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बिना मम्मी-पापा लोकतंत्र की पाठशाला में प्रवेश
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 04 Jun 2016 02:04 AM IST
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बाल संसद चुनाव के लिए इस अंदाज में नामांकन करने जाते प्रत्याशी।
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ना मम्मी, ना पापा। लोकतंत्र की पाठशाला में प्रवेश लेने के लिए बच्चे खुद ही निकल पड़े। ढोल-नगाड़ा बज रहा था और समर्थकों की भीड़ नारेबाजी कर थी। जीतेगा भाई जीतेगा...। बाल संसद के एक स्पीकर और आठ सांसद पदों के लिए 35 उम्मीदवारों ने ताल ठोंक दी है। शनिवार से सभी प्रत्याशी चुनाव प्रचार शुरू करेंगे।
नेताजी वाली टोपी और फूल माला से लगे नन्हे प्रत्याशी एक हाथ से टोपी पकड़े हैं तो एक हाथ से पैंट जो वक्त बे वक्त खिसकती जा रही थी। छह साल के बुल्लू भाई का तो पसीना निकल गया अपनी बकरी संभालने में। जो भी देखती, चबाने लगती। बाल संसद के ये नन्हे उम्मीदवार सियासत के मंझे खिलाड़ी जैसे कभी गंभीर, बड़बोले दिखे तो कभी बाल सुलभ चंचलता भी उनमें नजर आ रही थी लेकिन लोकतंत्र की पाठशाला में ककहरा सीखने पहुंचे थे तो पूरे नेता वाली स्टाइल में। राजनीति के ये नन्हें खिलाड़ी इस दौरान उत्साह और उल्लास से लबरेज थे।
हुकुलगंज स्थित विशाल भारत संस्थान की ओर से शुक्रवार को चौथे बाल संसद के नामांकन के दिन उत्साह और जोश के साथ बच्चा पार्टी नामांकन करने पहुंची थी। फूल मालाओं से लदे प्रत्याशी, ढोल-नगाड़ों पर नाचते गाते समर्थकों संग नामांकन करने पहुंचे थे। अपने-अपने चुनाव चिह्न के साथ कोई घोड़े पर तो कोई कार पर सवार होकर पहुंचा। पांच रुपये नामांकन राशि जमा की और संपत्ति का ब्योरा भी बताया। संपत्ति के तौर पर ज्यादातर के पास बैग, कॉपी-किताब, साइकल, खिलौने, कपड़े और गुल्लक के पैसे थे। चुनाव पर्यवेक्षक जगन्नाथ कुशवाहा व प्रो. सुरेंद्र सिंह रहे।
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स्पीकर पद के लिए सबसे कम उम्र की दक्षिता भारतवंशी ने नामांकन किया। घोड़े पर बैठ कर आई पांच साल की ये प्रत्याशी सबसे सबसे अमीर भी है। नामांकन के साथ दिए गए अपनी संपत्ति ब्योरे में उसने खिलौनों, कपड़ों, कापी-किताब के अलावा चिल्ड्रेंस बैंक में जमा 5311 रुपये का जिक्र किया है।
बच्ची बच्चा पार्टी के प्रत्याशी आफताब उर्फ बुल्लू भाई बकरी लेकर नामांकन करने पहुंचे थे लेकिन उनकी बकरी ने प्रत्याशियों को खूब छकाया। सबसे पहले तो उनकी बकरी अपने ही प्रत्याशी की माला चबा गई। बाल हरित पार्टी के प्रत्याशी आर्यन के चुनाव चिह्न पेड़ को भी नहीं छोड़ा। तुलिका अपना चुनाव चिह्न आम लेकर पहुंची थी, ये आम भी बकरी खा गई। दूसरे प्रत्याशियों की शिकायत पर बुल्लू भाई को मुख्य चुनाव अधिकारी डॉ. राजीव श्रीवास्तव की चेतावनी भी झेलनी पड़ी।
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नेताजी वाली टोपी और फूल माला से लगे नन्हे प्रत्याशी एक हाथ से टोपी पकड़े हैं तो एक हाथ से पैंट जो वक्त बे वक्त खिसकती जा रही थी। छह साल के बुल्लू भाई का तो पसीना निकल गया अपनी बकरी संभालने में। जो भी देखती, चबाने लगती। बाल संसद के ये नन्हे उम्मीदवार सियासत के मंझे खिलाड़ी जैसे कभी गंभीर, बड़बोले दिखे तो कभी बाल सुलभ चंचलता भी उनमें नजर आ रही थी लेकिन लोकतंत्र की पाठशाला में ककहरा सीखने पहुंचे थे तो पूरे नेता वाली स्टाइल में। राजनीति के ये नन्हें खिलाड़ी इस दौरान उत्साह और उल्लास से लबरेज थे।
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हुकुलगंज स्थित विशाल भारत संस्थान की ओर से शुक्रवार को चौथे बाल संसद के नामांकन के दिन उत्साह और जोश के साथ बच्चा पार्टी नामांकन करने पहुंची थी। फूल मालाओं से लदे प्रत्याशी, ढोल-नगाड़ों पर नाचते गाते समर्थकों संग नामांकन करने पहुंचे थे। अपने-अपने चुनाव चिह्न के साथ कोई घोड़े पर तो कोई कार पर सवार होकर पहुंचा। पांच रुपये नामांकन राशि जमा की और संपत्ति का ब्योरा भी बताया। संपत्ति के तौर पर ज्यादातर के पास बैग, कॉपी-किताब, साइकल, खिलौने, कपड़े और गुल्लक के पैसे थे। चुनाव पर्यवेक्षक जगन्नाथ कुशवाहा व प्रो. सुरेंद्र सिंह रहे।
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स्पीकर पद के लिए सबसे कम उम्र की दक्षिता भारतवंशी ने नामांकन किया। घोड़े पर बैठ कर आई पांच साल की ये प्रत्याशी सबसे सबसे अमीर भी है। नामांकन के साथ दिए गए अपनी संपत्ति ब्योरे में उसने खिलौनों, कपड़ों, कापी-किताब के अलावा चिल्ड्रेंस बैंक में जमा 5311 रुपये का जिक्र किया है।
बच्ची बच्चा पार्टी के प्रत्याशी आफताब उर्फ बुल्लू भाई बकरी लेकर नामांकन करने पहुंचे थे लेकिन उनकी बकरी ने प्रत्याशियों को खूब छकाया। सबसे पहले तो उनकी बकरी अपने ही प्रत्याशी की माला चबा गई। बाल हरित पार्टी के प्रत्याशी आर्यन के चुनाव चिह्न पेड़ को भी नहीं छोड़ा। तुलिका अपना चुनाव चिह्न आम लेकर पहुंची थी, ये आम भी बकरी खा गई। दूसरे प्रत्याशियों की शिकायत पर बुल्लू भाई को मुख्य चुनाव अधिकारी डॉ. राजीव श्रीवास्तव की चेतावनी भी झेलनी पड़ी।