वाराणसी: रिटायर्ड फौजी की हत्या के प्रयास का पुलिस ने किया पर्दाफाश, दो बदमाश गिरफ्तार, मुकदमेबाजी में रची थी साजिश
गजोखर गांव निवासी रिटायर्ड फौजी संतोष पाल का गांव के दो लोगों से विवाद था। हत्या की साजिश के तार मऊ और आजमगढ़ से भी जुड़े।
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वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र के गजोखर गांव में एक माह पूर्व रिटायर्ड फौजी की गोली मारकर हत्या के प्रयास मामले का पुलिस ने शुक्रवार को खुलासा किया। रिटायर्ड फौजी संतोष पाल को गोली मारने के दो आरोपियों गजोखर निवासी ऋतुराज सिंह और मऊ जिले के घोसी थाना क्षेत्र के पलिया निवासी चंदन राय को पुलिस ने बृहस्पतिवार की रात खालिसपुर रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, हत्या के प्रयास के मामले में अभी दो शूटरों की तलाश जारी है। गिरफ्तारी के लिए पुलिस जगह जगह दबिश दे रही है।
एक जून को मारी थी गोली
पिंडरा तहसील स्थित सीओ कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में सीओ पिंडरा अभिषेक पांडेय ने हत्या के प्रयास के मामले का पर्दाफाश किया। सीओ ने बताया कि एक जून की सुबह हुई घटना का मुख्य कारण पुरानी रंजिश थी। पुरानी रंजिश व पिता को कारावास से बचाने के उद्देश्य से ऋतुराज सिंह अपने दोस्त चंदन राय के परिचित आजमगढ़ निवासी दो शूटरों से घटना को अंजाम दिलाया।
दाहिने हाथ में लगी थी एक गोली
बता दें कि रिटायर्ड फौजी पर बदमाशों ने तीन से चार राउंड गोली मारी। एक गोली उनके दाहिने हाथ में लगी थी। आनन फानन उन्हें अस्पताल भेजा गया जहां रिटायर्ड फौजी संतोष पाल स्वस्थ हो गए। पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए बताया कि विवेचना में पता चला कि गजोखर गांव के ही अनिल सिंह से संतोष पाल की रंजिश चल रही थी। जिसमें मुकदमा चल रहा है। इसके अलावा गांव के ही मणिशंकर मिश्रा से भी नाली को लेकर विवाद है।
सीओ अभिषेक पांडेय के अनुसार गिरफ्तार ऋतुराज ने बताया कि उसके पिता के खिलाफ संतोष ने मुकदमा दर्ज कराया है। आपस में बैठक कई बार सुलह के लिए प्रयास किया गया लेकिन वह नहीं माने। मुकदमेबाजी में अब सजा होना लगभग तय है। वहीं रिटायर्ड फौजी संतोष पाल का गांव के ही मणिशंकर मिश्रा से नाली का विवाद है। दोनों ने मिलकर संतोष की हत्या की साजिश रची थी।
एक लाख रुपये में ठिकाने लगाने का सौदा तय हुआ
ऋतुराज के दोस्त घोसी के पलिया निवासी चंदन राय ने आजमगढ़ के जियनपुर थाना के भरौली निवासी शूटर अश्वनी चौहान से सौदा पक्का कराया। अश्वनी ने संतोष पाल को ठिकाने लगाने के लिए एक लाख रुपये की मांग की। सुपारी की आधी रकम एडवांस के तौर पर दी गई। ऋतुराज ने बताया कि 31 मई की रात सत्यम, चंदन और अश्वनी उसके घर आए। एक जून की सुबह खेत में गोबर डालकर संतोष घर आ रहे थे तो इसकी सूचना अश्वनी और सत्यम को दी गई। इसके बाद सत्यम ने रिटायर्ड फौजी संतोष पाल पर कई राउंड फायरिंग की लेकिन वह बच गया।