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आखिर किसने जिया उल हक को मारी गोली?
लखनऊ/ ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 06 Mar 2013 10:26 AM IST
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डीएसपी जिया उल हक को गोली किसने मारी? उन्हें किस बोर की गोली मारी गई? हत्या के तीन घंटे बाद तक डीएसपी की लाश क्यों नहीं ढूंढ़ी जा सकी? पुलिस के पास अब तक इन सवालों का कोई जवाब नहीं है।
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हत्या के तीन दिन बाद भी इन सवालों का जवाब नहीं ढूंढ़ा जा सका है ओर अब ये जांच सीबीआई को स्थानांतरित कर दी गई है। वहीं क्षेत्राधिकारी जिया उल हक की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने हत्या के रहस्य को और गहरा दिया है।
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पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि जिया उल हक को केवल एक गोली लगी थी, वह भी उन्हें पीछे से मारी गई थी। प्रदेश के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अरुण कुमार ने कहा, ‘जिया उल हक को केवल एक गोली ही गोली लगी थी और यह उनकी पीठ को चीर कर सीने से आर-पार हो गई।'
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हालांकि हक की पत्नी परवीन आजाद ने पहले दिए बयान में कहा था कि डीएसपी को तीन गोलियां लगी थी, जिनमें दो पैरों में और एक सीने में लगी थी।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि पीठ में मारी गई गोली सीना चीर कर आर-पार हो गई। हालांकि इस गोली को भी अब तक तलाशा नहीं जा सका है।
तीन घंटे तक पड़ी रही लाश
जिया उल हक की हत्या शनिवार शाम को ही कर दी गई थी और तीन घंटों तक उनकी लाश वारदात की जगह ही पड़ी रही। पुलिस बड़ी मेहनत से लाश ढूंढ़ पाई।
इसके कुछ घंटों बाद ही तीन डॉक्टरों के पैनल ने वीडियो कैमरे के सामने लाश का पोस्टमॉर्टम किया। पोस्टमॉर्टम में यह पाया गया कि गोली जिया उल हक के शरीर को चीर कर निकल गई थी।
गोली किस बोर की थी, ये जानने के लिए पुलिस ने मंगलवार को वारदात वाली जगह पर इसकी तलाश शुरु की गई। घटना स्थल पर फोरेंसिक विशेषज्ञों ने गोली की तलाश की। हालांकि अरुण्ा कुमार ने बताया कि देर शाम तक इसमें कामयाबी नहीं मिली थी।
गोली का मिलना बहुत जरूरी
इस मामले में अफसर कह रहे हैं कि जब तक गोली नहीं मिल जाती यह पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकेगा कि किस बोर के असलहे का इस्तेमाल किया गया। बोर तय होने के बाद उस असलहे की तलाश हो सकेगी।
पुलिस अफसरों ने बताया कि बलीपुर गांव में 16 से अधिक लाइसेंसी शस्त्र मौजूद हैं। बोर का पता लगने के बाद ही इसकी भी जानकारी हो सकेगी कि जिया उल हक को गोली किसके शस्त्र से लगी?
सर्विस रिवाल्वर भी नहीं मिली
घटना के शुरूआत में यह बात भी सामने आई थी कि जिया उल हक को उन्हीं की सर्विस रिवाल्वर छीन कर गोली मार दी गई थी।
इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा था कि जब सीओ और उनके साथ गए इंस्पेक्टर, एसएसआई व गनर को लोगों ने घेर कर मारपीट करनी शुरू कर दी थी, तब वे वहां से भाग निकले थे।
जिया उल हक भाग कर दूसरे रास्ते पर चले गए थे जहां कीचड़ था, जिसमें वह फंस गए। यहां से लोगों ने उन्हें घसीट कर बाहर निकाला और उसके बाद गोली मार दी गई।
इस पर अधिकारियों का कहना है कि जब सीओ को लगी गोली बरामद नहीं होती और उनका लूटा गया रिवाल्वर बरामद नहीं होता, तब तक इसके बारे में पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।
थाना बना ससुराल, आरोपी हुए दामाद
वहीं हक की हत्या के बाद भी पुलिस आरोपियों के खिलाफ जरा भी सख्ती नहीं दिखा रही है। सोमवार को गिरफ्तारी के बाद आरोपी गुड्डू सिंह और राजीव सिंह हथिगवां थाने में टहल कर सिगरेट पीते देखे गए।
जब एडीजी लॉ एण्ड आर्डर अरुण कुमार से इस बाबत सवाल किया गया तो उन्होंने मामले की जांच बैठा दी। इस मामले में हथिगवां थाने के एसओ मनोज शुक्ला के रवैये पर भी सवाल उठने लगे हैं।
मंगलवार को फोरेंसिक टीम जब जांच के लिए हथिगवां पहुंची तो उनके साथ गए एसओ मनोज शुक्ला खुली पिस्टल पीठ में खोंसकर फिल्मी स्टाइल में घूमते देखे गए।
पता लगाने की कोशिश
‘नामजद लोगों की गिरफ्तारी की कोशिश हो रही है। इनके पकड़े जाने के बाद यह सामने आ सकेगा कि किसने सीओ को गोली मारी और किस असलहे से? यह भी पता लगने की उम्मीद है कि लूटी गई सर्विस रिवाल्वर किसके पास है?’ आरके विश्वकर्मा, आईजी कानून-व्यवस्था