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हिस्ट्रीशीटर संजीव समेत 12 को उम्रकैद, 14.41 लाख जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Wed, 04 Nov 2015 12:22 AM IST
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विशेष सत्र एवं जनपद न्यायाधीश बीडी भारती ने नौ साल पुराने मर्डर के एक मामले में हिस्ट्रीशीटर संजीव समेत 12 लोगों को आजीवन कारावास और 14 लाख 41 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
जुर्माने में से आधी रकम मृतक की पत्नी को देने के आदेश दिए हैं। अभियुक्तों ने वर्ष 2006 में मुकदमा वापस न लेने पर गांव अक्खा नंगला के एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी थी और लाश को बाइक पर रखकर गांव में घुमाया था।
नौगावां सादात थाना क्षेत्र के गांव अक्खा नंगला निवासी योगेंद्र पुत्र सुखीराम 18 नवंबर 2006 की शाम चार बजे अमरोहा से अपने गांव जा रहा था।
भैंड़ा भरतपुर गांव के जंगल में रायफल, बंदूकों से लैस गांव के ही 14 लोगों ने योगेंद्र को घेर लिया था और गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी और मृतक का मोबाइल, रायफल की मैगजीन और दस हजार रुपये लूट लिए थे।
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संजीव पुत्र ऋषिपाल ने अपने भाइयों के साथ मिलकर योगेंद्र की लाश को बाइक पर रखकर गांवभर में घुमाकर दहशत फैला दी थी।
मृतक के भाई देवेंद्र की तहरीर पर नरेंद्र, देवेंद्र पुत्रगण टीकम, संजीव, निरंजीव व कपिल पुत्रगण ऋषिपाल, कुवरपाल, जसपाल, अमर सिंह पुत्रगण काशीराम, प्रभाकर पुत्र देवेंद्र, विजेंद्र पुत्र पीतम निवासी गांव अक्खा नंगला, होमपाल पुत्र हेम सिंह, वीरेंद्र पुत्र होमपाल निवासी गांव समदपुर, संतराम व महावीर पुत्रगण भगवानदास निवासी गांव उमरी जानिवगर्व के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने हत्याभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जयपाल, अमरपाल व संजीव को छोड़कर अन्य अभियुक्त जमानत पर रिहा होकर जेल से बाहर आ गए थे। किशोर होने के कारण निरंजीव का मामला किशोर न्यायालय में विचाराधीन है जबकि दौराने मुकदमा नरेंद्र की मौत हो गई।
मंगलवार को विशेष सत्र एवं अपर जनपद न्यायाधीश बीडी भारती ने मामले की सुनवाई की। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी आरबी सिंह और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नरेंद्र सिंह सैनी ने जोरदार बहस की और अभियुक्तों को कड़ी से कड़ी सजा देने की अदालत से अपील की।
न्यायाधीश ने दोष सिद्ध करते हुए सभी 12 अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई। संजीव पर 1.21 लाख, तो शेष पर 1.20-1.20 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। जुर्माने में से आधी रकम मृतक की पत्नी उर्मिला को देने के आदेश दिए। दोषियों को पुलिस कस्टडी में जेल भेज दिया गया।
वर्ष 2002 से शुरू हुई थी रंजिश
अमरोहा। नौगावां सादात थाना क्षेत्र के गांव अक्खा नंगला में इस रंजिश की शुरुआत वर्ष 2002 से हुई थी। संजीव पक्ष के लोगों ने योगेंद्र पक्ष पर जानलेवा हमला किया था। जिसका मामला अदालत में विचाराधीन था।
संजीव पक्ष लगातार योगेंद्र पर फैसला करने का दबाव बना रहा था। लेकिन योगेंद्र ने फैसला करने से साफ इनकार कर दिया था। इस प्रकरण में संजीव पक्ष के कई लोग फंसे हुए थे और चार साल में ही यह रंजिश योगेंद्र की हत्या के साथ खूनी रंजिश में बदल गई थी।
11 लोगों की हुई गवाही
