{"_id":"45-32331","slug":"Amroha-32331-45","type":"story","status":"publish","title_hn":"जुबिलेंट पर 28.46 करोड़ का जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जुबिलेंट पर 28.46 करोड़ का जुर्माना
Amroha
Updated Tue, 16 Sep 2014 05:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमरोहा। गजरौला स्थित जुबिलेंट लाइफ साइंसेज लिमिटेड फैक्ट्री पर प्रशासन ने स्टांप चोरी के एक मामले में 28.46 करोड़ दस हजार रुपये का जुर्माना ठोंका है। चार वर्ष पूर्व वाम आर्गेनिक से जुबिलेंट लाइफ साइंसेज को संपत्ति हस्तांतरण के दौरान स्टांप चोरी सामने आने पर दो तहसीलदारों और एआईजी स्टांप की जांच के बाद एडीएम कोर्ट ने जुर्माने का फैसला सुनाया है।
वर्ष 2010 में गजरौला इंडस्ट्रीयल एरिया में वाम आर्गेनिक फैक्ट्री का नाम बदलकर जुबिलेंट आर्गेनिक किया गया था। जोकि बाद में जुबिलेंट लाइफ साइंसेज लिमिटेड में बदला गया। प्रशासन का आरोप है कि जुबिलेंट प्रबंधन ने वाम आर्गेनिक से संपत्ति हस्तांतरित करने में एक भी रुपये का स्टांप शुल्क अदा नहीं किया। जबकि राजस्व अभिलेखों में संपत्ति का दाखिल खारिज भी कराया गया था। प्रशासन की ओर से इस संबंध में जुबिलेंट प्रबंधन को नोटिस भी दिए गए। जिसमें फैक्ट्री की ओर से जवाब भी दाखिल किए गए। इसमें एक ही ग्रुप की कंपनी के नाम परिवर्तन में स्टांप की जरूरत नहीं होने का तर्क दिया था। प्रशासन ने इस मामले को स्टांप चोरी का मानते हुए पहले हसनपुर के तहसीलदार से और फिर मंडी धनौरा के तहसीलदार से जांच कराई। जांच में दाखिल खारिज होने पर स्टांप चोरी का मामला पाया। बाद में एआईजी स्टांप ने भी जांच करके स्टांप चोरी होना बताया। सोमवार को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मोहम्मद अकमल अख्तर ने जुबिलेंट लाइफ साइंसेज लिमिटेड पर स्टांप चोरी का मामला मानते हुए 28 करोड़ 46 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना ठोंकने के आदेश कर दिए।
विज्ञापन
वर्ष 2010 में गजरौला इंडस्ट्रीयल एरिया में वाम आर्गेनिक फैक्ट्री का नाम बदलकर जुबिलेंट आर्गेनिक किया गया था। जोकि बाद में जुबिलेंट लाइफ साइंसेज लिमिटेड में बदला गया। प्रशासन का आरोप है कि जुबिलेंट प्रबंधन ने वाम आर्गेनिक से संपत्ति हस्तांतरित करने में एक भी रुपये का स्टांप शुल्क अदा नहीं किया। जबकि राजस्व अभिलेखों में संपत्ति का दाखिल खारिज भी कराया गया था। प्रशासन की ओर से इस संबंध में जुबिलेंट प्रबंधन को नोटिस भी दिए गए। जिसमें फैक्ट्री की ओर से जवाब भी दाखिल किए गए। इसमें एक ही ग्रुप की कंपनी के नाम परिवर्तन में स्टांप की जरूरत नहीं होने का तर्क दिया था। प्रशासन ने इस मामले को स्टांप चोरी का मानते हुए पहले हसनपुर के तहसीलदार से और फिर मंडी धनौरा के तहसीलदार से जांच कराई। जांच में दाखिल खारिज होने पर स्टांप चोरी का मामला पाया। बाद में एआईजी स्टांप ने भी जांच करके स्टांप चोरी होना बताया। सोमवार को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मोहम्मद अकमल अख्तर ने जुबिलेंट लाइफ साइंसेज लिमिटेड पर स्टांप चोरी का मामला मानते हुए 28 करोड़ 46 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना ठोंकने के आदेश कर दिए।
विज्ञापन