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रामधारी सिंह दिनकर की जयंती मनाई
ब्यूूराे/अमर उजाला अमराेहा
Updated Wed, 23 Sep 2015 12:08 AM IST
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जेएस हिंदू पीजी कालेज में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 107 वीं जयंती की पूर्व संध्या पर हिंदी विभाग की ओर से कार्यक्रम आयोजित हुए।
प्रख्यात नवगीतकार डा. माहेश्वर तिवारी ने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर युग चेतना के प्रखर कवि थे। उन्होंने अपनी कविताओं को लोक-संस्कृति, राष्ट्रीय स्वाभिमान और मानवीय संवेदनाओं से जोड़कर समाज को एक नूतन दिशा दी। उर्वशी जहां मानवीय प्रेम और संबंधों के इर्द-गिर्द घूमती है, वहीं कुरुक्षेत्र जैसे महाभारत के शांति पर्व का काव्य रूप है। हम कितने गहरे हैं, छिछला सागर क्या जाने, धूप में जब भी जले हैं पांव, घर की याद आयी। चूल्हे पर रोटी सेंकती मां आदि रचनाएं प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी।
डा. वंदना गुप्ता ने कहा कि वे एक प्रगतिवादी और मानववादी कवि थे। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से ऐतिहासिक घटनाओं और पात्रों को ओजस्वी और प्रखर शब्दों का ताना-बाना दिया था। डा. बीना रुस्तगी ने दिनकर की कृतियों, विशेषकर हिमालय, कुरुक्षेत्र व रश्मिरथी की चर्चा करते कहा कि कवि दिनकर के गद्य तथा पद्य साहित्य व ओज कूट-कूट कर भरा है।
डा. अशोक कुमार रुस्तगी ने कहा कि उनका जन्म 23 सितंबर को 1908 को बिहार के मुंगरे जनपद के सिमरिया ग्राम में हुआ था। यहां डा.बबलू सिंह, संयुुक्ता चौहान, डा. देशमित्र त्यागी, जेबी फराह, डा. वंदना रानी गुप्ता आदि ने भी उनकी कविताओं पर प्रकाश डाला।
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प्रख्यात नवगीतकार डा. माहेश्वर तिवारी ने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर युग चेतना के प्रखर कवि थे। उन्होंने अपनी कविताओं को लोक-संस्कृति, राष्ट्रीय स्वाभिमान और मानवीय संवेदनाओं से जोड़कर समाज को एक नूतन दिशा दी। उर्वशी जहां मानवीय प्रेम और संबंधों के इर्द-गिर्द घूमती है, वहीं कुरुक्षेत्र जैसे महाभारत के शांति पर्व का काव्य रूप है। हम कितने गहरे हैं, छिछला सागर क्या जाने, धूप में जब भी जले हैं पांव, घर की याद आयी। चूल्हे पर रोटी सेंकती मां आदि रचनाएं प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी।
डा. वंदना गुप्ता ने कहा कि वे एक प्रगतिवादी और मानववादी कवि थे। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से ऐतिहासिक घटनाओं और पात्रों को ओजस्वी और प्रखर शब्दों का ताना-बाना दिया था। डा. बीना रुस्तगी ने दिनकर की कृतियों, विशेषकर हिमालय, कुरुक्षेत्र व रश्मिरथी की चर्चा करते कहा कि कवि दिनकर के गद्य तथा पद्य साहित्य व ओज कूट-कूट कर भरा है।
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डा. अशोक कुमार रुस्तगी ने कहा कि उनका जन्म 23 सितंबर को 1908 को बिहार के मुंगरे जनपद के सिमरिया ग्राम में हुआ था। यहां डा.बबलू सिंह, संयुुक्ता चौहान, डा. देशमित्र त्यागी, जेबी फराह, डा. वंदना रानी गुप्ता आदि ने भी उनकी कविताओं पर प्रकाश डाला।
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