उत्तराखंड के 9 बागी विधायकों की सदस्यता निरस्त!
- देर रात स्पीकर ने नौ बागी विधायकों की सदस्यता रद्द।
- नौ विधायक विधानसभा में वोट नहीं दे सकेंगे।
- राष्ट्रपति शासन की आशंका को देखते हुए आनन-फानन में फैसला।
विस्तार
उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने देर रात कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता निरस्त कर दी है। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल देर रात विधानसभा पहुंचे। माना जा रहा है कि दिल्ली में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक के बाद राष्ट्रपति शासन की आशंका को देखते हुए आनन-फानन में यह फैसला किया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत सहित नौ बागी विधायकों को इससे पहले 19 मार्च को दल बदल कानून के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जवाब देने के लिए सात दिन का समय देते हुए 26 मार्च को शाम पांच बजे तक का समय निर्धारित किया गया था।
शनिवार को देर शाम तक कांग्रेस के बागी विधायकों ने अपने प्रतिनिधियों के जरिये जवाब भी दाखिल कर दिया था, वहीं स्पीकर से अधिक समय दिए जाने की मांग भी की। इस पर स्पीकर ने बागी विधायकों की मांग पर उन्हें रविवार सुबह नौ बजे तक का समय जवाब को पुष्ट करने और अन्य डॉक्यूमेंट जमा करने के लिए दे दिया।
संसदीय कार्यमंत्री ने किया इनकार
माना जा रहा था कि बागी विधायकों को कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मौका देने से बचने के लिए सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई 27 को शाम तक ही की जाएगी।
देर रात मिली जानकारी के मुताबिक विधानसभा अध्यक्ष ने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, हरक सिंह, उमेश शर्मा काऊ, प्रदीप बतरा, सुबोध उनियाल, शैलेंद्र मोहन सिंघल, शैलारानी रावत, अमृता रावत और कुंवर प्रणव की सदस्यता समाप्त कर दी। इस मामले को लेकर स्पीकर से बात करने की कोशिश की गई, पर उनका फोन नहीं उठा। विधानसभा सचिव का फोन भी स्विच ऑफ था।
मेरी देर रात स्पीकर महोदय से बात हुई है। अभी तक किसी भी विधायक की सदस्यता रद्द नहीं की गई है। स्पीकर ने सभी को एक बार फिर रविवार की सुबह नौ बजे अपना पक्ष रखने का समय दिया है। इसलिए अभी सदस्यता रद्द कैसे हो सकती है? चूंकि मैं अपने दल ही मुख्य सचेतक हूं और मेरे ही प्रत्यावेदन पर यह सुनवाई हो रही है, इसलिए मैंने स्पीकर से पूछा तो उन्होंने किसी की सदस्यता रद्द करने से फिलहाल इनकार किया है।
-डॉ. इंदिरा हृदयेश, संसदीय कार्यमंत्री