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Varanasi News: खामोशी के आलम में गूंजी डंके की आवाज, दो किमी की दूरी 5 घंटे में पूरी; इमाम को पेश की अकीदत

Mon, 29 Jun 2026 08:40 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 29 Jun 2026 08:40 PM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी में मुहर्रम की 11वीं पर निकले लुटे काफिले के ऐतिहासिक जुलूस में खामोशी के बीच डंके की आवाज गूंजती रही। अजादार नातिया कलाम पढ़ते हुए इमाम हुसैन को अकीदत पेश करते चले। दो किलोमीटर का सफर करीब पांच घंटे में पूरा हुआ। जुलूस दालमंडी से दरगाहे फातमान तक निकाला गया।

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Varanasi News sound danka echoed through silence two-kilometer journey took five hours to complete
जुलूस में शामिल अकीदतमंद। - फोटो : संवाद

विस्तार

मुहर्रम की 11वीं तारीख पर दालमंडी से निकला ऐतिहासिक ‘लुटे काफिले’ का जुलूस गम, खामोशी और अकीदत का अनूठा प्रतीक बना। सदियों पुरानी इस परंपरा में शामिल अजादार पूरी तरह खामोशी के साथ नातिया कलाम पढ़ते हुए कदम-दर-कदम आगे बढ़ते रहे। पूरे जुलूस के दौरान माहौल गमगीन रहा और हर ओर इमाम हुसैन व कर्बला के शहीदों की याद में श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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डॉ. मुज्तबा जाफरी, जीशान जाफरी और मुर्तुजा जाफरी के संयोजन में स्वर्गीय डॉ. नाजिम जाफरी के दालमंडी स्थित आवास से निकला यह जुलूस बनारस में ‘चुप का डंका’ के नाम से भी जाना जाता है। जुलूस के आगे सैयद आबिद नकवी लुटे हुए काफिले का एलान करते हुए चल रहे थे। दो ऊंटों के बीच कुछ-कुछ अंतराल पर बजने वाले डंके की धीमी आवाज पूरे माहौल को और अधिक गमगीन बना रही थी। अजादार बिना किसी शोर-शराबे के खामोशी से आगे बढ़ते रहे।

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करीब दो किलोमीटर लंबा मार्ग तय करने में जुलूस को लगभग पांच घंटे लगे। यह जुलूस दालमंडी से निकलकर कालीमहाल, पितरकुंडा और लल्लापुरा होते हुए दरगाहे फातमान पहुंचा। रास्ते भर उलेमा मर्सिया और कलाम पढ़ते रहे, जबकि सरफराज ने हुसैनियत का पैगाम दिया।

दरगाहे फातमान में समर जाफरी, सलमान हैदर, हैदर कैरतपुर और अफादारे हुसैनी सहित अन्य अकीदतमंदों ने बारगाह में सलाम पेश किया। पूरे आयोजन के दौरान गम और अकीदत का माहौल बना रहा।

अंत में आयोजित मजलिस को मौलाना वसी असगर पाशा ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कर्बला केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि इमाम हुसैन का अपने रब से किया गया वह वादा और संदेश है, जो इंसानियत, सब्र, कुर्बानी और सत्य के लिए डटे रहने की प्रेरणा देता है। उनकी तकरीर को उपस्थित लोगों ने गंभीरता से सुना। 

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