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यूपी: गलत सर्जरी से महिला की मौत, मानवाधिकार आयोग ने प्रशासन की रिपोर्ट नकारी; स्वतंत्र जांच के आदेश

Thu, 01 Oct 2026 06:15 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 01 Oct 2026 06:15 AM IST
सार

गलत सर्जरी से बुजुर्ग महिला की मौत के मामले में मानवाधिकार आयोग ने प्रशासन की रिपोर्ट को अस्वीकार करते हुए स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने सीएमओ और जिलाधिकारी से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। आरोप है कि बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में गलत सर्जरी के बाद महिला की मौत हुई थी। मामले में परिजनों ने शिकायत की थी।

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Woman dies after botched surgery Human Rights Commission rejects administration report, orders probe
IMS BHU - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीएचयू-आईएमएस के ट्रॉमा सेंटर में राधिका देवी (71) की गलत सर्जरी और उसके बाद मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने प्रशासन की रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। आयोग ने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही 7 नवंबर 2026 तक जांच रिपोर्ट वाराणसी के डीएम और सीएमओ से मांगी है। 

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यह कार्रवाई मानवाधिकार संगठन पीपुल्स एक्शन फॉर ह्यूमन राइट्स एडवांसमेंट (पहरा) के अध्यक्ष अनिल कुमार मौर्य की शिकायत पर हुई है। शिकायत के अनुसार, 7 मार्च 2026 को राधिका देवी को रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। उन्हें न्यूरोसर्जरी विभाग में जाना था, लेकिन लापरवाही के चलते ऑर्थोपेडिक्स विभाग ने उनके पैर (जांघ) की सर्जरी कर दी। बाद में 18 मार्च को उनकी न्यूरोसर्जरी की गई, परंतु हालत बिगड़ने के कारण 27 मार्च 2026 को उनकी मृत्यु हो गई।

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प्रशासन ने आयोग के समक्ष तर्क दिया था कि एक ही नाम के दो मरीज होने के कारण पहचान में भ्रम पैदा हुआ, जिसके चलते यह त्रुटि हुई। हालांकि, आयोग ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर कहा कि नाम की समानता मरीज की सुरक्षा में हुई घोर लापरवाही को सही नहीं ठहरा सकती। यह सीधे तौर पर मरीज की पहचान, सर्जिकल साइट मार्किंग और 'डब्ल्यूएचओ सर्जिकल सेफ्टी चेकलिस्ट' जैसे अनिवार्य रोगी सुरक्षा प्रोटोकॉल की विफलता है।

अनिल कुमार मौर्य ने बताया कि आयोग ने इस बात पर भी एतराज जताया कि अस्पताल की आंतरिक जांच समिति का अध्यक्ष उसी टीम के प्रमुख को बनाया गया, जिस पर लापरवाही का आरोप था। आयोग के अनुसार, ऐसी आंतरिक जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती। साथ ही, पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद वाराणसी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) द्वारा रिपोर्ट न सौंपे जाने को भी गंभीरता से लिया गया।

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आयोग के प्रमुख निर्देश

  • वाराणसी के जिलाधिकारी सक्षम प्राधिकारी के साथ मिलकर ऐसे स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से जांच कराएं, जिसका आईएमएस-बीएचयू से कोई संबंध न हो।
  • सीएमओ चार सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें; अन्यथा दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
  • रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाए कि क्या यह मामला किसी संज्ञेय अपराध के तहत आता है, जिससे संबंधित डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज की जा सके।
  • पीड़ित परिवार को दिए जाने वाले मुआवजे पर भी रिपोर्ट तलब की गई है।
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