{"_id":"65566c07bbe7371ea60bba16","slug":"walls-of-the-observatory-are-cracking-equipment-broken-due-to-rust-varanasi-news-c-20-vns1013-422810-2023-11-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: दरक रहीं वेधशाला की दीवारें, जंग लगने से टूटे उपकरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: दरक रहीं वेधशाला की दीवारें, जंग लगने से टूटे उपकरण
विज्ञापन
वाराणसी। देखरेख नहीं होने पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में वेधशाला अपनी चमक खो रहा है। दीवारों के दरकने के साथ ही जंग लगने से उपकरण टूटने लगे हैं। कई यंत्रों से उपकरण टूट कर बिखर चुके हैं। ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार शुक्ल ने बताया कि देशभर के संस्कृत विश्वविद्यालयों में सबसे पहले संपूर्णांनद संस्कृत विश्वविद्यालय में वेधशाला की स्थापना हुई थी। सूर्य की चाल के अलावा ग्रहों की सूक्ष्म गणना की जाती है। ज्योतिष के छात्र यहां प्रायोगिक ज्ञान से रूबरू होते हैं। वेधशाला को 23 अगस्त 1992 को अध्ययन के लिए खोला गया था। विश्वविद्यालय के स्टेडियम के पास वेधशाला में याम्योतर धरातलीय चाप तुरीय में दरार पड़ गई है। नाड़ी वलय, कर्क व मकर राशि वलय यंत्र, भारतीय तारामंडल, शंकु यंत्र में जंग लग चुका है। वेधशाला में 11 यंत्रों के जरिये खगोलीय घटना की जानकारी ली जा सकती है।
देख सकते हैं ग्रह, नक्षत्रों की चाल
वेधशाला में टेलीस्कोप के माध्यम से आकाश में ग्रह नक्षत्रों को देखा जा सकता है। खगोलीय घटनाओं को समझने के लिए यहां कई प्रकार के उपकरण लगाए गए हैं। हालांकि, इसमें से ज्यादातर खराब हो चुके हैं। वेधशाला के जरये उल्कापात, ग्रहण भी देख सकते हैं। नौ ग्रहों की चाल, स्थिति और उनके स्थान का अध्ययन करने में मदद मिलती है।
विज्ञापन
देख सकते हैं ग्रह, नक्षत्रों की चाल
वेधशाला में टेलीस्कोप के माध्यम से आकाश में ग्रह नक्षत्रों को देखा जा सकता है। खगोलीय घटनाओं को समझने के लिए यहां कई प्रकार के उपकरण लगाए गए हैं। हालांकि, इसमें से ज्यादातर खराब हो चुके हैं। वेधशाला के जरये उल्कापात, ग्रहण भी देख सकते हैं। नौ ग्रहों की चाल, स्थिति और उनके स्थान का अध्ययन करने में मदद मिलती है।
विज्ञापन