{"_id":"595ccef44f1c1baa658b4820","slug":"varanasi-villages-become-odf-is-very-hard","type":"story","status":"publish","title_hn":"बनारस के गावों को तय समय में ओडीएफ बनाना टेढ़ी खीर, जानिए कारण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बनारस के गावों को तय समय में ओडीएफ बनाना टेढ़ी खीर, जानिए कारण
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 05 Jul 2017 05:05 PM IST
विज्ञापन
31 दिसंबर तक गावों को करना है खुले में शौचमुक्त
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वच्छ भारत मिशन के तहत दो अक्तूबर तक शहर और 31 दिसंबर तक वाराणसी शहर और गांवों को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) करने का लक्ष्य दिया गया है। 760 में से अब तक 555 गांव अभी भी ओडीएफ होने बाकी हैं। इनमें तकरीबन दो लाख शौचालय का निर्माण कराना पड़ेगा।
इसके लिए दस हजार राजमिस्त्री की आवश्यकता है। एक मिस्त्री 18 से 20 शौचालय का निर्माण कराएंगे तब जाकर लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है।
जिला प्रशासन ने मानीटरिंग तो शुरू कर दी है लेकिन मौजूदा स्थिति को देखकर नहीं लगता की निर्धारित समयसीमा में काम पूरा हो पाएगा।
बारिश के मौसम में निर्माण कराना अपने आप में चुनौती है। अभी राजमिस्त्री की कार्यशाला होगी। इसके बाद उन्हें निर्धारित जगहों पर शौचालय निर्माण कराने के लिए भेजा जाएगा। एक राजमिस्त्री को मजदूरी के रूप में 45 हजार रुपये दिए जाएंगे।
जल्दबाजी में कार्य कराया गया तो निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने का खतरा होगा। गंगा किनारे के गांवों में से मुस्तफाबाद की स्थिति बेहद खराब है। इसकी मानीटरिंग कर रहे सीडीओ सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि हम लोगों का पूरा प्रयास होगा कि निर्धारित अवधि में काम को पूरा कराएं।
विज्ञापन
एक सचिव को एक महीने के भीतर पूरे गांव को ओडीएफ करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसकी प्रतिदिन मानीटरिंग खुद करेंगे। इस काम की मानीटरिंग केंद्र और राज्य दोनों स्तर से हो रही है।
विज्ञापन
इसके लिए दस हजार राजमिस्त्री की आवश्यकता है। एक मिस्त्री 18 से 20 शौचालय का निर्माण कराएंगे तब जाकर लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है।
जिला प्रशासन ने मानीटरिंग तो शुरू कर दी है लेकिन मौजूदा स्थिति को देखकर नहीं लगता की निर्धारित समयसीमा में काम पूरा हो पाएगा।
बारिश के मौसम में निर्माण कराना अपने आप में चुनौती है। अभी राजमिस्त्री की कार्यशाला होगी। इसके बाद उन्हें निर्धारित जगहों पर शौचालय निर्माण कराने के लिए भेजा जाएगा। एक राजमिस्त्री को मजदूरी के रूप में 45 हजार रुपये दिए जाएंगे।
विज्ञापन
जल्दबाजी में कार्य कराया गया तो निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने का खतरा होगा। गंगा किनारे के गांवों में से मुस्तफाबाद की स्थिति बेहद खराब है। इसकी मानीटरिंग कर रहे सीडीओ सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि हम लोगों का पूरा प्रयास होगा कि निर्धारित अवधि में काम को पूरा कराएं।
विज्ञापन
एक सचिव को एक महीने के भीतर पूरे गांव को ओडीएफ करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसकी प्रतिदिन मानीटरिंग खुद करेंगे। इस काम की मानीटरिंग केंद्र और राज्य दोनों स्तर से हो रही है।