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World Suicide Prevention Day: वाराणसी में हर माह 15 लोग कर रहे आत्महत्या, IMS BHU में होती है तनाव की जांच

Thu, 11 Sep 2025 04:20 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 11 Sep 2025 04:20 PM IST
सार

आत्महत्या के मूल में व्यक्तिगत, पारिवारिक, कॅरिअर, कर्ज, अपमान, निराशा जैसे विकास होते हैं। आईएमएस बीएचयू में 20 मिनट में तनाव की जांच होती है। वाराणसी में हर तीसरे दिन युवाओं के आत्महत्या के मामले सामने आ रहे हैं।

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World Suicide Prevention Day 15 people are committing suicide every month in Varanasi stress tested in BHU
आत्महत्या रोकथाम दिवस 2025 - फोटो : freepik.com

विस्तार

World Suicide Prevention Day: आत्महत्या रोकने के लिए हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। जिले में हर तीसरे दिन युवा आत्महत्या कर रहे हैं। महिलाएं भी अलग-अलग वजहों से अपनी जान दे रही हैं। आत्महत्या पर रोकथाम के लिए स्कूल, काॅलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। अस्पतालों में विशेष क्लीनिक भी चल रही है। 

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जिले में औसतन हर महीने 10 से 15 लोग आत्महत्या करने को विवश हो रहे हैं। आत्महत्या करने वालों आधे से अधिक की उम्र 18 से 40 है। अपर पुलिस आयुक्त अपराध राजेश कुमार सिंह का कहना है कि सूचना मिलते ही तुरंत डायल 112 के पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचते हैं। 
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संबंधित व्यक्ति की काउंसिलिंग कर उन्हें समझाया जाता है। आईएमएस बीएचयू मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. प्रदीप चौरसिया ने बताया कि शादी के बाद जीवन में तनाव से पुरुष आत्महत्या कर रहे हैं। आत्महत्या के मूल में मानसिक विकार ही होता है। यह व्यक्तिगत, पारिवारिक, कॅरिअर, कर्ज, अपमान, निराशा और असाध्य बीमारियों के कारण हो सकता है। 

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आईएमएस बीएचयू में पहुंच रहे हर सप्ताह 50 नए मरीज
आईएमएस बीएचयू के मनोचिकित्सा विभाग में हर सप्ताह 50 नए मरीज पहुंच रहे हैं। मेडिसिन फैकल्टी के डीन और मनोचिकित्सा विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. संजय गुप्ता का कहना है कि विभाग में आने वाले नए मरीजों में 16 से 35 साल वालों की संख्या 30 से अधिक रहती हैं। 

युवाओं में तनाव कम हो और वह आत्महत्या जैसे कदम न उठाए, इसके लिए विभाग की ओर से 20 मिनट में जांच की जाती है। इसके लिए युवाओं को एक पेपर दिया जाता है, सवालों के जवाब उनको देने होते हैं। उनके जवाब के आधार पर उनके भीतर तनाव कुंडली बनाई जाती है। अगर किसी में तनाव का स्तर अधिक मिलता है तो उनके साथ-साथ परिजनों की भी काउंसिलिंग की जाती है।

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