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कुश्ती-फुटबाल शौक, साधना थी शहनाई

Sun, 20 Mar 2016 02:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी Updated Sun, 20 Mar 2016 02:42 AM IST
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Wrestling-football hobby, clarinet was Silence
बिस्मिल्लाह खां की जन्मशती पर विशेष रिपोर्ट
देश आज शहनाई सम्राट उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की सौवीं जयंती मना रहा है। शहनाई उस्ताद की साधना थी, शौक नहीं। उस्ताद का शौक तो कुश्ती और फुटबाल था। बेनियाबाग के शकूर शाह जिलानी अखाड़े में वर्जिश के बाद वे रोजाना बेनिया मैदान पर दोस्तों के साथ फुटबाल खेलते थे। यह वाकया 1930 के आसपास का है। तब उस्ताद की उम्र 14 वर्ष थी। कुश्ती और फुटबाल से मिले वक्त में ही वे शहनाई का रियाज करते थे।
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बनारस स्पोर्टिंग क्लब से जुड़े शाहिद अली कहते हैं, 1936 में बिस्मिल्लाह खां ने बनारस स्पोर्टिंग क्लब की नींव रखी थी। यह शहर का पहला फुटबाल क्लब था। उस्ताद ने अपने दोस्तों साबिर हसन खां, मदन लाल, श्रीप्रकाश, अमजद अली और हाशिम हुसैन के साथ मिलकर अपनी टीम को क्लब का स्वरूप दिया था। तब से आज तक यह क्लब फुटबाल की युवा पौध तैयार कर रहा है। शाहिद बताते हैं, उस्ताद खुद सेंटर हाफ पोजीशन से खेलते थे जबकि अनवर खां टीम के स्टापर होते थे। नन्हू लेफ्ट आउट तो साबिर हसन हाफ की पोजीशन संभालते थे।
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बनारस स्पोर्टिंग क्लब के सर्वेसर्वा नूरआलम बताते हैं, गाजी मियां के मेले में गुड्डी लड़इया (पतंगबाजी) की यहां रवायत है। बेनिया मैदान पर यह परंपरा सालों से निभाई जा रही है। बिस्मिल्लाह खां अपने दोस्तों के साथ इसमें शरीक होते थे। इस दिन बैठकबाजी एशा की नमाज के बाद भी चलती थी। चाय की चुस्कियों और पकौड़ी की दावत के बीच अलग-अलग मसलों पर बहस-मुबाहिसा भी होता था।
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