{"_id":"e365e46e945f862f01d29366e4e0083c","slug":"sharab-maut-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना पीएम कैसे कह रहे शराब से नहीं हुईं मौतें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना पीएम कैसे कह रहे शराब से नहीं हुईं मौतें
ब्यूूराे/अमर उजाला अमराेहा
Updated Sat, 28 Nov 2015 12:39 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रजबपुर थाना क्षेत्र के गांव चांदनगर, पीपलीमेकचंद और सैदनगली थाना
विज्ञापन
क्षेत्र के गांव इकौंदा में तीन लोगों की शराब पीने से मौत का मामला सामने
आया था। पुलिस ने इस मामले में अवैध शराब के माफियाओं से गठजोड़ को और
मजबूत बनाने का सुबूत पेश किया और मृतक के परिजनों और ग्रामीणों से लिखित
में ब्यान लेकर यह साबित कर दिया कि उनकी मौतें शराब पीने से नहीं हुई हैं।
चांदनगर के रामपाल को लेकर ब्यान दिया गया है कि बीमारी के कारण वह शरीर से अत्यधिक कमजोर था और उसकी लाश रेलवे लाइन के किनारे पड़ी मिली थी। यदि ऐसा था, तो पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया। पीपलीमेक चंद के सतवीर सिंह जाटव को पीलिया जबकि इकौंदा के जगदीश को टीबी का मरीज साबित करने की कोशिश की गई है।
हैरत की बात तो ये है कि पुलिस ने अवैध शराब के माफियाओं और वोटरों को लुभाने के लिए उनके सामने शराब परोस रहे प्रत्याशियों की लगाम जरा भी नहीं कसी। यदि ऐसा किया होता, तो शायद जिले में अब तक मरे छह लोग अपने परिजनों के बीच जिंदा होते।
चांदनगर के रामपाल को लेकर ब्यान दिया गया है कि बीमारी के कारण वह शरीर से अत्यधिक कमजोर था और उसकी लाश रेलवे लाइन के किनारे पड़ी मिली थी। यदि ऐसा था, तो पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया। पीपलीमेक चंद के सतवीर सिंह जाटव को पीलिया जबकि इकौंदा के जगदीश को टीबी का मरीज साबित करने की कोशिश की गई है।
हैरत की बात तो ये है कि पुलिस ने अवैध शराब के माफियाओं और वोटरों को लुभाने के लिए उनके सामने शराब परोस रहे प्रत्याशियों की लगाम जरा भी नहीं कसी। यदि ऐसा किया होता, तो शायद जिले में अब तक मरे छह लोग अपने परिजनों के बीच जिंदा होते।