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गंगा में हरे शैवालों का कारण विंध्याचल एसटीपी नहीं
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गंगा में हरे शैवालों के मिलने का कारण विंध्याचल एसटीपी नहीं है। इसका खुलासा जल निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक द्वारा राज्य स्वच्छ गंगा मिशन को लिखे पत्र से हुआ है। वहीं, जिलाधिकारी द्वारा गठित पांच सदस्यीय जांच कमेटी ने बनारस में मिले हरे शैवाल के लिए विंध्याचल एसटीपी को जिम्मेदार बताया था। क्रांति फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पत्र को सार्वजनिक कर जांच कमेटी की रिपोर्ट पर सवालिया निशान लगा दिया है। संयुक्त प्रबंध निदेशक सुशील कुमार पटेल ने पत्र में लिखा है कि जून में गंगा में दिखे हरे शैवालों का कारण गंगा के बहाव में पानी की कमी को बताया है। साथ ही निदेशक ने लिखा है कि जगह-जगह पानी का ठहराव, तापमान में वृद्धि, सरफेश रन ऑफ भी शैवाल के लिए जिम्मेदार है। हरे शैवालों के पीछे विंध्याचल एसटीपी का कोई योगदान नहीं है। गौरतलब है कि जून में वाराणसी के घाटों पर गंगा के पानी में दिखे हरे शैवालों के कारण प्रशासन के माथे पर बल पड़ गए थे। बाद में केमिकल डालकर गंगा में मौजूद हरे शैवालों को समाप्त किया गया था।
प्राकृतिक बहाव में छेड़छाड़ से बढ़ी समस्या
क्रांति फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ई. राहुल कुमार सिंह ने बताया कि पत्र के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि शैवाल का कारण गंगा के प्राकृतिक बहाव के साथ होने वाली छेड़छाड़ है। गंगा में बिना सोचे समझे मलबा गिराने, प्लेटफार्म बनाने और नहर से गंगा के बहाव में गतिरोध उत्पन्न हो रहा है। जिसकी वजह से गंगा में शैवाल बढ़े। आरोप लगाया कि जांच समिति ने जानबूझकर शैवाल के लिए विंध्याचल एसटीपी को जिम्मेदार ठहराया। प्रशासन अपनी गलती मानने की बजाय तर्क देकर जनता को बरगलाने का प्रयास कर रहा है।
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प्राकृतिक बहाव में छेड़छाड़ से बढ़ी समस्या
क्रांति फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ई. राहुल कुमार सिंह ने बताया कि पत्र के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि शैवाल का कारण गंगा के प्राकृतिक बहाव के साथ होने वाली छेड़छाड़ है। गंगा में बिना सोचे समझे मलबा गिराने, प्लेटफार्म बनाने और नहर से गंगा के बहाव में गतिरोध उत्पन्न हो रहा है। जिसकी वजह से गंगा में शैवाल बढ़े। आरोप लगाया कि जांच समिति ने जानबूझकर शैवाल के लिए विंध्याचल एसटीपी को जिम्मेदार ठहराया। प्रशासन अपनी गलती मानने की बजाय तर्क देकर जनता को बरगलाने का प्रयास कर रहा है।
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