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गांव लौटे प्रवासियों को मिला मनरेगा का सराहा
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धौलछीना (अल्मोड़ा)। लॉकडाउन के बाद विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में गांव लौटे प्रवासियों को अब मनरेगा का सहारा मिला है। प्रवासियों के समक्ष काम की समस्या को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न पंचायतों में मनरेगा के तहत उन्हें रोजगार उपलब्ध करवाया जा रहा है।
विकासखंड भैसियाछाना के विभिन्न गांवों में महात्मा गांधी रूरल एंप्लाइमेंट गारंटी एक्ट के तहत काम दिया जा रहा है।
योजना के तहत सरकार ने मनरेगा की मजदूरी 182 रुपये से बढ़ाकर 201 रुपये कर दी है। ऐसे में विकासखंड के गांवों में लौटे सैकडों प्रवासी मजदूर योजना के तहत गांवों में काम में जुट गए हैं। ग्राम पंचायत कलौन में इन दिनों काफी संख्या में प्रवासी मनरेगा योजना के तहत काम कर रहे हैं। जिनमें हाई स्कूल से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट तक शिक्षा ग्रहण करने वाले युवक भी शामिल हैं।
ग्राम प्रधान चंद्र सिंह महरा ने बताया कि इन दिनों जल संचय के तहत खाल और खंती खोदने का काम जोर-शोर से चल रहा है, ताकि पेयजल श्रोतों का संरक्षण हो सके और प्रकृति को हरा भरा करने में भी मदद मिले। प्रवासी युवकों के साथ ही स्थानीय युवक भी मनरेगा योजना में काम कर रहे हैं। कार्य स्थल पर साबुन, पानी, मास्क की व्यवस्था की गई है।
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गांव के निवासी अशोक महरा, गुड्डू महरा, चंदन महरा, हरीश महरा, सूरज महरा, दीपक महरा ने बताया कि लॉकडाउन के बीच मजदूरों के लिए काफी समस्या उत्पन्न हो रही थी। ऐसे में मनरेगा के तहत काम शुरू होने से कुछ हद तक मजदूरों की समस्या दूर होगी। कई ऐसे प्रवासी भी है जो बाहर प्रदेशों से आकर गांव में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि साथ में काम करने में अच्छा लग रहा है। इन परिस्थितियों में रोजगार मिलने से रोजी रोटी की समस्या भी दूर होगी।
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विकासखंड भैसियाछाना के विभिन्न गांवों में महात्मा गांधी रूरल एंप्लाइमेंट गारंटी एक्ट के तहत काम दिया जा रहा है।
योजना के तहत सरकार ने मनरेगा की मजदूरी 182 रुपये से बढ़ाकर 201 रुपये कर दी है। ऐसे में विकासखंड के गांवों में लौटे सैकडों प्रवासी मजदूर योजना के तहत गांवों में काम में जुट गए हैं। ग्राम पंचायत कलौन में इन दिनों काफी संख्या में प्रवासी मनरेगा योजना के तहत काम कर रहे हैं। जिनमें हाई स्कूल से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट तक शिक्षा ग्रहण करने वाले युवक भी शामिल हैं।
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ग्राम प्रधान चंद्र सिंह महरा ने बताया कि इन दिनों जल संचय के तहत खाल और खंती खोदने का काम जोर-शोर से चल रहा है, ताकि पेयजल श्रोतों का संरक्षण हो सके और प्रकृति को हरा भरा करने में भी मदद मिले। प्रवासी युवकों के साथ ही स्थानीय युवक भी मनरेगा योजना में काम कर रहे हैं। कार्य स्थल पर साबुन, पानी, मास्क की व्यवस्था की गई है।
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गांव के निवासी अशोक महरा, गुड्डू महरा, चंदन महरा, हरीश महरा, सूरज महरा, दीपक महरा ने बताया कि लॉकडाउन के बीच मजदूरों के लिए काफी समस्या उत्पन्न हो रही थी। ऐसे में मनरेगा के तहत काम शुरू होने से कुछ हद तक मजदूरों की समस्या दूर होगी। कई ऐसे प्रवासी भी है जो बाहर प्रदेशों से आकर गांव में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि साथ में काम करने में अच्छा लग रहा है। इन परिस्थितियों में रोजगार मिलने से रोजी रोटी की समस्या भी दूर होगी।