अमरोहा। योगेंद्र हत्याकांड में अदालत में 11 लोगों की गवाही हुई। एक गवाह को कोर्ट ने तलब किया था जबकि अभियुक्तों की तरफ से तीन लोगों ने ही गवाही दी।
संजीव ने दो गवाहों को भी मौत के घाट उतारा
अमरोहा। योगेंद्र की हत्या करने के बाद संजीव के कदम यहीं नहीं ठहरे। वह अपराध की दुनियां में कूद गया। योगेंद्र की हत्या के कुछ समय बाद दो गवाहों की भी हत्या करने के अलावा एक और हत्या का भी उस पर आरोप है। तीनों मामले विशेष सत्र न्यायालय में विचाराधीन हैं। इन मामलों पर भी जल्द सुनवाई होने की उम्मीद है।
सजा सुनते ही रो पड़े दोषी
अमरोहा। एक साथ एक ही खानदान के 12 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनते ही दोषी रो पड़े। अदालत में ही उनकी आंखों से आंसू टप टप टपकने लगे थे।दोषियों को जब पुलिस कस्टडी में जेल ले जाया जा रहा था, तब उनके परिजन भी रोने लगे।
न्याय की जीत हुई: देवेंद्र
अमरोहा। मृतक योगेंद्र के भाई देवेंद्र ने बताया कि यह न्याय की जीत है। उसके भाई ने हमेशा न्याय की लड़ाई लड़ी थी और अदालत ने अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाकर उनकी नजरों में न्याय को और मजबूत बना दिया है। देवेंद्र ने बताया कि संजीव जब जेल से भागा था तब उसका परिवार, रिश्तेदार और गवाह दहशत की जिंदगी गुजार रहे थे।
गत वर्ष 28 अक्तूबर को फरार हुआ था संजीव
अमरोहा। फर्रुखाबाद की फतेहगढ़ सेंट्रल जेल से 28 अक्तूबर को संजीव को पुलिस कस्टडी में अदालत लाया गया था और वापस जाते समय वह पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया था। संजीव को पेशी पर लाने वाले दो सिपाहियों शिवकुमार और जैकी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया था।
फर्रुखाबाद और मुरादाबाद पुलिस ने फरार संजीव के सिर पर इनाम भी रखा था। नौ माह बाद जुलाई माह में गाजियाबाद पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान संजीव को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया था और उसके कब्जे से दो पिस्टल भी बरामद हुए थे।
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जुर्माने में से आधी रकम मृतक की पत्नी को देने के आदेश दिए हैं। अभियुक्तों ने वर्ष 2006 में मुकदमा वापस न लेने पर गांव अक्खा नंगला के एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी थी और लाश को बाइक पर रखकर गांव में घुमाया था।
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नौगावां सादात थाना क्षेत्र के गांव अक्खा नंगला निवासी योगेंद्र पुत्र सुखीराम 18 नवंबर 2006 की शाम चार बजे अमरोहा से अपने गांव जा रहा था।
भैंड़ा भरतपुर गांव के जंगल में रायफल, बंदूकों से लैस गांव के ही 14 लोगों ने योगेंद्र को घेर लिया था और गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी और मृतक का मोबाइल, रायफल की मैगजीन और दस हजार रुपये लूट लिए थे।
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संजीव पुत्र ऋषिपाल ने अपने भाइयों के साथ मिलकर योगेंद्र की लाश को बाइक पर रखकर गांवभर में घुमाकर दहशत फैला दी थी।
मृतक के भाई देवेंद्र की तहरीर पर नरेंद्र, देवेंद्र पुत्रगण टीकम, संजीव, निरंजीव व कपिल पुत्रगण ऋषिपाल, कुवरपाल, जसपाल, अमर सिंह पुत्रगण काशीराम, प्रभाकर पुत्र देवेंद्र, विजेंद्र पुत्र पीतम निवासी गांव अक्खा नंगला, होमपाल पुत्र हेम सिंह, वीरेंद्र पुत्र होमपाल निवासी गांव समदपुर, संतराम व महावीर पुत्रगण भगवानदास निवासी गांव उमरी जानिवगर्व के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने हत्याभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जयपाल, अमरपाल व संजीव को छोड़कर अन्य अभियुक्त जमानत पर रिहा होकर जेल से बाहर आ गए थे। किशोर होने के कारण निरंजीव का मामला किशोर न्यायालय में विचाराधीन है जबकि दौराने मुकदमा नरेंद्र की मौत हो गई।
