23 साल बाद शुक्र-गुरु होंगे अस्त: नहीं गूंजेगी शहनाई, इस राशि में बना त्रिग्रही संगम; जानें- इसके अन्य प्रभाव
Varanasi News: पिछले 10 दिनों से एक साथ थे। जबकि 24 अप्रैल को शुक्र के भी प्रवेश कर जाने के बाद अब तीनों ग्रह 14 मई तक साथ रहेंगे और 15 मई को सूर्य अपने वृषभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे।
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23 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि धन के प्रदाता शुक्र व ज्ञान के प्रदाता गुरु मई और जून भर अस्त रहेंगे। मेष राशि में ग्रहों के राजा सूर्य और मंत्री गुरु के साथ शुक्र का संगम बना है। त्रिग्रही युति यानी एक साथ ये ग्रह 21 दिनों तक रहेंगे। इसका प्रभाव राशियों पर भी पड़ेगा।
कर्क, बृषभ, तुला, कन्या व वृश्चिक राशि के लिए फलदायी है। वहीं, ग्रहों के ऐसे संगम से मई और जून भर यानी 66 दिनों तक शहनाई की धुन नहीं गूंजेगी और मांगलिक कार्य ठप रहेंगे। नौ से 13 जुलाई तक कुल पांच लग्न पड़ेगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर ग्रह अपने तय समय में राशि परिवर्तन करते हैं। सूर्य हर माह बदलते हैं। आचार्य प्रत्युष त्रिपाठी व आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि 14 अप्रैल को ही अपने ऊंच राशि मेष में प्रवेश कर गए हैं। हालांकि, गुरु पिछले साल 20 अप्रैल से ही इस राशि में बैठे हैं।
उन्होंने बताया कि दैत्यों के गुरु शुक्र और देवताओं के गुरु बृहस्पति की युति से कई राशियों के जीवन में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिन राशि वालों पर प्रतिकूल प्रभाव है। उनको संभलकर रहना होगा।
29 को शुक्र व 6 को गुरु होंगे अस्त
शुक्र 29 अप्रैल को रात 11:13 बजे और गुरु छह मई को रात 11:01 पर अस्त हो जाएंगे। जबकि गुरु का उदय तीन जून और शुक्र का उदय 28 जून को हो रहा है। हालांकि, इन ग्रहों के जागृत अवस्था में होने के बावजूद भी मुहूर्त नहीं बन रहे हैं। ऐसे में मांगलिक कार्य ठप ही रहेंगे। जुलाई में मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। मगर, वैवाहिक मुहूर्त नौ, 10, 11, 12 और 13 जुलाई को पड़ रहे हैं। इसके बाद चातुर्मास लग जाएगा तो नवंबर में लग्न शुरू होगा।
ग्रहों के अस्त होने पर क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य
ज्योतिष के अनुसार ग्रहों के राजा सूर्य के निकट जब कोई ग्रह एक तय दूरी पर आ जाता है तो वह सूर्य ग्रह के प्रभाव से बलहीन हो जाता है। इस अवस्था में ग्रह अस्त माने जाते हैं। शुक्र सुख, वैवाहिक जीवन, विलासता, विवाह, धन, ऐश्वर्य का कारक माने गए हैं। ऐसे में शुक्र के अस्त होने पर मांगलिक कार्य में सफलता नहीं मिलती है। शुभ फल प्राप्त नहीं होते हैं।
ये होता है वर्जित
विवाह, गृह प्रवेश, बावड़ी, भवन निमार्ण, कुआं, तालाब, बगीच, जल के बडे होदे, व्रत का प्रारम्भ, उद्यापन, प्रथम उपाकर्म, नई बहू का गृह प्रवेश, देवस्थापन, दीक्षा, उपनयन आदि कार्य नहीं कर सकते हैं।
बांधाओं को दूर करने के लिए ये करें
माता लक्ष्मी की शुक्रवार के दिन पूजन-अर्चन, उन्हें पांच लाल फूल चढ़ाएं। इस दिन मंदिर में महिला पुजारियों को सफेद मिठाई दान करना श्रेष्ठ होगा। प्रतिदिन 108 बार ओम शुक्राय नम: मंत्र का जप करें। शुक्रवार के दिन क्रीम या गुलाबी रंग के वस्त्र पहनें। यदि शादीशुदा हैं तो अपने कमरे में रोज क्वार्ट्ज स्टोन को रखना उत्तम होगा।