विश्वनाथ मंदिर: नवंबर में 5 दिन सुगम दर्शन, मंगला आरती के टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग बंद; प्रबंधन ने लिए फैसले
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में नवंबर में पांच दिनों तक सुगम दर्शन और मंगला आरती की ऑनलाइन टिकट बुकिंग बंद रहेगी। 7 से 10 नवंबर और 24 नवंबर को वेबसाइट और ऐप पर टिकट नहीं मिलेंगे। दीपावली, अन्नकूट और देव दीपावली पर संभावित भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने यह निर्णय लिया है।
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श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में नवंबर में पांच दिनों तक सुगम दर्शन और मंगला आरती की ऑनलाइन टिकट बुकिंग नहीं होगी। आगामी त्योहारों पर श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने 7 से 10 नवंबर और 24 नवंबर को ऑनलाइन टिकटों की बिक्री पर रोक लगा दी है। इन तारीखों पर मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से टिकट बुक नहीं किए जा सकेंगे। हालांकि, अन्य दिनों के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर टिकट बुकिंग के दौरान श्रद्धालुओं को इसकी सूचना भी दी जा रही है। नवंबर में दीपावली, अन्नकूट और देव दीपावली जैसे प्रमुख पर्व होने के कारण काशी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। आठ नवंबर को दीपावली और नौ नवंबर को अन्नकूट पूजा है। वहीं, 24 नवंबर को देव दीपावली का आयोजन होगा। इन पर्वों पर काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है।
आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं
हालांकि, नवंबर के बाकी दिनों में सुगम दर्शन के टिकटों की बुकिंग की जा सकती है। 22 और 23 नवंबर के साथ ही 25 से 30 नवंबर तक प्रत्येक स्लॉट के लिए टिकट उपलब्ध हैं। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार इन तारीखों में दर्शन के लिए ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं।
दूसरी ओर, मंगला आरती के सामान्य टिकटों की बुकिंग में भी फिलहाल उपलब्धता नहीं दिख रही है। हालांकि, मंदिर प्रशासन की वेबसाइट पर प्रतिदिन सुबह 11 बजे तत्काल टिकट बुकिंग का विकल्प उपलब्ध कराया जाता है। इसके तहत हर दिन 100 तत्काल टिकटों की बुकिंग की व्यवस्था है। श्रद्धालु तत्काल कोटे के तहत टिकट प्राप्त करने का प्रयास कर सकते हैं।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के उप जिलाधिकारी शंभू शरण ने बताया कि श्रद्धालुओं की भीड़ और परिस्थितियों को देखते हुए मंदिर में दर्शन-पूजन की व्यवस्था तय की जाती है। त्योहारों के दौरान जब श्रद्धालुओं का दबाव अधिक होगा, तब सामान्य भक्तों को अधिक से अधिक संख्या में दर्शन कराने को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।