Varanasi News: स्थिर गेहूं नीति, वैज्ञानिक भंडारण और मूल्य संवर्धन जरूरी; आधुनिक गेहूं अर्थव्यवस्था का रोडमैप
Varanasi News: वाराणसी में डब्ल्यूपीपीएस सम्मेलन के दूसरे दिन गेहूं अर्थव्यवस्था, फ्लोर मिलिंग उद्योग और कृषि नीतियों पर मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने गेहूं नीति में स्थिरता, एमएसपी व्यवस्था की समीक्षा, बाजार में संतुलित उपलब्धता, कृषि अनुसंधान, एआई आधारित तकनीक और उद्योग-सरकार के बेहतर समन्वय पर जोर दिया।
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होटल ताज गंगेज में व्हीट प्रोडक्ट्स प्रमोशन सोसायटी (डब्ल्यूपीपीएस) की दूसरे दिन हुई बैठक में गेहूं अर्थव्यवस्था और फ्लोर मिलिंग उद्योग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। सम्मेलन में देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 85 शहरों सहित अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप, तुर्की और नेपाल समेत कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सम्मेलन में गेहूं नीति में स्थिरता, खुले बाजार में पर्याप्त उपलब्धता, सरकारी खरीद और निर्यात नीति में संतुलन की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकारी एजेंसियों द्वारा बड़े पैमाने पर खरीद के कारण खुले बाजार में गेहूं की उपलब्धता प्रभावित होती है। इससे फ्लोर मिलों को खरीद, भंडारण और मूल्य प्रबंधन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
आईसीआरईआर के डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर और नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद ने मौजूदा एमएसपी और खरीद प्रणाली की समीक्षा की जरूरत बताते हुए प्राइस डिफिशिएंसी पेमेंट सिस्टम जैसे विकल्प पर विचार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को सुरक्षा मिलेगी, बाजार अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा और सरकार पर वित्तीय बोझ भी कम होगा। साथ ही कृषि अनुसंधान में निवेश बढ़ाने पर भी उन्होंने बल दिया।
उत्तर प्रदेश सरकार के स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्व मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने किसानों, खरीद एजेंसियों, भंडारण, फ्लोर मिलों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और उपभोक्ताओं के बीच मजबूत समन्वय को समय की आवश्यकता बताया। डब्ल्यूपीपीएस के चेयरमैन अजय गोयल ने कहा कि गेहूं को केवल एक फसल नहीं बल्कि किसानों से लेकर उपभोक्ताओं तक फैली पूरी वैल्यू चेन के रूप में देखाजाना चाहिए।
विशेषज्ञों ने कहा कि बदलती उपभोक्ता मांग को देखते हुए पोषणयुक्त, सुरक्षित और उपयोग-विशेष आटे की मांग तेजी से बढ़ रही है। एंजाइम, इम्प्रूवर्स, फोर्टिफिकेशन, एआई आधारित ऑटोमेशन, डिजिटल ग्रेन कॉमर्स और स्मार्ट ऊर्जा समाधानों को उद्योग के भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। समापन नीति निर्माताओं, उद्योग, भंडारण, लॉजिस्टिक्स और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय के आह्वान के साथ हुआ।