महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. एके त्यागी ने कहा कि वीर सावरकर त्याग, बलिदान, वीरता, धैर्य एवं साहस के प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने कहा था कि हमारे देश और समाज के माथे पर अस्पृश्यता एक कलंक है। करोड़ों हिंदू बंधु इससे अभिशप्त हैं। जब तक हम ऐसे रहेंगे, तब तक हमारे शत्रु हमें परस्पर लड़वाकर, विभाजित करके सफल होते रहेंगे। इस घातक बुराई को त्यागना ही होगा।
वह शनिवार को आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय सेवा योजना एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के संयुक्त तत्वावधान में संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। मुख्य अतिथि सूर्य कुमार जालान ने कहा कि सावरकर वनवासी समाज को मुख्य धारा से जोड़ने की बात करते थे। उनके विचार में यदि समाज के अंतिम व्यक्ति का विकास करना है तो वनवासी समाज तक विकास के रथ को ले जाना होगा। गोष्ठी के दूसरे चरण में आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लेने वाले महाविद्यालय के प्रबंधकों को कुलपति ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। संचालन डॉ. किरन सिंह एवं डॉ. केके सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पारिजात सौरभ ने दिया। इस दौरान प्रो. वंदना सिन्हा, डॉ. निरंजन सहाय, डॉ. निशा सिंह, डॉ. सतीश कुमार कुशवाहा, डॉ. विकास राय, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. रमेश कुमार सिंह, डॉ. अनुकूल राय, डॉ. सुनील विश्वकर्मा, डॉ. नीरज धनखड़, डॉ. हंसराज, डॉ. आनंद प्रकाश सिंह, डॉ. विनोद कुमार सिंह उपस्थित रहे।