मंगलवार को विशेष सत्र एवं अपर जनपद न्यायाधीश बीडी भारती ने मामले की सुनवाई की। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी आरबी सिंह और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नरेंद्र सिंह सैनी ने जोरदार बहस की और अभियुक्तों को कड़ी से कड़ी सजा देने की अदालत से अपील की।
न्यायाधीश ने दोष सिद्ध करते हुए सभी 12 अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई। संजीव पर 1.21 लाख, तो शेष पर 1.20-1.20 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। जुर्माने में से आधी रकम मृतक की पत्नी उर्मिला को देने के आदेश दिए। दोषियों को पुलिस कस्टडी में जेल भेज दिया गया।
वर्ष 2002 से शुरू हुई थी रंजिश
अमरोहा। नौगावां सादात थाना क्षेत्र के गांव अक्खा नंगला में इस रंजिश की शुरुआत वर्ष 2002 से हुई थी। संजीव पक्ष के लोगों ने योगेंद्र पक्ष पर जानलेवा हमला किया था। जिसका मामला अदालत में विचाराधीन था।
संजीव पक्ष लगातार योगेंद्र पर फैसला करने का दबाव बना रहा था। लेकिन योगेंद्र ने फैसला करने से साफ इनकार कर दिया था। इस प्रकरण में संजीव पक्ष के कई लोग फंसे हुए थे और चार साल में ही यह रंजिश योगेंद्र की हत्या के साथ खूनी रंजिश में बदल गई थी।
11 लोगों की हुई गवाही
अमरोहा। योगेंद्र हत्याकांड में अदालत में 11 लोगों की गवाही हुई। एक गवाह को कोर्ट ने तलब किया था जबकि अभियुक्तों की तरफ से तीन लोगों ने ही गवाही दी।
संजीव ने दो गवाहों को भी मौत के घाट उतारा
अमरोहा। योगेंद्र की हत्या करने के बाद संजीव के कदम यहीं नहीं ठहरे। वह अपराध की दुनियां में कूद गया। योगेंद्र की हत्या के कुछ समय बाद दो गवाहों की भी हत्या करने के अलावा एक और हत्या का भी उस पर आरोप है। तीनों मामले विशेष सत्र न्यायालय में विचाराधीन हैं। इन मामलों पर भी जल्द सुनवाई होने की उम्मीद है।
सजा सुनते ही रो पड़े दोषी
अमरोहा। एक साथ एक ही खानदान के 12 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनते ही दोषी रो पड़े। अदालत में ही उनकी आंखों से आंसू टप टप टपकने लगे थे।दोषियों को जब पुलिस कस्टडी में जेल ले जाया जा रहा था, तब उनके परिजन भी रोने लगे।
न्याय की जीत हुई: देवेंद्र
अमरोहा। मृतक योगेंद्र के भाई देवेंद्र ने बताया कि यह न्याय की जीत है। उसके भाई ने हमेशा न्याय की लड़ाई लड़ी थी और अदालत ने अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाकर उनकी नजरों में न्याय को और मजबूत बना दिया है। देवेंद्र ने बताया कि संजीव जब जेल से भागा था तब उसका परिवार, रिश्तेदार और गवाह दहशत की जिंदगी गुजार रहे थे।
गत वर्ष 28 अक्तूबर को फरार हुआ था संजीव
अमरोहा। फर्रुखाबाद की फतेहगढ़ सेंट्रल जेल से 28 अक्तूबर को संजीव को पुलिस कस्टडी में अदालत लाया गया था और वापस जाते समय वह पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया था। संजीव को पेशी पर लाने वाले दो सिपाहियों शिवकुमार और जैकी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया था।
फर्रुखाबाद और मुरादाबाद पुलिस ने फरार संजीव के सिर पर इनाम भी रखा था। नौ माह बाद जुलाई माह में गाजियाबाद पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान संजीव को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया था और उसके कब्जे से दो पिस्टल भी बरामद हुए थे।