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संस्कृत, संस्कृति और वेद का संरक्षण करेंगे युवा
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भारतीय संस्कृति, संस्कृत और वेदों के संरक्षण व प्रचार प्रसार का जिम्मा युवाओं की टोली संभालेगी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से देश ही नहीं विदेशों तक संस्कृत और भारतीय संस्कृति के प्रसार की पहल शुरू हो चुकी है।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में पांच सौ कवि, पांच सौ शास्त्रार्थी और पांच सौ वैदिक विद्वानों की टीम तैयार की जा रही है। टीम में देश भर के 40 वर्ष से कम आयु के कवि, विद्वान और शास्त्रार्थी जुड़ रहे हैं। टीम तैयार होने के बाद युवाओं को राज्य के अनुसार जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। युवाओं की यह टीम देश भर में भारतीय संस्कृति, संस्कृत और वेदों का प्रचार प्रसार करेगी।
देश के बाद विदेशों में भी यह टीम संस्कृत और भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार करेगी। विश्वविद्यालय की ओर से कोरोना संक्रमण काल में काव्य गोष्ठïी, शास्त्रार्थ और वैदिक चर्चा अनवरत जारी है। इस आयोजन से देश भर के युवा जुड़ रहे हैं। कवियों की टीम में 80, वैदिक विद्वानों की टीम में सौ और शास्त्रार्थी की टीम में डेढ़ सौ से अधिक युवा विद्वान जुड़ चुके हैं।
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कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने बताया कि भारतीय संस्कृति और संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए विश्वविद्यालय की ओर से यह पहल की जा रही है। आने वाले समय में संस्कृत के संवर्धन में यह टीम महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगी। कोरोना संक्रमण के कारण आनलाइन माध्यम से देश भर के विद्वानों को एक मंच पर जोड़ने का अवसर प्राप्त हुआ है। संक्रमण काल समाप्त होने के बाद राज्यवार सभी विद्वानों को उनकी जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में पांच सौ कवि, पांच सौ शास्त्रार्थी और पांच सौ वैदिक विद्वानों की टीम तैयार की जा रही है। टीम में देश भर के 40 वर्ष से कम आयु के कवि, विद्वान और शास्त्रार्थी जुड़ रहे हैं। टीम तैयार होने के बाद युवाओं को राज्य के अनुसार जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। युवाओं की यह टीम देश भर में भारतीय संस्कृति, संस्कृत और वेदों का प्रचार प्रसार करेगी।
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देश के बाद विदेशों में भी यह टीम संस्कृत और भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार करेगी। विश्वविद्यालय की ओर से कोरोना संक्रमण काल में काव्य गोष्ठïी, शास्त्रार्थ और वैदिक चर्चा अनवरत जारी है। इस आयोजन से देश भर के युवा जुड़ रहे हैं। कवियों की टीम में 80, वैदिक विद्वानों की टीम में सौ और शास्त्रार्थी की टीम में डेढ़ सौ से अधिक युवा विद्वान जुड़ चुके हैं।
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कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने बताया कि भारतीय संस्कृति और संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए विश्वविद्यालय की ओर से यह पहल की जा रही है। आने वाले समय में संस्कृत के संवर्धन में यह टीम महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगी। कोरोना संक्रमण के कारण आनलाइन माध्यम से देश भर के विद्वानों को एक मंच पर जोड़ने का अवसर प्राप्त हुआ है। संक्रमण काल समाप्त होने के बाद राज्यवार सभी विद्वानों को उनकी जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।