फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   World Environment Day Plastic waste finished fertility potential of land varanasi

पॉलीथिन सूनी कर रही धरती की 'कोख', जमीन की उर्वरा क्षमता पर भी संकट

Tue, 04 Jun 2019 08:22 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 04 Jun 2019 08:22 PM IST
विज्ञापन
World Environment Day Plastic waste finished fertility potential of land varanasi
शहर में फैला कचरा - फोटो : अमर उजाला

शहर में प्लास्टिक कचरा भविष्य की सबसे बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रहा है। जमीन ही नहीं, पॉलीथिन से हवा भी प्रदूषित हो रही है। प्रदूषण के कारकों में प्लास्टिक कचरा प्रमुख वजह के रूप में सामने आया है। पूरे शहर से हर दिन निकलने वाले कूड़े में 10 से 15 प्रतिशत तक पॉलीथिन भी शामिल है। कई क्षेत्रों में कूड़े का पहाड़ जमा है जो भूमिगत जल स्तर को प्रभावित करने के साथ ही भूमि को भी बंजर बना रहा है।

विज्ञापन


जमीन की पानी अवशोषित करने की क्षमता नष्ट होती जा रही है और जलसंकट से जूझ रहे शहर की समस्या दिन व दिन गंभीर होती जा रही है। रासायनिक खाद और  कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग का विपरीत असर मिट्टी पर पड़ रहा है।  इसकी उर्वरता शक्ति तो घट ही रही है, साथ ही उपयोगी कीटों की मृत्यु हो रही है और भूजल भी दूषित हो रहा है। इसका खतरा पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहा है।
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन


विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में करीब पांच लाख लोगों को हर साल कृषि में रसायनों के इस्तेमाल से हानि होती है। इससे लीवर और किडनी आदि की बीमारियां हो रही हैं। विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक 30 साल में कृषि में रसायनों का प्रयोग 11 गुना से अधिक बढ़ा है। वहीं औद्योगिक और मेडिकल  कचरा, पॉलीथिन बैग, प्लास्टिक और अन्य तरह के दूषित पदार्थों के जमीन पर जमा करने से भी मिट्टी और जल प्रदूषित हो रहा है।

बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के प्रो एपी सिंह के अनुसार वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों की उर्वरा क्षमता लगातार कम होती जा रही है। मिट्टी के पोषक तत्व कम होने के साथ ही सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या में निरंतर गिरावट हो रही है। खेत में रासायनिक उर्वरक और पॉलीथिन जब जमीन में दबती है तो भूमि पानी अवशोषित नहीं कर पाती है। इससे भूमिगत जल स्तर कम होता चला जाता है। जमीन की हवा सोखने की शक्ति भी समाप्त हो जाती है। लाभप्रद बैक्टीरिया मर जाते हैं। जो बचते हैं उनकी क्षमता कम हो जाती है, इससे उर्वरा शक्ति भी नष्ट हो जाती है।

500 किलो हर दिन खपत :
बाजार के सूत्रों के अनुसार, जिले भर में रोजाना पांच सौ किलो से ज्यादा पॉलिथिन की खपत होती है। नगर निगम के अफसर भले ही पॉलीथिन के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाने का दावा करते हों, लेकिन पॉलिथीन का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है।

पॉलीथिन बनी गंदगी का प्रमुख कारण :
क्रांति फाउंडेशन के ई राहुल सिंह के अनुसार, जलाए बिना भी पॉलिथीन खतरनाक गैसें जैसे बेंजीन, विनायल और इथनॉल ऑक्साइड का उत्सर्जन कर हवा को विषाक्त बनाती है। पॉलिथीन गंदगी का भी प्रमुख कारण है। इससे सीवरेज सिस्टम भी प्रभावित हो रहा है। पॉलिथीन से नालियां चोक हो रही हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है।

रुक जाता है शिशु का विकास :
चिकित्सकों के अनुसार, प्लास्टिक के ज्यादा संपर्क में रहने से खून में थेलेट्स की मात्रा बढ़ जाती है। इससे गर्भस्थ शिशु का विकास रुक जाता है। सीएमओ डॉ वीबी सिंह के अनुसार, पॉलिथीन के जलने से कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड सहित अन्य विषैली गैसें निकलती होती हैं। इससे सांस और त्वचा संबंधी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। इनमें खांसी, सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, चक्कर आना, मांसपेशियों का शिथिल होना और हृदय रोग प्रमुख हैं।

प्रतिबंध पर कब और क्या हुआ?
पर्यावरण विभाग की ओर से 22 दिसंबर 2015 में जारी अधिसूचना में सभी तरह की पॉलिथीन और कैरी बैग के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई। इसी क्रम में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 50 माइक्रॉन से कम मोटी पॉलिथीन को पर्यावरण के लिए खतरनाक बताया। 15 जुलाई 2018 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में 50 माइक्रॉन से कम की पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाया। प्रदेश में पॉलिथीन के प्रयोग पर प्रतिबंध की कवायद वर्ष 2000 में शुरू हुई थी, लेकिन अलग-अलग कानूनों के चलते इस पर अमल नहीं हो सका था। वहीं, नगर विकास विभाग ने वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश प्लास्टिक और अन्य जीव अनाशित कूड़ा-कचरा अधिनियम लागू किया था। इसके तहत 20 माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन के उपयोग पर प्रतिबंध है।

आदत बदलें, घर से झोला लेकर निकलें :
पॉलिथीन पर रोक तभी लग सकती है, जब हम खुद इसे अपनी आदत में बदलाव करेंगे। इसकी शुरुआत हमें अपने घर से करनी होगी। जब हम पॉलिथीन के बदले कपड़े के थैले का उपयोग करना शुरू करेंगे तो हालात भी काफी बदल जाएंगे।

नगर निगम चला रहा अभियान :
प्रतिबंधित पॉलीथिन के खिलाफ पिछले एक महीने से नगर निगम की ओर से शहर के सभी जोन में अभियान चलाया जा रहा है। जुर्माने के साथ ही चालान की भी कार्रवाई की जा रही है। इसके कारण दुकानदारों और आम लोगों में जागरूकता आई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed