{"_id":"594a8cee4f1c1b3e1f8b48a5","slug":"women-finding-cheater-husband-at-jaunpur","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बेवफा पति की तलाश में हरिद्वार से आकर जौनपुर में भटक रही पत्नी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेवफा पति की तलाश में हरिद्वार से आकर जौनपुर में भटक रही पत्नी
ब्यूरो,अमर उजाला,जौनपुर
Updated Thu, 22 Jun 2017 02:30 PM IST
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हरिद्वार की एक निजी कंपनी में नौकरी करने वाली महिला
- फोटो : अमर उजाला
हरिद्वार की एक निजी कंपनी में नौकरी करने वाली महिला ने जौनपुर के एक युवक के झांसे में आकर उससे शादी कर ली। दोनों एक साल तक साथ रहे फिर युवक पत्नी को वहीं पर छोड़कर घर भाग आया। इंतजार के बाद भी वह नहीं लौटा तो पत्नी उसे ढूंढते हुए जौनपुर आ गई।
पति के घर पहुंची तो ससुराल वालों ने घर में कदम नहीं रखने दिया। वह पुलिस थाने भी गई लेकिन कोई मदद नहीं मिली। कैबिनेट मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी ने महिला को न्याय दिलाने के लिए पुलिस कप्तान से कहा फिर भी थाने में उसकी सुनवाई नहीं हुई। न्याय की खातिर एक सप्ताह से वह जौनपुर जिले में भटक रही है।
इलाहाबाद जिले के हंडिया थाना क्षेत्र के पृथ्वीपुर निवासी स्वेच्छा सिंह हरिद्वार में एक निजी कंपनी में नौकरी करती थीं। उसी कंपनी में जिले के नेवढ़िया थाना क्षेत्र के परेवां गांव निवासी नवीन कुमार यादव भी नौकरी करता था।
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दोनों के बीच करीबी बढ़ी फिर दोनों ने 19 मार्च 2016 को रुद्र्पुर जिले में स्थित आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली।10 महीने तक दोनों साथ रहे। 17 जनवरी 2017 को नवीन कुमार अपने घर चला आया और वापस नहीं गया।
उसने फोन पर पत्नी को बताया कि उसने शादी की बात घर वालों से बताई तो घर वाले उसे आने नहीं दे रहे हैं। 13 जून को स्वेच्छा पति के घर का पता लगाते उसके घर पहुंच गई। परिवार वालों ने पति से नहीं मिलने दिया और उसे घर से भगा दिया। उसने नेवढ़िया थाने पर जाकर अपनी पीड़ा पुलिस से बताई।
वहां भी सुनवाई नहीं हुई। 17 जून को जिले में आई कैबिनेट मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी से मिलकर उसने अपनी पीड़ा बताई तो उन्होंने एसपी को मामले में कार्रवाई का निर्देश दिया। बावजूद इसके भी अभीतक उसे न्याय नहीं मिला।
इस संबंध में नेवढ़िया थाने की पुलिस का कहना है कि महिला पहले पति को तलाक दिए बिना दूसरी शादी की है इससे कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। जबकि पीड़ित महिला का कहना है कि उसकी पहली शादी रिश्तेदारों के बीच हुई पंचायत में टूटी है।
उसकी दूसरी शादी के बाद पहले पति ने कोई आपत्ति भी नहीं की है फिर भी पुलिस उसकी नहीं सुन रही है।
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पति के घर पहुंची तो ससुराल वालों ने घर में कदम नहीं रखने दिया। वह पुलिस थाने भी गई लेकिन कोई मदद नहीं मिली। कैबिनेट मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी ने महिला को न्याय दिलाने के लिए पुलिस कप्तान से कहा फिर भी थाने में उसकी सुनवाई नहीं हुई। न्याय की खातिर एक सप्ताह से वह जौनपुर जिले में भटक रही है।
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इलाहाबाद जिले के हंडिया थाना क्षेत्र के पृथ्वीपुर निवासी स्वेच्छा सिंह हरिद्वार में एक निजी कंपनी में नौकरी करती थीं। उसी कंपनी में जिले के नेवढ़िया थाना क्षेत्र के परेवां गांव निवासी नवीन कुमार यादव भी नौकरी करता था।
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दोनों के बीच करीबी बढ़ी फिर दोनों ने 19 मार्च 2016 को रुद्र्पुर जिले में स्थित आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली।10 महीने तक दोनों साथ रहे। 17 जनवरी 2017 को नवीन कुमार अपने घर चला आया और वापस नहीं गया।
उसने फोन पर पत्नी को बताया कि उसने शादी की बात घर वालों से बताई तो घर वाले उसे आने नहीं दे रहे हैं। 13 जून को स्वेच्छा पति के घर का पता लगाते उसके घर पहुंच गई। परिवार वालों ने पति से नहीं मिलने दिया और उसे घर से भगा दिया। उसने नेवढ़िया थाने पर जाकर अपनी पीड़ा पुलिस से बताई।
वहां भी सुनवाई नहीं हुई। 17 जून को जिले में आई कैबिनेट मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी से मिलकर उसने अपनी पीड़ा बताई तो उन्होंने एसपी को मामले में कार्रवाई का निर्देश दिया। बावजूद इसके भी अभीतक उसे न्याय नहीं मिला।
इस संबंध में नेवढ़िया थाने की पुलिस का कहना है कि महिला पहले पति को तलाक दिए बिना दूसरी शादी की है इससे कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। जबकि पीड़ित महिला का कहना है कि उसकी पहली शादी रिश्तेदारों के बीच हुई पंचायत में टूटी है।
उसकी दूसरी शादी के बाद पहले पति ने कोई आपत्ति भी नहीं की है फिर भी पुलिस उसकी नहीं सुन रही है।
पुलिस के व्यवहार से हैरान महिला
न्याय की खातिर हरिद्वार से आकर जिले में भटक रही महिला बुधवार को एसपी कार्यालय के बाहर मीडिया कर्मियों और अधिवक्ताओं से अपना दुखड़ा सुनाते हुए फफक पड़ी। उसने बताया कि एसपी के निर्देश के बाद 17 जून को जब वह दोबारा नेवढ़िया थाने पहुंची तो पुलिस ने रात नौ बजे उसे नेवढ़िया बाजार में लाकर लावारिस छोड़ दिया। जौनपुर आने के लिए कोई साधन नहीं मिला। उसके पास एटीएम कार्ड था लेकिन पास में कैश एक रुपया भी नहीं बचा था। किसी एटीएम से पैसे भी नहीं मिल रहे थे। विवश होकर वह पास के एक मंदिर में जाकर भूखे सो गई। अगले दिन किसी तरह शहर पहुंची तो एटीएम से पैसे निकाले तब खाना खा सकी।