया। परिजनों का कहना है कि एसटीएच में चिकित्सकों ने बच्ची के दो एक्स-रे कराए। एक्स रे देखने के बाद चिकित्सकों ने ऑपरेशन के लिए जरूरी उपकरण न होने की बात कहकर बच्ची को बरेली या दिल्ली ले जाने की सलाह दे दी।
बच्ची के साथ मौजूद उसके परिजन गिरीश सिंह ने आरोप लगाया है कि एसटीएच में कामिनी को न तो सही से इलाज मिला और न ही उसे भर्ती किया गया। परिजनों का कहना है कि कई बार आग्रह करने के बाद रेफरल पर्ची बनाई गई। परिजन बच्ची को इलाज के लिए दिल्ली ले जाना चाहते थे लेकिन रात में उन्हें एंबुलेंस तक की सुविधा नहीं मिली जिसके बाद परिजन रविवार की सुबह बच्ची को लेकर दिल्ली पहुंचे जहां बच्ची का इलाज चल रहा है।
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लोहाघाट से हल्द्वानी तक नसीब हुआ बच्ची को इलाज
आठ साल की बच्ची ने निगल ली थी सोने की इयर रिंग
परिजनों ने एसटीएच प्रबंधन पर लापरवाही का लगाया आरोप
रविवार की देर रात सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचने पर डॉ. शहजाद समेत अन्य चिकित्सकों ने कामिनी की जांच की थी। एक्स-रे देखने के बाद पता चला कि इयर रिंग श्वांस नली में काफी नीचे पहुंच गई है। ऐसी स्थिति में यहां ऑपरेशन करना संभव नहीं था इसीलिए उसे हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी गई।
-डॉ. सीपी भैसोड़ा प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
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लोहाघाट निवासी स्व. कृष्ण सिंह फर्त्याल की बेटी कामिनी फर्त्याल (8) ने शुक्रवार को खेल-खेल में सोने की बाली निगल ली। जानकारी होने पर परिजनों ने लोहाघाट के सरकारी अस्पताल में इलाज कराया लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। फिर जिला अस्पताल ले जाया गया जहां से उसे सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर कर दिया गया। उसे 108 एंबुलेंस से रविवार की रात सुशीला तिवारी अस्पताल लाया गया। परिजनों का कहना है कि एसटीएच में चिकित्सकों ने बच्ची के दो एक्स-रे कराए। एक्स रे देखने के बाद चिकित्सकों ने ऑपरेशन के लिए जरूरी उपकरण न होने की बात कहकर बच्ची को बरेली या दिल्ली ले जाने की सलाह दे दी।
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बच्ची के साथ मौजूद उसके परिजन गिरीश सिंह ने आरोप लगाया है कि एसटीएच में कामिनी को न तो सही से इलाज मिला और न ही उसे भर्ती किया गया। परिजनों का कहना है कि कई बार आग्रह करने के बाद रेफरल पर्ची बनाई गई। परिजन बच्ची को इलाज के लिए दिल्ली ले जाना चाहते थे लेकिन रात में उन्हें एंबुलेंस तक की सुविधा नहीं मिली जिसके बाद परिजन रविवार की सुबह बच्ची को लेकर दिल्ली पहुंचे जहां बच्ची का इलाज चल रहा है।
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लोहाघाट से हल्द्वानी तक नसीब हुआ बच्ची को इलाज
आठ साल की बच्ची ने निगल ली थी सोने की इयर रिंग
परिजनों ने एसटीएच प्रबंधन पर लापरवाही का लगाया आरोप
रविवार की देर रात सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचने पर डॉ. शहजाद समेत अन्य चिकित्सकों ने कामिनी की जांच की थी। एक्स-रे देखने के बाद पता चला कि इयर रिंग श्वांस नली में काफी नीचे पहुंच गई है। ऐसी स्थिति में यहां ऑपरेशन करना संभव नहीं था इसीलिए उसे हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी गई।
-डॉ. सीपी भैसोड़ा प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज