Varanasi Weather: 15 साल में दूसरी बार अगस्त में न्यूनतम तापमान 23 डिग्री, तीसरे दिन 40 मिमी बारिश; उमस गायब
वाराणसी में लगातार तीसरे दिन भी बादलों की आवाजाही बनी रही। बारिश के बाद उमस और गर्मी से लोगों को राहत मिल चुकी है। वहीं, पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के गंगा का पानी भी बढ़ रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बनारस में 2010 के बाद 15 साल में दूसरी बार अगस्त महीने में न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है। इससे पहले 29 अगस्त 2021 को बनारस का न्यूनतम तापमान 18.8 डिग्री गया था मगर इस बार शुक्रवार की घनघोर बारिश के बाद न्यूनतम पारा 23 डिग्री के आसपास रहा।
मौसम विज्ञान विभाग के 30 साल के आंकड़ों के मुताबिक, बनारस में अगस्त महीने में न्यूनतम तापमान का औसत 26 डिग्री और अधिकतम तापमान का 33 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है।
2025 के अगस्त महीने में बनारस का न्यूनतम तापमान औसत से भी तीन डिग्री नीचे चला गया। सोमवार को जिले में लगातार तीसरे दिन 40 मिलीमीटर बारिश हुई। तीन दिनों को मिलाकर कुल 242 मिमी बारिश हो चुकी है। मानसून के सीजन में अब तक कुल 818 मिमी बारिश हो चुकी है जो कि सामान्य से 43 फीसदी ज्यादा है।
27 अगस्त को भारी बारिश का पूर्वानुमान
सोमवार को दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री कम 32.4 और न्यूनतम तापमान 1.5 डिग्री नीचे 24.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बाबतपुर इलाके की ओर 15.9 मिमी बारिश हुई। मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक 27 अगस्त को भारी बारिश का पूर्वानुमान है, इसके बाद मानसून की सक्रियता कम हो सकती है।
ट्रॉमा सेंटर से भगवानपुर की ओर सड़क पर कीचड़ और फिसलन
जिले में चार दिन से बारिश का सिलसिला जारी है। इससे शहर की सड़कों पर कीचड़ और गलियों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। ट्रॉमा सेंटर से भगवानपुर वाले रास्ते और लंका-ट्रॉमा सेंटर मार्ग पर काफी गीली मिट्टी से फिसलन बनी रही। सामनेघाट से मदरवां मार्ग पर कीचड़ से लोग परेशान हैं।
इसी प्रकार भगवानपुर एसटीपी जाने वाला मार्ग क्षतिग्रस्त है। बौलिया से चांदपुर जाने वाले मार्ग का चौड़ीकरण करने के बाद नाले का निर्माण पूरा नहीं किया गया है। नाले पर रखे पटरे से लोग आ जा रहे हैंं। लहरतारा रेलवे कालोनी में जलजमाव से लोग परेशान हैं।
खूब बरसा पानी, खेतों का रंग हुआ धानी
बारिश से खेतों का रंग धानी हो गया है। धान की फसलें खेतों में लहलहा रही हैं। भरपूर बारिश के बाद गांव के सिवान हरे-भरे हो गए हैं। किसान विद्यालय समिति के शोध समन्वयक डॉ. कमलेश्वर सिंह और पनियार के गोल्डी सिंह ने बताया कि धान की फसल की सीधी बुवाई की थी। इस साल अच्छी बारिश से उनका धान बेहतर स्थिति में है।