अल्मोड़ा। कोरोना महामारी के चलते बृहस्पतिवार को शहर में भगवान विश्वकर्मा की जयंती सादगी से मनाई गई। इस साल सर्व पितृ अमावस्या और भगवान विश्वकर्मा जयंती एक ही दिन पड़ने से दोनों पर्व एक साथ मनाए गए। एक ओर घर-घर में पितरों के निमित्त अर्पण-तर्पण किया गया।
दुकानों, कार्यालयों, प्रतिष्ठानों में विविध यंत्रों की पूजा-अर्चना करके भगवान विश्वकर्मा को याद किया गया। नगर के मिलन चौक स्थित श्री शै: भैरव मंदिर में हर साल भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा पंडाल में रखकर जयंती धूमधाम से मनाई जाती थी। विश्वकर्मा जयंती के दूसरे दिन भगवान विश्वकर्मा की शोभायात्रा निकलती थीं। इनमें सैकड़ों श्रमिक आते थे। मंदिर में भंडारा होता था। इस बार कोरोनाकाल में विश्वकर्मा जयंती पर डोले की शोभायात्रा नहीं निकली। प्रतीकात्मक डोले को कुछ ही लोगों ने क्वारब संगम पर विसर्जित किया। श्री शै: भैरव मंदिर में विश्वकर्मा दिवस पर सुबह दस बजे पूजा, अर्चना कर हवन यज्ञ किया। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार, व्यवसाय, उद्योग में प्रगति होती है। हवन, यज्ञ करने वालों में प्रकाश कुशवाहा, दलीप पटेल, मोहित शर्मा, रमेश पाल, मौजी पटेल, राजेश शर्मा, छोटे लाल शर्मा, भोला प्रसाद आदि थे। फलसीमा स्थित आईटीआई में विश्वकर्मा जयंती पर भगवान विश्वकर्मा के साथ ही मशीनों, औजारों की पूजा की गई। इस मौके पर प्रधानाचार्य दीपक कुमार चौधरी, फोरमैन ललित पंत, किशन सिंह जड़ौत, घनश्याम पंत, पुष्कर मेहरा, नवीन भोज, प्रकाश जोशी, कुलदीप सिंह बंगारी आदि थे।