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वाराणसी: फर्जी दस्तावेजों से बंजर जमीन पर मुआवजा लेने वाली महिला गिरफ्तार, आरोपी अब तक ले चुके थे 2.19 करोड़ रुपये

Fri, 31 Dec 2021 12:24 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 31 Dec 2021 12:24 AM IST
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Varanasi: Woman arrested for taking compensation on barren land with fake documents accused had taken Rs 2.19 crore till now in varanasi
प्रतीकात्मक तस्वीर

वाराणसी में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बंजर जमीन पर अपना नाम चढ़वाकर 2.19 करोड़ रुपये मुआवजा लेने के मामले में मिर्जामुराद पुलिस ने आरोपी महिला मुखा देवी को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। बंजर जमीन पर कास्तकारों का नाम निरस्त कर उनसे मुआवजा वापस लेने की प्रक्रिया भी प्रशासन की ओर से शुरू कर दी गई है। इस बड़े फर्जीवाड़े में तत्कालीन बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी सहित अन्य लोगों की भूमिका संदिग्ध है। 54 साल पहले मिर्जामुराद के बिहड़ा गांव के रहने वाले स्व. कोले यादव के खिलाफ डिप्टी कलेक्टर माल के आदेश का अनुपालन नहीं होने के कारण एक बड़ा फर्जीवाड़ा हो गया था।

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दरअसल, राजातालाब तहसील के परगना कसवार राजा में मोहनसराय-प्रयागराज (एनएच-19) के पास 80 एकड़ बंजर में से पांच एकड़ जमीन पर बिहड़ा के रहने वाले कोले यादव के खिलाफ मार्च 1968 में फैसला देते हुए डिप्टी कलेक्टर ने बंजर जमीन को सरकारी अभिलेख में दर्ज करने का आदेश दिया था। सरकारी कर्मचारियों ने इस आदेश का अमल नहीं किया और कोले यादव ने उसी दौरान मंडलायुक्त के समक्ष अपील कर दी, हालांकि यहां से उसकी अपील खारिज हो गई और एसडीएम के आदेश को ही प्रभावी माना गया।

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इसके बाद बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के साथ मिलकर मोहनसराय प्रयागराज (एनएच-19) पर बंजर जमीन पर फर्जी तरीके से कोले यादव ने नाम चढ़वा लिया। इसके बाद भूमि अधिग्रहण के दौरान (29-बी) में आरोपियों ने 2.19 करोड़ मुआवजा ले लिया। इस मामले की शिकायत अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार से की गई तो उन्होंने इसकी जांच कराई और बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। इस मामले में मार्च 2021 में मुकदमा दर्ज किया गया।

अपील खारिज होने के बाद लेखपाल ने लगाई रिपोर्ट
बंजर जमीन को लेकर कोले समेत अन्य लोगों ने तत्कालीन बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी पुनीत शुक्ला (वर्ष 2009) के कोर्ट में अपील की। यहां भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली और विपक्षी के आवेदन को निरस्त करते हुए बंजर जमीन घोषित कर दिया था। डीडीसी के यहां भी अपील स्वीकार नहीं की गई। कोले यादव की मृत्यु के बाद लेखपाल ने उनके पुत्र कमलेश यादव, बृजेश यादव, राजेश यादव, अखिलेश यादव व धाधेश्वर यादव तथा उनके पत्नी को वारिस घोषित करते हुए रिपोर्ट लगा दी। फर्जीवाड़ा का खुलासा होने के बाद इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि मुआवजा वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू कराई गई है। इसके लिए न्यायालय के माध्यम से प्रक्रिया चल रही है। बंजर जमीन को सरकारी अभिलेखों में दर्ज कराया जा चुका है।

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