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भाजपा के पक्ष में बढ़ा मतदाताओं का रुझान, कांग्रेस व बसपा की पकड़ कमजोर

Sat, 12 Mar 2022 12:53 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 12 Mar 2022 12:53 AM IST
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Voters' trend increased in favor of BJP, weak hold of Congress and BSP
आठों विधानसभाओं में भाजपा ने बढ़ी जीत के साथ ही अपने मत फीसदी में भी इजाफा किया है। पांच साल पहले 2017 में मिले मतों के मुकाबले भाजपा को वाराणसी में करीब 10 फीसदी तक ज्यादा मत मिले हैं। सबसे ज्यादा 60.62 फीसदी मत कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव को मिले हैं, जो पिछले चुनाव के मुकाबले करीब दो फीसदी ज्यादा है। पिंडरा सीट पर भाजपा प्रत्याशी को 38.20 फीसदी मत मिले हैं, जो पिछले चुनाव से करीब छह फीसदी कम है। बाकी सभी छह सीटों पर भी दो से पांच मत फीसदी में बढ़ोतरी हुई है। उधर, सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस और बसपा को हुआ है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाले वाराणसी जिले की आठों सीट पर भाजपा और सपा के बीच हुई कड़ी टक्कर में मत फीसदी में भी बढ़ोतरी हुई है। जबकि पिंडरा सीट को छोड़ दिया जाए तो कांग्रेस का मत फीसदी दहाई में भी नहीं पहुंच पाया है। पिंडरा में कांग्रेस के अजय राय को 21.85 फीसदी मतदाताओं का समर्थन मिला है। बसपा के मत फीसदी में भी कमी आई है और पिंडरा में ही उसका मत फीसदी सर्वाधिक 22.08 पहुंचा। हालांकि वर्ष 2017 में यह मत फीसदी करीब 25 फीसदी था। इसके अलावा बसपा को हर सीट पर चार से 10 फीसदी तक मत कम मिले हैं। भाजपा प्रत्याशियों को मिले मत फीसदी के आंकड़ों पर नजर डाले तो पिंडरा में डा. अवधेश सिंह को 38.20, शिवपुर में अनिल राजभर को 45.73, कैंट में सौरभ श्रीवास्तव को 60.62, रोहनिया में अपना दल एस के सुनील पटेल को 48.07, सेवापुरी में नील रतन पटेल को 47.59, दक्षिणी में डॉ. नीलकंठ तिवारी को 50.86, अजगरा में त्रिभुवन राम को 41.22 और उत्तरी में रविंद्र जायसवाल को 54.61 फीसदी मत मिले।
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कमजोर प्रबंधन और प्रत्याशी चयन में चूक का खामियाजा
दरअसल, वाराणसी में भाजपा के मजबूत संगठन और चुनावी प्रबंधन के मुकाबले सपा, बसपा और कांग्रेस कोई खास रणनीति नहीं बना पाए। इसके अलावा कांग्रेस में प्रत्याशी चयन के बाद ही विवाद और नाराज कार्यकर्ताओं को जोड़ पाने में नाकामी के चलते उसके छह प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा पाए। ऐसे ही सपा में शहर दक्षिणी जैसी सीट छोड़ दें तो कोई खास कार्ययोजना बनाने में नाकाम रही है। बसपा के प्रत्याशी केवल सोशल इंजीनियरिंग के भरोसे ही मैदान में थे। उनके पास ना तो बेहतर प्लानिंग थी और ना ही संगठन का सहयोग।
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मंत्रिमंडल में बढ़ी बनारस की उम्मीदें, मिल सकती है ज्यादा जगह
पिछले मंत्रिमंडल में एक कैबिनेट और दो स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाए गए थे, इस बार चार की है आस
पूर्वांचल के भूमिहार चेहरे के रूप में उभरे डॉ. अवधेश सिंह भी हो सकते हैं मंत्रिमंडल में शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। पूर्वांचल के विकास की धुरी बन चुकी वाराणसी को योगी-2 सरकार में ज्यादा जगह की उम्मीद है। शपथ ग्रहण समारोह में ही वाराणसी के विधायकों को मंत्री बनने की आस है। पिछली सरकार में एक कैबिनेट और दो स्वतंत्र प्रभार मंत्री वाराणसी के हिस्से में आए थे। ऐसे में इस बार यह आंकड़ा चार तक होने की उम्मीद है। पूर्वांचल में भूमिहार चेहरे के रूप में उभरे दूसरी बार के विधायक डॉ. अवधेश सिंह भी मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं।
दरअसल, वर्ष 2017 में भाजपा के प्रचंड बहुमत के बाद अनिल राजभर ने सरकार गठन के साथ ही राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के रुप में शपथ लिया था। राजभर चेहरे के रूप में पार्टी ने इन्हें आगे बढ़ाया और सुभासपा के भाजपा से अलग होने के बाद अनिल राजभर को कैबिनेट में जगह दी गई। डा. नीलकंठ तिवारी को पहले राज्यमंत्री और बाद में स्वतंत्र प्रभार का तोहफा मिला था। मंत्रिमंडल के विस्तार में रविंद्र जायसवाल को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया था। इस बार वाराणसी से चुने गए विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल होने की उम्मीद ज्यादा है। कैंट से दूसरी बार विधायक बने सौरभ श्रीवास्तव ने इस बार भी सबसे बड़ी जीत हासिल की है। युवा होने के साथ ही लगातार दो बार बड़ी जीत के साथ विधानसभा पहुंचे सौरभ को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। ऐसे ही सेवापुरी से दूसरी बार विधायक बने नीलरतन पटेल को भी उम्मीद है कि उन्हें जगह मिलेगी। पीएम नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक स्नेह के बाद उनकी उम्मीदें ज्यादा हैं। सबसे अहम पूर्वांचल में शामिल डा. अवधेश सिंह आसपास के जिले में अकेले भूमिहार विधायक बने हैं। इसके साथ ही कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय को दूसरी बार पटकनी देने पर उन्हें यह तोहफा मिल सकता है।

मंत्रियों के प्रमोशन की भी उम्मीद
पिछली बार मंत्री बने तीनों विधायकों को प्रमोशन की भी उम्मीद है। अनिल राजभर को बड़े मंत्रालय के साथ ही प्रमुख चेहरे के रूप में जगह मिल सकती है। इसके अलावा डा. नीलकंठ तिवारी और रविंद्र जायसवाल को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। फिलहाल सरकार के शपथ ग्रहण के साथ ही यह तस्वीर साफ होगी।
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