Weather Update: वाराणसी में कहीं तेज बारिश, कहीं गिरे ओले, हवा में नमी बढ़ी; धूप का असर कम
सुबह से ही बादलों की आवाजाही जारी रही। हवा में नमी भी अन्य दिनों की तुलना में अधिक रही। शहर से लेकर गांव तक कहीं तेज बारिश हुई तो कुछ जगहों पर बूंदाबांदी हुई। इसके साथ ही ग्रामीण इलाके में ओले भी गिरे।
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Varanasi Weather: वाराणसी में मौसम में बदलाव का असर रहा कि अधिकतम तापमान औसत से 4.6 डिग्री सेल्सियस कम हो गया और पारा 30 से नीचे आ गया। मौसम विभाग ने अगले दो दिन तक इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना जताई है।
पश्चिमी विक्षोभ की वजह से ही वाराणसी में मौसम दो दिन से बदला बदला लग रहा है। इसमें गुरुवार की भोर में शहरी इलाके में बूंदाबांदी हुई। इसमें रामनगर में सुबह करीब साढ़े दस बजे तेज बारिश हुई। स्थिति यह थी कि लोग बारिश से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों पर खड़े रहे। सड़क पर भी सन्नाटे जैसा माहौल हो गया।
उधर चोलापुर में बेमौसम बारिश के साथ ही ओलावृष्टि हुई। इसको देखकर किसान परेशान हो गए। कुछ लोगों के खेतों में गेहूं कटकर रखे थे वो भी भींग गए। इस बीच, दोपहर में भी कुछ जगहों पर बूंदाबांदी हुई। अचानक बदले मौसम का असर तापमान पर भी देखने को मिला।
अधिकतम तापमान औसत से 4.6 डिग्री सेल्सियस कम होकर 29.8 पर पहुंच गया जबकि न्यूनतम तापमान 19.0 रिकॉर्ड किया गया। बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ का असर अभी 22 मार्च तक बना रहेगा। इस दौरान तेज हवा के साथ बारिश की संभावना बनी है।
बेमौसम बारिश से फसलों को होगा नुकसान
गुरुवार को सुबह हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी फसलें, खासकर गेहूं, सरसों, चना और मटर, ओलावृष्टि से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। किसानों को अपनी मेहनत और आने वाली फसल के नुकसान का डर सता रहा है। उनका कहना है कि इस बारिश से फसलों को नुकसान होगा।
गेहूं की फसल लगभग पककर तैयार है, और इस समय हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसल को भारी नुकसान होगा। तेज हवा के साथ हुई बारिश से गेहूं की बालियां गिर गई हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित होंगे। कई किसानों ने सरसों की कटाई कर ली है, लेकिन कटी हुई फसल खेतों में पड़ी है।
किसान भानु प्रताप सिंह, हरिशंकर सिंह और अजय सिह ने बताया कि प्याज, लहसुन और अन्य सब्जियों की फसलों को भी ओलावृष्टि से नुकसान हुआ है। ओले के आकार बहुत बड़े नहीं होने से गेहू की फसल को थोड़ा कम नुकसान हुआ है, अगर ओले बड़े होते तो गेहूं की फसल को बहुत अधिक नुकसान होता।
बोले कृषि वैज्ञानिक
बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं सहित दलहनी और तिलहनी की सभी फसलों पर 10 से 15 प्रतिशत तक असर पड़ेगा। गेहूं के गिरने, बालियों और फूलों और फलों के गिरने से उत्पादन में कमी आएगी। - डॉ. नवीन कुमार सिंह, कृषि वैज्ञानिक केवीके
समय से पूरी करनी होगी हीट वेब/ लू से बचाव की तैयारी
जिलाधिकारी एस. राजलिंगम की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में हीट वेव/लू से बचाव के बारे में बैठक हुई। इसमें जिलाधिकारी ने बताया कि आईएमडी के अनुसार इस साल तापमान में सर्वाधिक वृद्धि होने की सम्भावना है। हीट वेव से लोगों को कैसे सुरक्षित रखा जाएगा इसकी कार्ययोजना समय रहते सभी विभागों को बनाना चाहिए।
पेयजल की समस्या जिले में में कहीं भी नहीं होनी चाहिए, यदि पेयजल की समस्या होती है तो सम्बन्धित विभाग के अधिकारीयों का उत्तरदाईत्व निर्धारित करते हुए कठोर कार्यवाही की जाएगी। सभी विभागों में हीट वेव से बचाव हेतु क्या करें क्या न करें का व्यापक प्रचार प्रसार भी किया जाए। जिलाधिकारी द्वारा ब्लॉक स्तर/ तहसील स्तर एवं जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नामित करने को भी कहा गया।