{"_id":"602d6bac8ebc3ee92f19f41b","slug":"varanasi-news-varanasi-news-vns575288127","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंदिर और शिवलिंग की प्राचीनता का मूल्यांकन करेगी बीएचयू की टीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंदिर और शिवलिंग की प्राचीनता का मूल्यांकन करेगी बीएचयू की टीम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। राजातालाब स्थित बभनियाव में पिछले साल कराई गई खोदाई में मिले मंदिर और शिवलिंग की प्राचीनता का मूल्यांकन बीएचयू पुरातत्वविदों की टीम जल्द ही शुरू करेगी। इसके लिए यहां एक मार्च से नए सिरे से खोदाई शुरू कराई जाएगी। बुधवार को राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. बीआर मणि ने प्राचीन इतिहास विभाग के अध्यक्ष और शिक्षकों के साथ उत्खनन स्थल का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
बीएचयू प्राचीन भारतीय इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओंकारनाथ सिंह के देखरेख में पिछले साल बभनियाव में ही करीब आधा दर्जन जगहों पर हुई खोदाई में कई पुरावशेष मिले थे। यहां शिवलिंग, प्राचीन मंदिर के साथ ही प्राचीन काल में प्रयोग करने वाले बर्तन आदि की जानकारी भी मिली थी। हालांकि कोरोना संक्रमण और बारिश की वजह से खोदाई स्थल पर पानी भरने की वजह से ही खोदाई काम ठप हो गया था, अब यहां नए सिरे से काम शुरू कराया जाएगा।
डॉ. बीआर मणि ने इस दौरान बीएचयू पुरातत्वविदों को बताया कि जिस जगह पर खोदाई में मंदिर के होने का प्रमाण मिला है, उसको देखकर यही लगता है कि यह करीब दो हजार साल पुराना मंदिर है। इसके साथ ही यह मध्य गंगा घाटी का प्राचीन स्थल है। अब पिछले साल मिले पुरावशेषों की जांच कराने का काम भी शुरू कराया जाएगा। इस दौरान डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. विनय कुमार सिंह, डॉ. रविशंकर आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बीएचयू प्राचीन भारतीय इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओंकारनाथ सिंह के देखरेख में पिछले साल बभनियाव में ही करीब आधा दर्जन जगहों पर हुई खोदाई में कई पुरावशेष मिले थे। यहां शिवलिंग, प्राचीन मंदिर के साथ ही प्राचीन काल में प्रयोग करने वाले बर्तन आदि की जानकारी भी मिली थी। हालांकि कोरोना संक्रमण और बारिश की वजह से खोदाई स्थल पर पानी भरने की वजह से ही खोदाई काम ठप हो गया था, अब यहां नए सिरे से काम शुरू कराया जाएगा।
विज्ञापन
डॉ. बीआर मणि ने इस दौरान बीएचयू पुरातत्वविदों को बताया कि जिस जगह पर खोदाई में मंदिर के होने का प्रमाण मिला है, उसको देखकर यही लगता है कि यह करीब दो हजार साल पुराना मंदिर है। इसके साथ ही यह मध्य गंगा घाटी का प्राचीन स्थल है। अब पिछले साल मिले पुरावशेषों की जांच कराने का काम भी शुरू कराया जाएगा। इस दौरान डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. विनय कुमार सिंह, डॉ. रविशंकर आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन