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किशोरों में कबड्डी का बढ़ा जुनून
ब्यूूराे/अमर उजाला अमराेहा
Updated Wed, 16 Dec 2015 12:02 AM IST
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कई छात्र-छात्राओं के कबड्डी में परचम लहराने और नौकरी लग जाने के बाद अब किशोरों में भी कबड्डी का क्रेज बढ़ गया है। कबड्डी में ही नाम कमाने के लिए अब जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। इनमें कई किशोर ऐसे हैं, जो खेल के मैदान से दूर रहते थे, मगर अब घंटों अभ्यास करते हैं।
क्रिकेट में दौलत, श्ााोहरत की चकाचौंध के चलते दूसरे खेलों पर संकट छा गया है। शरीर को बलवान बनाने वाले कुश्ती, कबड्डी और दौड़ में युवाओं की दिलचस्पी नहीं रही। हम अपने प्राचीन और जमीन से जुड़े खेलों को भूल कर पश्चिमी संस्कृति की जद में आ गए।
जिसके कारण खेलों की बुरी दशा होती चली गई लेकिन कुछ युवाओं ने इस चकाचौंध से दूर रहकर कबड्डी में हाथ आजमाया। कोच भोले सिंह पंवार की देखरेख में कबड्डी की मजबूत पकड़ और आधुनिक गुर सीखे। प्रतियोगिताओं में परचम लहराया।
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छात्र-छात्राओं के परचम लहराने और नौकरी लग जाने के बाद मुनाजिर, दीपक, रवि कुमार, रईसुद्दीन, विनोद कुमार,योगेश कुमार जैसे किशोरों में भी कबड्डी का क्रेज बढ़ गया है।
कोच भोले सिंह पंवार के निर्देशन में अल्लीपुर खादर के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में घंटों कड़ी मेहनत करते हैं, इनमें कई ऐसे हैं, जो खेलों के मैदान से दूर रहते थे। सिर पर कबड्डी का ही जुनून सवार है।
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क्रिकेट में दौलत, श्ााोहरत की चकाचौंध के चलते दूसरे खेलों पर संकट छा गया है। शरीर को बलवान बनाने वाले कुश्ती, कबड्डी और दौड़ में युवाओं की दिलचस्पी नहीं रही। हम अपने प्राचीन और जमीन से जुड़े खेलों को भूल कर पश्चिमी संस्कृति की जद में आ गए।
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जिसके कारण खेलों की बुरी दशा होती चली गई लेकिन कुछ युवाओं ने इस चकाचौंध से दूर रहकर कबड्डी में हाथ आजमाया। कोच भोले सिंह पंवार की देखरेख में कबड्डी की मजबूत पकड़ और आधुनिक गुर सीखे। प्रतियोगिताओं में परचम लहराया।
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छात्र-छात्राओं के परचम लहराने और नौकरी लग जाने के बाद मुनाजिर, दीपक, रवि कुमार, रईसुद्दीन, विनोद कुमार,योगेश कुमार जैसे किशोरों में भी कबड्डी का क्रेज बढ़ गया है।
कोच भोले सिंह पंवार के निर्देशन में अल्लीपुर खादर के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में घंटों कड़ी मेहनत करते हैं, इनमें कई ऐसे हैं, जो खेलों के मैदान से दूर रहते थे। सिर पर कबड्डी का ही जुनून सवार है।