जबर्दस्त कयास, मेरठ में मोदी क्या बोलेंगे?
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भाजपा की विजय शंखनाद रैली पर विपक्षी दलों की भी पूरी नजर है। माना जा रहा है कि दो फरवरी को मेरठ में होने वाली रैली में नरेंद्र मोदी पश्चिम के हर महत्वपूर्ण मसले पर बोलेंगे। इसमें गन्ने का मुद्दा प्राथमिकता पर रखे जाने की संभावना है।
सबसे महत्वपूर्ण यह है कि वह मुजफ्फरनगर दंगों पर कितना और क्या बोलेंगे? इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। युवा मतदाताओं में जोश भरने के लिए वह उनकी नब्ज के हिसाब से शब्दों के बाण छोड़ सकते हैं। इसके अलावा जाट आरक्षण के मुद्दे को भी उनके भाषण का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
अब तक की रैलियों में मोदी ने अपने भाषणों में कड़े प्रहार किए हैं। पश्चिम में मोदी की रैली राजनीतिक तौर पर काफी अहम है। दंगे के बाद के हालात में मोदी की रैली के मायने और अधिक हैं। 11 फरवरी को सहारनपुर में सपा की रैली होनी है। संभावना है कि पश्चिम के बड़े नेता रशीद मसूद सपा में शामिल होंगे। इसलिए भाजपा मोदी के जरिए इस मामले में पहले से ही सपा पर हमले बोल सकती है।
जाट आरक्षण पर खूब बोलेंगे मोदी!
दिसंबर में मेरठ में संकल्प रैली कर रालोद ने अपने परंपरागत वोटों को अपने साथ दिखाने का प्रयास किया था। संभावना है कि मोदी अपने भाषण में जाट आरक्षण पर खूब बोलेंगे। इसके लिए राज्यों में भाजपा द्वारा जाटों को दिए गए आरक्षण का हवाला दिया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में भी भाजपा के शासन काल में जाटों को आरक्षण दिया गया था।
गन्ने से कई पर साधेंगे निशाना:
पिछले कई भाषणों में मोदी गन्ना किसानों के दर्द को बखूबी उठा चुके हैं। पश्चिम की राजनीति में गन्ने के महत्व को देखते हुए रैली में गन्ने का मुद्दा खूब उठाए जाने की संभावना है। दरअसल, भाजपाइयों का मानना है कि गन्ना किसानों की हालत के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार बताते हुए केंद्र सरकार और रालोद को भी घेरा जा सकता है। बकाया भुगतान न होने से परेशान गन्ना किसान की दुखती रग पर हाथ रखना चुनावी लाभ दे सकता है।
आप फैक्टर भी छाया रहेगा:
एनसीआर में होने के कारण रैली में आप फैक्टर भी छाए रहने की उम्मीद है। भाजपा के भीड़ के दावों पर गौर किया जाए तो पश्चिम में अब तक की यह सबसे बड़ी रैली साबित होगी। दंगों के बाद बदले हालात में पश्चिम में भाजपा को लाभ मिलने की बात भी कही जा रही है। फायदे की इस बुनियाद को और मजबूत करने के लिए मोदी के भाषण में राष्ट्रीय से ज्यादा पश्चिम से जुड़े मामले प्रमुख रहने की उम्मीद है।
क्रांति से जोश भरने की उम्मीद
मंगल पांडे से इतिहास जुड़ा होने के कारण मोदी अपने भाषण में आजादी की पहली लड़ाई का जिक्र कर जोश भर सकते हैं। स्लाटर हाउस खोलने के मुद्दे पर भी मोदी के बोल तीखे हो सकते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश सैनिक प्रकोष्ठ के संयोजक कर्नल राजीव का कहना है कि सैनिकों से संबंधित कई मांगों को लेकर पार्टी नेतृत्व को अवगत कराया गया है। एनसीआर में राष्ट्रीय शहीद स्मारक के निर्माण की घोषणा करने की भी मांग की गई है।
उद्योग, रोजगार और विकास:
मेरठ सहित कई जिलों में परंपरागत उद्योग भी समय के साथ दम तोड़ गए। गुजरात के औद्योगिक विकास का हवाला देकर यहां पर उद्योग और युवाओं के रोजगार को मुद्दा बनाया जा सकता है। यहां भी गन्ने से जोड़कर गुड़ और खांडसारी उद्योग का विशेष तौर पर जिक्र हो सकता है।
बड़े चौधरी और टिकैत भी:
मोदी अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और दिग्गज किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत का भी जिक्र कर सकते हैं। माना जा रहा है कि किसान बिरादरी को अपने पाले में करने के लिए यह दो नाम अहम साबित होंगे।
मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण को लेकर भाजपा सतर्क
