{"_id":"5ef107738ebc3e42b14e9f36","slug":"varanasi-news-city-news-vns5316749136","type":"story","status":"publish","title_hn":"धरोहरों के प्रति संवेदनशील बनाने में आधुनिक तकनीक महत्वपूर्ण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धरोहरों के प्रति संवेदनशील बनाने में आधुनिक तकनीक महत्वपूर्ण
Tue, 23 Jun 2020 01:03 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2020 01:03 AM IST
विज्ञापन
heritage
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नागरिकों को धरोहर के प्रति संवेदनशील बनाने में आधुनिक तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके माध्यम से पर्यटकों, आम नागरिकों एवं शोधकर्ताओं को इनके प्राचीन स्वरूप, वास्तविक स्वरूप का परिचय देने के साथ ही सांस्कृतिक एवं एतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी भी दी जा सकती है। यह बातें वाराणसी में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण की पूर्व चेयरमैन डॉ सुष्मिता पांडे ने सोमवार को आर्य महिला पीजी कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय वेबिनार में कहीं।
विज्ञापन
कल्चरल हेरीटेज एंड टूरिज्म इन पोस्ट कोविड-19 विषय पर आयोजित संगोष्ठी में कोरोना के परिप्रेक्ष्य मेटकनी की उपयोगिता पर चर्चा हुई। वेबिनार में सीसीआरटी के निदेशक डॉ. ऋषि कुमार वशिष्ठ ने कहा देश की सांस्कृतिक विरासत किसी भी राष्ट्र की पहचान एवं उसकी अमूल्य निधि होती है।
विज्ञापन
बीएचयू के प्रो. ओएन सिंह ने कहा कि कोरोना के दौर में यह अति आवश्यक है कि हर कोई विरासत और संस्कृति के संपर्क में रहे। पर्यटन अधिकारी वाराणसी कीर्तिमान श्रीवास्तव ने कहा कि कोविड-19 में पर्यटन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। इस दौरान कॉलेज के प्रबंधक डॉ. शशिकांत दीक्षित, प्राचार्य प्रो. रचना दुबे, डॉ. रंजना मालवीय, डॉ. सरोज रानी, डॉ. सुनीता यादव आदि मौजूद रहीं।
विज्ञापन