{"_id":"6a9d03651b11f0162ed4dee7c60981b1","slug":"soch-badlo-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोच बदलें और परिवर्तन का हिस्सा बनें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सोच बदलें और परिवर्तन का हिस्सा बनें
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Mon, 18 Jan 2016 12:21 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डिक्की (दलित इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) के नार्थ इंडिया कोआर्डिनेटर संजीव डांगी ने सर्वोदय वेलफेयर सोसाइटी के बैनर तले आयोजित कार्यशाला में दलित विद्यार्थियों से सोच बदलने का आह्वान किया।
कहा कि उद्योग धंधों के क्षेत्र में एससी-एसटी के विद्यार्थियों के लिए अपार संभावनाएं हैं, परिवर्तन का हिस्सा बनें। पुरानी बातों में कुछ नहीं रखा। उन्होंने नई पीढ़ी को कारोबार के रास्ते तरक्की पाने की राहें बताईं।
उन्होंने ये बातें शहर के निशा पैलेस में बाबा साहेब डॉ.बीआर अंबेडकर की 125वीं जयंती और दलित इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डिक्की) के दसवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में दलित उद्यमिता में बेहतर भविष्य विषय पर आयोजित कार्यशाला में कही।
विज्ञापन
बताया कि, देशभर के तमाम उद्योगपति आज दलित वर्ग से हैं। उन्होंने बेहतरीन उत्पाद तैयार कर खुद को साबित किया है। बोले- आरक्षण को कोई नहीं छीन सकता, लेकिन आरक्षण से क्या समाज के सभी लोगों को नौकरी मिल सकती है, यह सवाल है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कोआर्डिनेटर लख्मी चंद्रा ने कहा कि मजबूरी की अपनी सीमा होती है, इसे कभी नहीं देखना चाहिए। छलांग लगाकर इससे आगे निकलो। दिल्ली के कोआर्डिनेटर निधिश आनंद ने कहा कि केंद्र सरकार ने कुछ योजनाएं दलितों के लिए तैयार की हैं।
इसके लाभ के लिए आगे आएं, डिक्की आपकी हरसंभव सहायता करने को तैयार है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली के एसोसिएट प्रो.डा.राजेश पासवान ने कहा कि आपको अपनी लड़ाई खुद लड़नी है। कामयाब हुए लोग विपरीत हालातों से निकलकर ही शिखर पर पहुंचे हैं।
सकारात्मक सोच के साथ आप भी मुकाम हासिल कर सकते हैं। बोले कि, डिक्की के साथ जुड़कर उसके अनुभव लेकर बिजनेस के क्षेत्र में आगे बढ़ा जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता जीएमआई के सीएमडी आरती लाल जाटव, जबकि संचालन डॉ.टीपी सिंह ने की। आयोजक प्रदीप कुमार और सह आयोजन कृष्ण कुमार रामानंदी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
ये मौजूद रहे
डा.अशोक कुमार, डा.चरन सिंह, डा.ओमकार सिंह, डा.धर्म सिंह, गजरौला चेयरमैन हरपाल सिंह, रामऔतार सिंह, पुष्पेंद्र राणा, देवराज सिंह, डा.रमेश, बौद्घ भिक्षु धम्म कीर्ति, रोहताश, गंगासहाय, अजीत सिंह, सुरजीत सिंह, परमवीर सिंह व्यास, गौरव कुमार, नौबहार सिंह, विनोद, किशन लाल नवलिया आदि मौजूद रहे।
विद्यार्थियों से साझा किए अनुभव
अमरोहा। डिक्की के दिल्ली कोआर्डिनेटर निधिश आनंद ने विद्यार्थियों के सामने अपने अनुभव साझा किए। बताया कि, मेरे अभिभावक सरकारी नौकरी में थे। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद मैंने भी नौकरी की, लेकिन नौकरी छोड़कर बिजनेस की शुरुआत की।
गोल्ड बिजनेस में हाथ आजमाया और देश को पहली बार वर्ष 2013 में 22 कैरेट गोल्ड की ज्वैलरी की सौगात दी। शुरू में व्यापारियों ने उन पर विश्वास नहीं किया, लेकिन ज्वैलरी सामने रखी और उसे परखा गया, तो हम गोल्ड के कारोबार में छा गए।
कंप्यूटर के पहले बैच के स्टूडेंट लख्मी चंद्रा
अमरोहा। गाजियाबाद के रहने वाले कंप्यूटर कारोबारी लख्मी चंद्रा ने कहा कि 1990 में कंप्यूटर के बारे में कम लोग जानते थे। कंप्यूटर को लेकर नौकरियों की भरमार थी।
मेरे संस्थान में कंप्यूटर की पढ़ाई के सबसे पहले पास आउट बैच में मैं भी शामिल था। नौकरी की, लेकिन यह मेरा मिशन नहीं था। नौकरी छोड़कर कंप्यूटर का कारोबार शुरू किया।
विज्ञापन
कहा कि उद्योग धंधों के क्षेत्र में एससी-एसटी के विद्यार्थियों के लिए अपार संभावनाएं हैं, परिवर्तन का हिस्सा बनें। पुरानी बातों में कुछ नहीं रखा। उन्होंने नई पीढ़ी को कारोबार के रास्ते तरक्की पाने की राहें बताईं।
विज्ञापन
उन्होंने ये बातें शहर के निशा पैलेस में बाबा साहेब डॉ.बीआर अंबेडकर की 125वीं जयंती और दलित इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डिक्की) के दसवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में दलित उद्यमिता में बेहतर भविष्य विषय पर आयोजित कार्यशाला में कही।
विज्ञापन
बताया कि, देशभर के तमाम उद्योगपति आज दलित वर्ग से हैं। उन्होंने बेहतरीन उत्पाद तैयार कर खुद को साबित किया है। बोले- आरक्षण को कोई नहीं छीन सकता, लेकिन आरक्षण से क्या समाज के सभी लोगों को नौकरी मिल सकती है, यह सवाल है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कोआर्डिनेटर लख्मी चंद्रा ने कहा कि मजबूरी की अपनी सीमा होती है, इसे कभी नहीं देखना चाहिए। छलांग लगाकर इससे आगे निकलो। दिल्ली के कोआर्डिनेटर निधिश आनंद ने कहा कि केंद्र सरकार ने कुछ योजनाएं दलितों के लिए तैयार की हैं।
इसके लाभ के लिए आगे आएं, डिक्की आपकी हरसंभव सहायता करने को तैयार है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली के एसोसिएट प्रो.डा.राजेश पासवान ने कहा कि आपको अपनी लड़ाई खुद लड़नी है। कामयाब हुए लोग विपरीत हालातों से निकलकर ही शिखर पर पहुंचे हैं।
सकारात्मक सोच के साथ आप भी मुकाम हासिल कर सकते हैं। बोले कि, डिक्की के साथ जुड़कर उसके अनुभव लेकर बिजनेस के क्षेत्र में आगे बढ़ा जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता जीएमआई के सीएमडी आरती लाल जाटव, जबकि संचालन डॉ.टीपी सिंह ने की। आयोजक प्रदीप कुमार और सह आयोजन कृष्ण कुमार रामानंदी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
ये मौजूद रहे
डा.अशोक कुमार, डा.चरन सिंह, डा.ओमकार सिंह, डा.धर्म सिंह, गजरौला चेयरमैन हरपाल सिंह, रामऔतार सिंह, पुष्पेंद्र राणा, देवराज सिंह, डा.रमेश, बौद्घ भिक्षु धम्म कीर्ति, रोहताश, गंगासहाय, अजीत सिंह, सुरजीत सिंह, परमवीर सिंह व्यास, गौरव कुमार, नौबहार सिंह, विनोद, किशन लाल नवलिया आदि मौजूद रहे।
विद्यार्थियों से साझा किए अनुभव
अमरोहा। डिक्की के दिल्ली कोआर्डिनेटर निधिश आनंद ने विद्यार्थियों के सामने अपने अनुभव साझा किए। बताया कि, मेरे अभिभावक सरकारी नौकरी में थे। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद मैंने भी नौकरी की, लेकिन नौकरी छोड़कर बिजनेस की शुरुआत की।
गोल्ड बिजनेस में हाथ आजमाया और देश को पहली बार वर्ष 2013 में 22 कैरेट गोल्ड की ज्वैलरी की सौगात दी। शुरू में व्यापारियों ने उन पर विश्वास नहीं किया, लेकिन ज्वैलरी सामने रखी और उसे परखा गया, तो हम गोल्ड के कारोबार में छा गए।
कंप्यूटर के पहले बैच के स्टूडेंट लख्मी चंद्रा
अमरोहा। गाजियाबाद के रहने वाले कंप्यूटर कारोबारी लख्मी चंद्रा ने कहा कि 1990 में कंप्यूटर के बारे में कम लोग जानते थे। कंप्यूटर को लेकर नौकरियों की भरमार थी।
मेरे संस्थान में कंप्यूटर की पढ़ाई के सबसे पहले पास आउट बैच में मैं भी शामिल था। नौकरी की, लेकिन यह मेरा मिशन नहीं था। नौकरी छोड़कर कंप्यूटर का कारोबार शुरू किया।