मोदी की रैली को लेकर भाजपा में जितना उत्साह है, उतना ही सतर्कता भी है। भाजपा अपनी ताकत का तो अहसास कराना चाहती है, लेकिन ऐसा कोई बयान नहीं देना चाहती, जिससे मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण हो जाए।
पिछले चुनाव पर नजर डालें तो रालोद गठबंधन से उसने इसी का फायदा उठाया। मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल बसपा के मलूक नागर से करीब 47 हजार वोटों से जीते। लेकिन इस जीत में मुस्लिम वोटों का बिखराव, भाजपा का रालोद से गठबंधन और मलूक नागर से गुर्जर समाज की कुछ कारणों से नाराजगी को अहम माना गया। सपा से उस बार भी प्रत्याशी रहे शाहिद मंजूर को 1.83 लाख वोट मिले थे। निर्दलीय चुनाव लड़े शाहिद अखलाक को 34 हजार वोट प्राप्त हुए थे। मलूक नागर को मुस्लिम वोट भी अच्छी संख्या में मिला था।
लेकिन इस बार परिस्थिति भाजपा के उतना अनुकूल नहीं है। भाजपा का रालोद से गठबंधन नहीं है। वहीं बसपा से मुस्लिम प्रत्याशी के रूप में शाहिद अखलाक सामने हैं। ऐसे में दलित वोटों के साथ यदि मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण हो जाता है, तो भाजपा को भारी पड़ सकता है। इसी को देखते हुए भाजपा हर कदम बहुत सोच समझ कर उठा रही है। चार दिन पूर्व अल्पसंख्यक मोर्चा के सम्मेलन में मंच पर नमाज का मामला भी तूल पकड़ गया था। मोदी खेमे ने तो इसे अलग ही नजरिये से पेश किया है। भाजपा की इंडिया272डॉट कॉम पर मंच पर नमाज पढ़ने को प्रचारित करते हुए बताने की कोशिश की गयी है कि मोदी और मुसलमान अब करीब आ रहे हैं।
गुजरात पुलिस खींचेगी सुरक्षा का पाला
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की दो फरवरी की रैली में सुरक्षा का दारोमदार गुजरात पुलिस पर रहेगा। मंच के ‘डी’ एरिया में सिर्फ गुजरात पुलिस का विशेष दस्ता, एटीएस और कमांडो का कब्जा रहेगा। वहीं मोदी स्पेशल कमांडो की निगहबानी में भाषण देंगे, जबकि स्थानीय पुलिस, पीएसी और आरएएफ का काम भीड़ और ट्रैफिक को संभालने का होगा।
मोदी की रैली की सुरक्षा व्यवस्था परखने के लिए गुजरात पुलिस का दस्ता यहां पहुंच गया है। दस्ते में एक आईपीएस अफसर के नेतृत्व में एक दर्जन से ज्यादा हथियारबंद जवान हैं। नरेंद्र मोदी की पूर्व में हुईं रैली की तरह यहां भी गुजरात पुलिस ही सुरक्षा का जिम्मा संभालेगी। ‘डी’ में प्रशिक्षित और परखे हुए अफसरों को ही लगाया है।
मंच पर सुरक्षा की दृष्टि से पार्टी के सिर्फ कद्दावर नेताओं समेत सीएम सिक्योरिटी में तैनात कमांडो और एटीएस के अफसर मौजूद रहेंगे। मंच के चारों तरफ कमांडो और एटीएस का घेरा रहेगा।
मेरठ देहात और मुजफ्फरनगर सबसे ज्यादा संवेदनशील
नरेंद्र मोदी की रैली को देखते हुए मेरठ जोन का हर मार्ग संवेदनशील माना गया है। मेरठ देहात के इलाकों और मुजफ्फरनगर में खास सतर्कता के निर्देश दिए गए हैं। जोन के नौ जिलों से आने वाली भीड़ पुलिस, पीएसी और पैरा मिलेट्री फोर्स की निगहबानी से गुजरेगी।
मेरठ जिले से सटी दूसरे जिलों की सीमाओं, मुख्य और संपर्क मार्गों पर भी पुलिस, पीएसी और पैरा मिलेट्री फोर्स तैनात होगी। अमूमन बड़े आयोजन के दौरान आयोजन स्थल और उसके आसपास तो सुरक्षा बरती जाती है, लेकिन जिले के बाहरी इलाकों को खुला छोड़ दिया जाता है। रैली में आने और वापस लौटने के दौरान भीड़ अति उत्साह में नारेबाजी और हंगामा करते हुए चलती है, जिसका साइड इफेक्ट भी सामने आ जाता है। मुजफ्फरनगर में नंगला मंदौड़ पंचायत के बाद जौली नहर पर हुआ सांप्रदायिक संघर्ष और खेड़ा पंचायत के बाद हुआ बवाल इसके उदाहरण हैं। उस समय चूका पुलिस-प्रशासन नहीं चाहता कि मोदी की रैली के बाद भी सांप्रदायिक संघर्ष जैसे हालात बनें।
आईजी जोन आलोक शर्मा ने बताया कि जोन के सभी नौ जिलों के एसएसपी को हिदायत दी गई है कि उनके जिले की सीमा से लेकर दूसरे जिले की सीमा तक हर मुख्य और संपर्क मार्ग पर पर्याप्त पुलिस फोर्स तैनात रहे। सभी एसएसपी से इस संबंध में ड्यूटी चार्ट भी मांगा गया है। एक फरवरी को वह खुद जोन में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे।