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कांटा न तौल, नाम के क्रय केंद्र
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 11 Apr 2016 01:49 AM IST
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एक अप्रैल से जिले के आठों ब्लॉकों में 17 क्रय केंद्र खोलकर किसानों के गेहूं की खरीद शुरू करने का प्रशासन का दावा खोखला साबित हो रहा है। ज्यादातर ब्लॉकों में कागजात पर या फिर केवल बैनर टांगकर नाम के क्रय केंद्र खोल दिए गए हैं। न कहीं कांटा लगा है, न बोरे पहुंचे हैं। एक हफ्ता बीतने के बाद भी किसी केंद्र पर एक दाना गेहूं नहीं खरीदा गया। लापरवाही का आलम यह कि कृषि विभाग के आला अधिकारी को यही नहीं पता कि कब से और कहां क्रय केंद्र हैं।
एक तो मौसम की मार से इस साल गेहूं की पैदावार काफी कम हुई है। जिले में 219.809 मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन लक्ष्य रखा गया था लेकिन 127.010 मीट्रिक टन ही पैदा हुआ है। लक्ष्य से 92.709 मीट्रिक टन कम पैदावार हुई है। ऊपर से केंद्र नहीं खुलने से किसानों को परेशानी बढ़ गई है। पिछले दिनों प्रशासन ने एक अपैल से सभी ब्लॉकों में 17 क्रय केंद्र खोलने का एलान किया था। बाकायदा केंद्रों की सूची भी जारी की गई थी। सभी केंद्रों के लिए बोरे, तौल के लिए कांटा और किसानों को भुगतान के लिए धनराशि मुहैया कराने का दावा किया गया था।
काशी विद्यापीठ ब्लॉक में एक भी केंद्र नहीं खुला। लोहता संवाददाता ने जब इस बारे में उप कृषि निदेशक एके सिंह पूछताछ की तो उन्होंने कहा कि ब्लॉक में कहां गेहूं क्रय केंद्र खुलना है, कब तक खुलना है, क्यों नहीं खुला, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। जिम्मेदार अधिकारियों का जब ऐसा रवैया है तो किसानों का भला कैसे होगा। हरपालपुर के रामदुलार सिंह, बखरिया के गुड्डू सिंह, कोरौता के डॉ. वीरेंद्र पटेल, पारस नाथ पटेल, सभई पुर के मदन पांडेय ने बताया कि गेहूं की कटाई तेजी से चल है। नवरात्र बाद लगन शुरू हो जाएगी। ऐसे में अभी तक क्रय केंद्र नहीं खुलने से दिक्कत हो रही है। बाजार में गेहूूं का उचित दाम नहीं मिल रहा है। पिंडरा संवाददाता के अनुसार ब्लॉक में दो जगह केवल बैनर टांगकर क्रय केंद्र खोलने का कोरम पूरा कर दिया गया है। एक केंद्र बाबतपुर में तो दूसरा गरथमा में।
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दोनों केंद्रों पर न तो कांटा है और न बोरे। सहायक विकास अधिकारी (कोआपरेटिव) एनके श्रीवास्तव ने बताया कि अभी तक प्रशासन से कांटा और बोरे नहीं मिले हैं। दोनों जगह कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है लेकिन अभी तक किसान गेहूं बेचने नहीं पहुंच रहे। चिरईगांव संवाददाता के अनुसार खंड विकास क्षेत्र में दो केंद्र खोले गए हैं। गौरा कला में खाद्य रसद विभाग का तो लेढ़ूपुर में पीसीएफ का कृषक सेवा केंद्र खोला गया है। लेढ़ूपुर केंद्र के प्रभारी केके मिश्र ने बताया कि कांटा, बाट और बोरे आ गए हैं। इस बार 500 क्विंटल खरीद का लक्ष्य है।
रोहनिया और आराजीलाइन संवाददाता के अनुसार आराजीलाइन ब्लॉक में दो क्रय केंद्र खुलने हैं लेकिन अभी तक केवल मिल्कीचक में खुला है। केंद्र प्रभारी सुधीर कुमार ने बताया कि इलेक्ट्रानिक कांटा, बोरे, पंखा, बोरा सिलने की मशीन और माश्चर मीटर (नमी मापक यंत्र) मिल गया है। एक लाख रुपये मुहैया कराए गए हैं लेकिन अभी तक कोई किसान गेहूं बेचने नहीं पहुंचा। इस केंद्र में पिछले साल मात्र 16 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई थी। वहीं, दूसरा केंद्र भवानीपुर में अभी तक खुला ही नहीं।
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एक तो मौसम की मार से इस साल गेहूं की पैदावार काफी कम हुई है। जिले में 219.809 मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन लक्ष्य रखा गया था लेकिन 127.010 मीट्रिक टन ही पैदा हुआ है। लक्ष्य से 92.709 मीट्रिक टन कम पैदावार हुई है। ऊपर से केंद्र नहीं खुलने से किसानों को परेशानी बढ़ गई है। पिछले दिनों प्रशासन ने एक अपैल से सभी ब्लॉकों में 17 क्रय केंद्र खोलने का एलान किया था। बाकायदा केंद्रों की सूची भी जारी की गई थी। सभी केंद्रों के लिए बोरे, तौल के लिए कांटा और किसानों को भुगतान के लिए धनराशि मुहैया कराने का दावा किया गया था।
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काशी विद्यापीठ ब्लॉक में एक भी केंद्र नहीं खुला। लोहता संवाददाता ने जब इस बारे में उप कृषि निदेशक एके सिंह पूछताछ की तो उन्होंने कहा कि ब्लॉक में कहां गेहूं क्रय केंद्र खुलना है, कब तक खुलना है, क्यों नहीं खुला, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। जिम्मेदार अधिकारियों का जब ऐसा रवैया है तो किसानों का भला कैसे होगा। हरपालपुर के रामदुलार सिंह, बखरिया के गुड्डू सिंह, कोरौता के डॉ. वीरेंद्र पटेल, पारस नाथ पटेल, सभई पुर के मदन पांडेय ने बताया कि गेहूं की कटाई तेजी से चल है। नवरात्र बाद लगन शुरू हो जाएगी। ऐसे में अभी तक क्रय केंद्र नहीं खुलने से दिक्कत हो रही है। बाजार में गेहूूं का उचित दाम नहीं मिल रहा है। पिंडरा संवाददाता के अनुसार ब्लॉक में दो जगह केवल बैनर टांगकर क्रय केंद्र खोलने का कोरम पूरा कर दिया गया है। एक केंद्र बाबतपुर में तो दूसरा गरथमा में।
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दोनों केंद्रों पर न तो कांटा है और न बोरे। सहायक विकास अधिकारी (कोआपरेटिव) एनके श्रीवास्तव ने बताया कि अभी तक प्रशासन से कांटा और बोरे नहीं मिले हैं। दोनों जगह कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है लेकिन अभी तक किसान गेहूं बेचने नहीं पहुंच रहे। चिरईगांव संवाददाता के अनुसार खंड विकास क्षेत्र में दो केंद्र खोले गए हैं। गौरा कला में खाद्य रसद विभाग का तो लेढ़ूपुर में पीसीएफ का कृषक सेवा केंद्र खोला गया है। लेढ़ूपुर केंद्र के प्रभारी केके मिश्र ने बताया कि कांटा, बाट और बोरे आ गए हैं। इस बार 500 क्विंटल खरीद का लक्ष्य है।
रोहनिया और आराजीलाइन संवाददाता के अनुसार आराजीलाइन ब्लॉक में दो क्रय केंद्र खुलने हैं लेकिन अभी तक केवल मिल्कीचक में खुला है। केंद्र प्रभारी सुधीर कुमार ने बताया कि इलेक्ट्रानिक कांटा, बोरे, पंखा, बोरा सिलने की मशीन और माश्चर मीटर (नमी मापक यंत्र) मिल गया है। एक लाख रुपये मुहैया कराए गए हैं लेकिन अभी तक कोई किसान गेहूं बेचने नहीं पहुंचा। इस केंद्र में पिछले साल मात्र 16 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई थी। वहीं, दूसरा केंद्र भवानीपुर में अभी तक खुला ही नहीं।