{"_id":"67782424c14621ccb50363ff","slug":"varanasi-news-indresh-maharaj-worship-kashi-vrindavan-salvation-devotees-bowed-down-2025-01-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News : इंद्रेश महाराज बोले- काशी भजने वाले को मुक्ति के रूप में मिलता है वृंदावन, भक्तों ने किया नमन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News : इंद्रेश महाराज बोले- काशी भजने वाले को मुक्ति के रूप में मिलता है वृंदावन, भक्तों ने किया नमन
Fri, 03 Jan 2025 11:23 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Fri, 03 Jan 2025 11:23 PM IST
सार
Varanasi News : संकटमोचन स्थित रामेश्वर वाटिका में सात दिवसीय भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक इंद्रेश महाराज ने लोगों को गोस्वामी तुलसीदासजी, श्रीमद्वल्लभाचार्य चैतन्य महाप्रभु के बारे में बताया। कहा कि काशी ऐसे ही महानुभावों से पूर्ण होती है।
विज्ञापन
कथा वाचक इंद्रेश महाराज।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कथा वाचक इंद्रेश महाराज ने कहा कि महादेव भीगे देव हैं। उनके पास जाओ वह आपको भिगो न दें ऐसा हो ही नहीं सकता है। कृपा तब हो जब मन भीग जाए। काशी ने सबको दिया है। कोई अपूर्णता नहीं रखी है। गोस्वामी तुलसीदासजी, श्रीमद्वल्लभाचार्य चैतन्य महाप्रभु, सबको काशी ने पूर्ण किया है। इस जन्म में काशी में रहने वालों ने महादेव की खूब आराधना की होगी तो उनका अगला जन्म ब्रज में ही होगा। काशी का भजन वृंदावन की प्राप्ति कराता है।
विज्ञापन
वह शुक्रवार को संकटमोचन स्थित रामेश्वर वाटिका में सात दिवसीय भागवत कथा के दूसरे दिन काशी और ब्रज की महिमा का बखान कर रहे थे। इंद्रेश महाराज ने कहा कि राधाकृष्ण के प्रति जो प्रेम प्रकट होता है, वह महादेव की कृपा से ही होता है। काशी विद्वानों की नगरी है।
विज्ञापन
काशी में जन्म होना इस बात का प्रतीक है कि आप अध्ययनशील हैं। यहां जन्म लेकर महादेव का वंदन, गंगा स्नान और संतजनों का संग करके अपने जीवन को सार्थक करेंगे। काशी में मृत्यु होने के बाद अगला जन्म ब्रज में ही होगा। कुछ लोग सोच रहे हैं कि काशी से मृत्यु के बाद तो मुक्ति ही मिलती है। दूसरे जन्म में वृंदावन में प्राप्त होना मतलब मुक्त जन्म लेना ही है।
विज्ञापन
वृंदावन में जन्म लेने वाला व्यक्ति जन्म से ही मुक्त होता है। काशी को विश्वविद्यालय समझिए और यहां से पासआउट होने वाला जॉब के लिए वृंदावन ही जाएगा। काशी भजने वाले को वृंदावन मिलता है। इसके एक नहीं अनेक प्रमाण है। कहा कि भागवत में 18 हजार श्लोक हैं और सबसे कठिन श्लोक सबसे पहला श्लोक है।
परमात्मा जन्म और मृत्यु से परे है और सबकुछ जानते हैं। इसमें किसी देव का नाम नहीं कहा गया है, उसमें परम सत्य की बात कही गई है। भक्ति का भाव ऐसा होना चाहिए कि जहां भी आप देखें आपके इष्ट देव ही नजर आएं। चाहे किसी का दर्शन करें इष्ट का दर्शन करें, इष्ट का भाव रखें। महादेव को अगर प्रसन्न करना है तो उनके सामने कहो श्री राधा वल्लभ लाल की...तो फिर देखना वह कैसे प्रसन्न होते हैं? अगर आप विश्वनाथ जी के दर्शन करने जाएं तो श्री राधा वल्लभ लालजी की जय... जरूर बोलें।