{"_id":"5bf44d61bdec22697e53a363","slug":"31542737249-bageshwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैडर वोट को रोकने में कामयाब नहीं रही भाजपा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैडर वोट को रोकने में कामयाब नहीं रही भाजपा
Updated Tue, 20 Nov 2018 11:37 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागेश्वर। 2017 के विधान सभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन करने वाली भाजपा अपने काडर वोट को एकजुट कर पाने में कामयाब नहीं रही। अपने प्रत्याशी की जीत के लिए भाजपा ने सीएम समेत बड़े दिग्गजों को भी मैदान में उतारा था।
भाजपा में टिकट के लिए प्रत्याशियों की लंबी कतार थी लेकिन भाजपा ने संघ के पुराने कार्यकर्ता कुंदन परिहार को मैदान में उतारा।
भाजपा को उम्मीद थी कि साफ सुथरी छवि के कुंदन परिहार अंदरूनी नाराजगी को दूर करने में कामयाब होंगे और कार्यकर्ताओं को भी एकजुट कर लेंगे। संघ सहित भाजपा के फ्रंटल संगठन भी चुनावों में सक्रिय थे। विधान सभा चुनावों में पहली बार भाजपा नगर क्षेत्र में आगे रही थी। ऐसे में पार्टी को उम्मीद थी कि इस बार वह नगर पालिका चुनाव में जीत दर्ज करेगी। नतीजा सामने आने पर साफ हुआ कि भाजपा अपने कैडर वोट को रोक पाने में कामयाब नहीं रही।
भाजपा प्रत्याशी कुंदन परिहार की जीत के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी सभा की थी। जाहिर है कि उनकी अपील भी मतदाताओं को नहीं लुभा पाई। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा, विधायक चंदन राम दास और बलवंत सिंह भौर्याल ने भी कुंदन के पक्ष में प्रचार किया था। जनता ने उनकी अपील को ठुकराते हुए कांग्रेस के बागी और निर्दलीय मैदान में उतरे सुरेश खेतवाल के पक्ष में मतदान किया।
विज्ञापन
भाजपा के बागी डब्बू मेहता भी भाजपा की जीत में रोड़ा बने। डब्बू शुरू से ही भाजपा पर निशाना साधते हुए टिकट चयन पर सवाल खड़े कर रहे थे। उनका मानना था कि भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्र के परिवेश के प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। भाजपा ने हालांकि बागी मनाने की काफी कोशिश भी की थी।
विज्ञापन
भाजपा में टिकट के लिए प्रत्याशियों की लंबी कतार थी लेकिन भाजपा ने संघ के पुराने कार्यकर्ता कुंदन परिहार को मैदान में उतारा।
भाजपा को उम्मीद थी कि साफ सुथरी छवि के कुंदन परिहार अंदरूनी नाराजगी को दूर करने में कामयाब होंगे और कार्यकर्ताओं को भी एकजुट कर लेंगे। संघ सहित भाजपा के फ्रंटल संगठन भी चुनावों में सक्रिय थे। विधान सभा चुनावों में पहली बार भाजपा नगर क्षेत्र में आगे रही थी। ऐसे में पार्टी को उम्मीद थी कि इस बार वह नगर पालिका चुनाव में जीत दर्ज करेगी। नतीजा सामने आने पर साफ हुआ कि भाजपा अपने कैडर वोट को रोक पाने में कामयाब नहीं रही।
विज्ञापन
भाजपा प्रत्याशी कुंदन परिहार की जीत के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी सभा की थी। जाहिर है कि उनकी अपील भी मतदाताओं को नहीं लुभा पाई। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा, विधायक चंदन राम दास और बलवंत सिंह भौर्याल ने भी कुंदन के पक्ष में प्रचार किया था। जनता ने उनकी अपील को ठुकराते हुए कांग्रेस के बागी और निर्दलीय मैदान में उतरे सुरेश खेतवाल के पक्ष में मतदान किया।
विज्ञापन
भाजपा के बागी डब्बू मेहता भी भाजपा की जीत में रोड़ा बने। डब्बू शुरू से ही भाजपा पर निशाना साधते हुए टिकट चयन पर सवाल खड़े कर रहे थे। उनका मानना था कि भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्र के परिवेश के प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। भाजपा ने हालांकि बागी मनाने की काफी कोशिश भी की थी।