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Varanasi News: जब पुलिस विभाग पर ही 62 लाख बाकी तो दूसरों पर कैसे होगी कार्रवाई
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वाराणसी। जब पुलिस विभाग ही गृहकर का बकाएदार होगा तो दूसरों पर कार्रवाई कैसे होगी। दबाव बनाने पर 25 लाख रुपये का भुगतान करने के बाद भी पुलिस विभाग पर 62 लाख रुपये का बकाया है। इसी प्रकार अन्य सरकारी विभागों पर छह करोड़ रुपये बाकी है।
नगर निगम को 27 दिन के भीतर गृहकर मद में 28 करोड़ रुपये वसूलने हैं। इस वित्तीय वर्ष के लिए रखे गए 84 करोड़ रुपये लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 56 करोड़ रुपये ही वसूले गए हैं। बकाएदारों ने 28 करोड़ रुपये दबा रखे हैं। न केवल सरकारी बल्कि अन्य बड़े बकाएदारों के खिलाफ अभियान चलाने की तैयारी की गई है। इन बड़े बकाएदारों के यहां सील और कुर्की की कार्रवाई की जाएगी। बैंक खाते सीज कराए जाएंगे। इसके लिए बैंकों को पत्र भेजा जाएगा। कुछ विभागों ने तो नगर निगम से मार्च तक बकाए को समायोजित करने का समय लिया है। जो सरकारी नियमों के अधीन होता है। बीएचयू समेत कई सरकारी और निजी बकाएदारों से वसूली की कार्रवाई चल रही है। टाप टेन बकाएदारों की सूची जोनल कार्यालयों पर चस्पा की जा रही है। सरकारी कार्यालयों के गृहकर बकाएदारों को गृहकर जमा करने के लिए नगर निगम की ओर से पत्र भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि संपत्तिकर की वसूली निगम की आय का एक प्रमुख स्रोत है। इस धनराशि से नगर निगम क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं, सफाई व्यवस्था, मार्ग प्रकाश व्यवस्था ठोस अपशिष्ट का निस्तारण एवं जनहित के कार्य आदि किये जाते हैं।
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नगर निगम को 27 दिन के भीतर गृहकर मद में 28 करोड़ रुपये वसूलने हैं। इस वित्तीय वर्ष के लिए रखे गए 84 करोड़ रुपये लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 56 करोड़ रुपये ही वसूले गए हैं। बकाएदारों ने 28 करोड़ रुपये दबा रखे हैं। न केवल सरकारी बल्कि अन्य बड़े बकाएदारों के खिलाफ अभियान चलाने की तैयारी की गई है। इन बड़े बकाएदारों के यहां सील और कुर्की की कार्रवाई की जाएगी। बैंक खाते सीज कराए जाएंगे। इसके लिए बैंकों को पत्र भेजा जाएगा। कुछ विभागों ने तो नगर निगम से मार्च तक बकाए को समायोजित करने का समय लिया है। जो सरकारी नियमों के अधीन होता है। बीएचयू समेत कई सरकारी और निजी बकाएदारों से वसूली की कार्रवाई चल रही है। टाप टेन बकाएदारों की सूची जोनल कार्यालयों पर चस्पा की जा रही है। सरकारी कार्यालयों के गृहकर बकाएदारों को गृहकर जमा करने के लिए नगर निगम की ओर से पत्र भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि संपत्तिकर की वसूली निगम की आय का एक प्रमुख स्रोत है। इस धनराशि से नगर निगम क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं, सफाई व्यवस्था, मार्ग प्रकाश व्यवस्था ठोस अपशिष्ट का निस्तारण एवं जनहित के कार्य आदि किये जाते हैं।
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