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दीपदान करते ही छलक आए आंसू
ब्यूूराे/अमर उजाला अमराेहा
Updated Wed, 25 Nov 2015 12:17 AM IST
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महाभारत काल से चली आ रही दीपदान की प्रथा के मुताबिक, मंगलवार को चतुर्दशी की शाम को हजारों लोगों ने दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए गंगा में दीपदान किया।
अपने सगे संबंधी और परिजनों से बिछड़े लोगों को याद कर लोगों की आंखें भर आईं। इस परंपरा को निभाते वक्त गंगा घाट ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे आकाश से तारे धरती पर उतर आए हों। दीयों की रोशनी से गंगा घाट जगमगा उठा था।
ऐसा माना जाता है महाभारत युद्ध में मारे गए हजारों सैनिक और असंख्य योद्धाओं की आत्मा की शांति के लिए भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों की मौजूदगी में सर्वप्रथम चतुर्दशी को दीपदान किया था, तब से यह परंपरा चल रही है।
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मंगलवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु दीपदान के लिए घाट पर पहुंच गए थे। सूर्यास्त होते ही दीपदान का सिलसिला शुरू हो गया जो देररात तक दीपदान जारी रहा। बाद में धार्मिक अनुष्ठान करते हुए पिंडदान किया। अपनों के बीच से बिछड़ों की याद में दीपदान करते समय आंखें भर आईं।
जगमग हो उठा घाट
गंगा घाट दीपदान की रोशनी से जगमगा उठे। दीयों की रोशनी में गंगा घाट नहाए घाट की छटा देखते ही बन रही थी।
बिके पिंडदान की सामग्री
तिगरी गंगा, गढ़ मेले के साथ ब्रजघाट में दीपदान को उमडने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ के साथ गंगा घाटों विशेष इंतजाम रहे। घाटों पर दीपदान की सामग्री लेकर ब्राह्मण मौजूद रहे।
पूजा की सामग्री में पिंडदान, दीप, लौंग, बताशे, बांस की चटाई आदि सामग्री गंगा घाटों पर मौजूद रहे। काफी श्रद्धालु अपने घरों से दीपक और घी आदि लेकर गंगा घाट पर पहुंचे थे।
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अपने सगे संबंधी और परिजनों से बिछड़े लोगों को याद कर लोगों की आंखें भर आईं। इस परंपरा को निभाते वक्त गंगा घाट ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे आकाश से तारे धरती पर उतर आए हों। दीयों की रोशनी से गंगा घाट जगमगा उठा था।
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ऐसा माना जाता है महाभारत युद्ध में मारे गए हजारों सैनिक और असंख्य योद्धाओं की आत्मा की शांति के लिए भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों की मौजूदगी में सर्वप्रथम चतुर्दशी को दीपदान किया था, तब से यह परंपरा चल रही है।
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मंगलवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु दीपदान के लिए घाट पर पहुंच गए थे। सूर्यास्त होते ही दीपदान का सिलसिला शुरू हो गया जो देररात तक दीपदान जारी रहा। बाद में धार्मिक अनुष्ठान करते हुए पिंडदान किया। अपनों के बीच से बिछड़ों की याद में दीपदान करते समय आंखें भर आईं।
जगमग हो उठा घाट
गंगा घाट दीपदान की रोशनी से जगमगा उठे। दीयों की रोशनी में गंगा घाट नहाए घाट की छटा देखते ही बन रही थी।
बिके पिंडदान की सामग्री
तिगरी गंगा, गढ़ मेले के साथ ब्रजघाट में दीपदान को उमडने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ के साथ गंगा घाटों विशेष इंतजाम रहे। घाटों पर दीपदान की सामग्री लेकर ब्राह्मण मौजूद रहे।
पूजा की सामग्री में पिंडदान, दीप, लौंग, बताशे, बांस की चटाई आदि सामग्री गंगा घाटों पर मौजूद रहे। काफी श्रद्धालु अपने घरों से दीपक और घी आदि लेकर गंगा घाट पर पहुंचे थे।