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बीएचयू के केएन उडप्पा की खबर---युवा नए भारत और विश्व का करें निर्माण : डॉ. कर्ण सिंह
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पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं बीएचयू के पूर्व कुलाधिपति डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि युवा उठें, जागें और अपने लक्ष्य को साधें, नए भारत एवं नए विश्व का निर्माण करें। वसुधैव कुटुंबकम की भावना से हमारा देश चलता है। अब इसे विश्व के देश भी मान रहे हैं।
वह बीएचयू के केएन उडुप्पा सभागार में शुक्रवार को शांति, शिक्षा व सामाजिक परिवर्तन विषय पर संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के चार स्तंभ हैं। ज्ञान योग, कर्म योग, सहयोग एवं आंतरिक विकास है। हमें भवानी भारती के साथ भवानी वसुंधरा के मंत्र को अपनाना होगा। युवा अपनी प्रतिभा को नष्ट न करें। संवाद और सहयोग की संस्कृति को विकसित करें। बढ़ते वैश्विक हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा कि हमें अंतर धार्मिक संवाद और वैश्विक सहिष्णुता को अपनाना होगा।
अध्यक्षता कर रहे बीएचयू के कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन ने शिक्षा के नवाचार, संवाद एवं सृजन पर बल दिया। विषय परिवर्तन यूनेस्को के चेयर प्रोफेसर एवं मालवीय शांति अनुसंधान केंद्र के संस्थापक प्रो. प्रियंकर उपाध्याय एवं केंद्र के समन्वयक प्रो. मनोज मिश्रा ने विचार रखे। इस मौके पर प्रो. समीर के दास, प्रो. अंजू एस उपाध्याय व मोनालिसा हजारिका मौजूद रहीं।
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किसी को पाकिस्तानी, आतंकवादी कहना ठीक नहीं
डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि आज देश में किसी को पाकिस्तानी व आतंकवादी कहना ठीक नहीं है। अगर कोई ऐसे कृत्य कर रहा है तो उस पर कार्रवाई की जाए। धर्मों के बीच भेदभाव अच्छा नहीं है। हमारे देश में सभी धर्म के लोग रहते हैं। इसमें से किसी को निकाल दिया जाए तो भी देश पूर्ण नहीं होगा। बड़ी कुर्बानी के बाद देश आजाद हुआ है। आजादी के बाद कई टुकड़े हो गए। फिर से ऐसा न हो। हम सभी को मिलकर रहने और काम करने की जरूरत है।
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वह बीएचयू के केएन उडुप्पा सभागार में शुक्रवार को शांति, शिक्षा व सामाजिक परिवर्तन विषय पर संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के चार स्तंभ हैं। ज्ञान योग, कर्म योग, सहयोग एवं आंतरिक विकास है। हमें भवानी भारती के साथ भवानी वसुंधरा के मंत्र को अपनाना होगा। युवा अपनी प्रतिभा को नष्ट न करें। संवाद और सहयोग की संस्कृति को विकसित करें। बढ़ते वैश्विक हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा कि हमें अंतर धार्मिक संवाद और वैश्विक सहिष्णुता को अपनाना होगा।
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अध्यक्षता कर रहे बीएचयू के कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन ने शिक्षा के नवाचार, संवाद एवं सृजन पर बल दिया। विषय परिवर्तन यूनेस्को के चेयर प्रोफेसर एवं मालवीय शांति अनुसंधान केंद्र के संस्थापक प्रो. प्रियंकर उपाध्याय एवं केंद्र के समन्वयक प्रो. मनोज मिश्रा ने विचार रखे। इस मौके पर प्रो. समीर के दास, प्रो. अंजू एस उपाध्याय व मोनालिसा हजारिका मौजूद रहीं।
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किसी को पाकिस्तानी, आतंकवादी कहना ठीक नहीं
डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि आज देश में किसी को पाकिस्तानी व आतंकवादी कहना ठीक नहीं है। अगर कोई ऐसे कृत्य कर रहा है तो उस पर कार्रवाई की जाए। धर्मों के बीच भेदभाव अच्छा नहीं है। हमारे देश में सभी धर्म के लोग रहते हैं। इसमें से किसी को निकाल दिया जाए तो भी देश पूर्ण नहीं होगा। बड़ी कुर्बानी के बाद देश आजाद हुआ है। आजादी के बाद कई टुकड़े हो गए। फिर से ऐसा न हो। हम सभी को मिलकर रहने और काम करने की जरूरत है।