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बनारसः मंत्री और अफसरशाही के बीच फंसा शाही नाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 21 Aug 2018 06:03 PM IST
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अधिकारियों के साथ बैठक करते बनारस के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना
- फोटो : file photo
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बनारस के शाही नाले की सफाई और मरम्मत करने का काम अफसरशाही और मंत्री के बीच फंसता नजर आ रहा है। गंगा प्रदूषण इकाई जहां समय पर काम पूरा न करने के लिए कंपनी पर कार्रवाई के मूड में है, वहीं नगर विकास मंत्री ने कंपनी को राहत देते हुए समय सीमा चौथी बार बढ़ाते हुए 15 सितंबर कर दी।
शाही नाले की सफाई और मरम्मत का काम श्रीराम कंपनी को सौंपा गया था। तीन बार कार्य की समय सीमा बढ़ाने के बाद भी कंपनी इसे पूरा नहीं कर सकती तो उस पर 8 करोड़ का जुर्माना लगाकर नोटिस जारी कर दिया गया। नोटिस का समय रविवार को पूरा हो गया। अधिकारी अब जल निगम के बोर्ड को अंतिम फैसला करने के लिए पत्र लिखने जा रहे हैं।
शनिवार को जिले के विकास कार्यों की समीक्षा करने आए जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने आधे कार्य को ही पूरा करने के लिए 15 सितंबर तक कंपनी का काम बढ़ाने का आदेश दे दिया था। लेकिन गंगा प्रदूषण के अधिकारी इसको मानने को तैयार नहीं हैं।
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उनका कहना है कि मंत्री का आदेश और नियमों को लेकर फैसला अब बोर्ड ही करेगा। गंगा प्रदूषण के जीएम एसके राय ने कहा कि यहां से पत्र बोर्ड को लिख दिया जाएगा, वहां से जो निर्णय होगा उसका पालन करेंगे।
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शाही नाले की सफाई और मरम्मत का काम श्रीराम कंपनी को सौंपा गया था। तीन बार कार्य की समय सीमा बढ़ाने के बाद भी कंपनी इसे पूरा नहीं कर सकती तो उस पर 8 करोड़ का जुर्माना लगाकर नोटिस जारी कर दिया गया। नोटिस का समय रविवार को पूरा हो गया। अधिकारी अब जल निगम के बोर्ड को अंतिम फैसला करने के लिए पत्र लिखने जा रहे हैं।
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शनिवार को जिले के विकास कार्यों की समीक्षा करने आए जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने आधे कार्य को ही पूरा करने के लिए 15 सितंबर तक कंपनी का काम बढ़ाने का आदेश दे दिया था। लेकिन गंगा प्रदूषण के अधिकारी इसको मानने को तैयार नहीं हैं।
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उनका कहना है कि मंत्री का आदेश और नियमों को लेकर फैसला अब बोर्ड ही करेगा। गंगा प्रदूषण के जीएम एसके राय ने कहा कि यहां से पत्र बोर्ड को लिख दिया जाएगा, वहां से जो निर्णय होगा उसका पालन करेंगे।