वाराणसी : घरों में ही मनाई गई जैन धर्म के तीर्थंकर महावीर स्वामी की जयंती
आत्मरक्षा मानव रक्षा के संकल्प के साथ मना जन्मकल्याणक, कोरोना महामारी को दूर करने के लिए हुआ वज्र पंजर स्त्रोत का पाठ
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वाराणसी में हिंसा से अहिंसा की ओर चलने, जियो और जीने दो का आदर्श सूत्रपात करने वाले भगवान महावीर का जन्म कल्याणक रविवार को मना। भूली भटकी मानवता को अनेकांतवाद का महामंत्र देने वाले तीर्थंकर को जैन समाज ने नमन किया और घरों में ही अनुष्ठान पूर्ण किए।
रविवार को कोरोना कर्फ्यू और संक्रमण को देखते हुए जन्म कल्याण महोत्सव जैन धर्मावलंबियों ने घरों में रहकर मनाया। महावीर जन्म कल्याणक के नारे मेरा स्वास्थ्य मेरी जिम्मेदारी का पालन करने का संकल्प भी लिया गया। प्रात: काल लोगों ने घरों पर ध्वजारोहण के बाद मंगल गीत गाए। भगवान का जयकारा, मंगल वाद्य यंत्रों की ध्वनि और जन्म कल्याणक पर बधाई गीत गाए। तीर्थंकर के चित्र के सामने शास्त्र, स्वाध्याय, मंत्र उच्चारण, जाप, महावीर भजन, महावीर चालीसा एवं कोरोना महामारी के खात्मे व आत्मरक्षा के लिए श्रीवज्रपंजर स्त्रोत का पाठ व शांति धारा हुई।
तीर्थंकर महावीर के जियो और जीने दो, जीव दया एवं अहिंसा के पालन का संकल्प लिया गया। भक्तों ने तीर्थंकर की आरती भी उतारी। भगवान महावीर को चढ़ाए गए द्रव्य को लोगों ने पशु पक्षियों को खिलाया। जैन समाज के उपाध्यक्ष राजेश जैन ने बताया कि कोरोना महामारी को देखते हुए भगवान महावीर का अभिषेक पूजन भक्तों ने अपने-अपने घरों पर रहकर ऑनलाइन देखा। जैन महाराज दिगंबर साधु का मंगल संदेश, प्रवचन, धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी टीवी व सोशल मीडिया के जरिए देखा। इस दौरान जैन समाज के अध्यक्ष दीपक जैन, उपाध्यक्ष राजेश जैन, संजय जैन, आरसी जैन, विनोद जैन, महामंत्री अरुण जैन, समाज मंत्री तरुण जैन ने घरों पर पूजन किया।
अहिंसा के प्रतीक थे महावीर स्वामी
महावीर स्वामी की जयंती रविवार को अस्सी स्थित उदय भवन में मनाई गई। समारोह को संबोधित करते हुए सीपी जैन ने कहा कि महावीर स्वामी अहिंसा के मूर्तिमान प्रतीक थे। उनका जीवन त्याग और तपस्या से ओतप्रोत था। अध्यक्षता करते हुए भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अशोक पांडेय ने कहा कि त्याग, संयम, प्रेम, करुणा, शील और सदाचार उनके प्रवचनों का सार था। इस अवसर पर ऋषभ जैन, सूर्य प्रकाश जैन, सुरेश जैन, प्रो. अशोक जैन मौजूद रहे।