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विश्व फिजियोथेरेपी दिवस: चोट से हर साल 40% खिलाड़ी हो जाते हैं खेल से बाहर, इन बातों पर जरूर रखें ध्यान
Tue, 08 Sep 2026 03:56 PM IST
Pragati Chand
नीलांबुज तिवारी, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।
नीलांबुज तिवारी, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Tue, 08 Sep 2026 03:56 PM IST
सार
विशेषज्ञों का कहना है कि जोड़ों के दर्द और सूजन को नजरअंदाज न करें। ऐसे मामलों में फिजियोथेरेपी कारगर है। डॉक्टर के अनुसार, चोट से हर साल 40% खिलाड़ी खेल से बाहर हो जाते हैं।
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डॉ. एसएस पांडेय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जोड़ों के दर्द और सूजन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समस्या होने पर खुद से दर्द की दवा लेने के बजाय फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क करना चाहिए। यह बातें बीएचयू के अस्थि रोग विभाग के फिजियो प्रो. एसएस पांडेय ने विश्व फिजियोथेरेपिस्ट दिवस के उपलक्ष्य पर बातचीत के दौरान कही। हर साल 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस मनाया जाता है।
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उन्होंने बताया कि खेलों में फिजियोथेरेपी का महत्व बढ़ गया है। इसकी मदद लेने पर खिलाड़ी के प्रदर्शन में 20-25 प्रतिशत तक का सुधार हो जाता है। फिजियोथेरेपी सिर्फ फ्रैक्चर या हड्डी के टूटने के बाद ही काम नहीं करता बल्कि यह खिलाड़ी के प्रदर्शन को बेहतर बनाता है। सात हजार खिलाड़ियों पर किए शोध से पता चला है कि जानकारी के अभाव और फिजियो की मदद नहीं लेने की वजह से 40 प्रतिशत खिलाड़ी असमय खेलों से दूर हो जा रहे हैं।
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एंकल, घुटने, कंधे और एल्बो की चोट 16 से 20 साल के खिलाड़ी असमय खेलों से बाहर कर दिए जाते हैं। फुटबॉल, कबड्डी, कुश्ती, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स और बास्केटबॉल के खिलाड़ी इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। स्पोर्ट्स इंजरी खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी समस्या है। अगर सही समय पर फिजियो की मदद ली जाए तो समस्या का न सिर्फ समाधान होता है बल्कि उसे ठीक कर प्रदर्शन को बेहतर किया जा सकता है।
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सीमेंटेड या पत्थर के बेस पर ना करें हार्डवर्क
सीमेंटेड या पत्थर वाले बेस पर उछलने वाले व्यायाम नहीं करना चाहिए। अगर सीमेंटेड या कंक्रीट वाले ठोस सतह पर व्यायाम करना है तो मोटे कुशनिंग और अच्छे बेस वाले जूतों का प्रयोग करना चाहिए लेकिन लंबे समय तक इस ठोस सतह पर अभ्यास करने से बचना चाहिए। ठोस सतह पर उछलने वाले व्यक्ति को के घुटने और एंकल की समस्या होती है। घुटने का लिगामेंट और एसीएल और पीसीएल प्रभावित होते हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध से हुई थी फिजियोथेरेपी की शुरुआत
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लड़ाई में घायल सैनिकों के रिहैब कराने के लिए फिजियोथेरेपी की शुरुआत हुई थी। प्रति वर्ष 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस मनाया जाता है। यह दिन दुनिया भर में फिजियोथेरेपी के महत्व, उसके योगदान और स्वास्थ्य सेवाओं में उसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। इसकी स्थापना 1951 में 11 राष्ट्रीय फिजियोथेरेपी संगठनों के सहयोग से हुई थी और वर्ष 1996 में 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई।
सीमेंटेड या पत्थर वाले बेस पर उछलने वाले व्यायाम नहीं करना चाहिए। अगर सीमेंटेड या कंक्रीट वाले ठोस सतह पर व्यायाम करना है तो मोटे कुशनिंग और अच्छे बेस वाले जूतों का प्रयोग करना चाहिए लेकिन लंबे समय तक इस ठोस सतह पर अभ्यास करने से बचना चाहिए। ठोस सतह पर उछलने वाले व्यक्ति को के घुटने और एंकल की समस्या होती है। घुटने का लिगामेंट और एसीएल और पीसीएल प्रभावित होते हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध से हुई थी फिजियोथेरेपी की शुरुआत
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लड़ाई में घायल सैनिकों के रिहैब कराने के लिए फिजियोथेरेपी की शुरुआत हुई थी। प्रति वर्ष 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस मनाया जाता है। यह दिन दुनिया भर में फिजियोथेरेपी के महत्व, उसके योगदान और स्वास्थ्य सेवाओं में उसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। इसकी स्थापना 1951 में 11 राष्ट्रीय फिजियोथेरेपी संगठनों के सहयोग से हुई थी और वर्ष 1996 में 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई।