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वाराणसी नगर निगम के मुख्य अभियंता निलंबित, नोएडा में 28 करोड़ रुपए की हेराफेरी का आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 12 Apr 2018 02:02 PM IST
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वाराणसी नगर निगम
- फोटो : self
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भ्रष्टाचार के आरोप में वाराणसी नगर निगम के मुख्य अभियंता बीके सिंह को मंगलवार की देर रात निलंबित कर दिया गया। प्रमुख सचिव नगर विकास की ओर से हुई कार्रवाई के बाद नगर निगम के चीफ इंजीनियर का पद खाली हो गया। वर्तमान में चीफ इंजीनियर का कार्यभार अधिशासी अभियंता लोकेश जैन को दिया गया है।
चीफ इंजीनियर भूपेश कुमार सिंह पर आरोप है कि नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण में तैनाती के दौरान उन्होंने कई अनियमितताएं और सरकारी राशि की हेराफेरी की है। जांच में यह पाया गया कि प्राधिकरण क्षेत्र में मात्र चार यूनिपोल विज्ञापन लगवाने की अनुमति थी।
वहीं, 12 यूनिपोल प्राधिकरण ने लगवाए थे। कुल 16 यूनिपोल की जगह उस क्षेत्र में 217 यूनिपोल विज्ञापन लगाए गए थे। इसमें 201 यूनिपोल अवैध रूप से प्राधिकरण क्षेत्र में लगे हुए थे। 201 यूनिपोल विज्ञापन से विभाग को 28 करोड़ 22 लाख 64 हजार 752 रुपये की राजस्व हानि हुई है।
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इसके अलावा जब स्थानांतरण आदेश जारी हुआ तो बीके सिंह ने नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण से बिना रिलीव हुए ही वाराणसी नगर निगम का कार्यभार संभाल लिया था। शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही करते हुए विभागीय नियमों के उल्लंघन में मुख्य अभियंता पर प्रमुख सचिव ने निलंबन की कार्रवाई की है।
प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश के अनुसार मुख्य अभियंता बीके सिंह निलंबन के दौरान लखनऊ स्थित महानिदेशक कार्यालय से संबद्घ रहेंगे। चीफ इंजीनियर बीके सिंह डेपुटेशन पर करीब डेढ़ माह पहले नगर निगम वाराणसी का कार्यभार संभाल चुके थे।
हालांकि इस दौरान विभाग यहां के भी हुए कार्यों की जांच करा रहा है, लेकिन प्राथमिक तौर पर कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि इसकी जानकारी मिलते ही उनका चार्ज अधिशासी अभियंता लोकेश जैन को दिया गया है।
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चीफ इंजीनियर भूपेश कुमार सिंह पर आरोप है कि नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण में तैनाती के दौरान उन्होंने कई अनियमितताएं और सरकारी राशि की हेराफेरी की है। जांच में यह पाया गया कि प्राधिकरण क्षेत्र में मात्र चार यूनिपोल विज्ञापन लगवाने की अनुमति थी।
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वहीं, 12 यूनिपोल प्राधिकरण ने लगवाए थे। कुल 16 यूनिपोल की जगह उस क्षेत्र में 217 यूनिपोल विज्ञापन लगाए गए थे। इसमें 201 यूनिपोल अवैध रूप से प्राधिकरण क्षेत्र में लगे हुए थे। 201 यूनिपोल विज्ञापन से विभाग को 28 करोड़ 22 लाख 64 हजार 752 रुपये की राजस्व हानि हुई है।
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इसके अलावा जब स्थानांतरण आदेश जारी हुआ तो बीके सिंह ने नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण से बिना रिलीव हुए ही वाराणसी नगर निगम का कार्यभार संभाल लिया था। शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही करते हुए विभागीय नियमों के उल्लंघन में मुख्य अभियंता पर प्रमुख सचिव ने निलंबन की कार्रवाई की है।
प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश के अनुसार मुख्य अभियंता बीके सिंह निलंबन के दौरान लखनऊ स्थित महानिदेशक कार्यालय से संबद्घ रहेंगे। चीफ इंजीनियर बीके सिंह डेपुटेशन पर करीब डेढ़ माह पहले नगर निगम वाराणसी का कार्यभार संभाल चुके थे।
हालांकि इस दौरान विभाग यहां के भी हुए कार्यों की जांच करा रहा है, लेकिन प्राथमिक तौर पर कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि इसकी जानकारी मिलते ही उनका चार्ज अधिशासी अभियंता लोकेश जैन को दिया गया है।
बिना रिलीविंग आर्डर के कैसे दे दिया नगर निगम का चार्ज
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मुख्य अभियंता की जांच में पता चला है कि नवीन ओखला से बिना रिलीव हुए ही नगर निगम वाराणसी का चार्ज संभाल लिया था। ऐसे में नगर निगम ने इनको चार्ज कैसे दे दिया। क्यों कि अगर रिलीविंग आदेश नहीं है तो स्थानांतरित कर्मचारी को नए पद पर ज्वाइनिंग नहीं दी जा सकती।
अगर ज्वाइनिंग दे भी दें तो वेतन रुक जाता है। डेढ़ माह बीतने के बाद भी मुख्य अभियंता बीके सिंह की सर्विस बुक और रिलीविंग आदेश वाराणसी नहीं पहुंचा था। यही कारण है कि उन्हें अब तक कोई वेतन वाराणसी नगर निगम से जारी नहीं किया गया था।
वहीं वाराणसी नगर निगम क्षेत्र में भी अवैध होर्र्डिंग का खेल चल रहा है। लेकिन दायरा बड़ा होने के चलते न तो किसी को जानकारी मिल पाती है और न ही कोई लिखित रूप से शिकायत हो पाती है।
अगर ज्वाइनिंग दे भी दें तो वेतन रुक जाता है। डेढ़ माह बीतने के बाद भी मुख्य अभियंता बीके सिंह की सर्विस बुक और रिलीविंग आदेश वाराणसी नहीं पहुंचा था। यही कारण है कि उन्हें अब तक कोई वेतन वाराणसी नगर निगम से जारी नहीं किया गया था।
वहीं वाराणसी नगर निगम क्षेत्र में भी अवैध होर्र्डिंग का खेल चल रहा है। लेकिन दायरा बड़ा होने के चलते न तो किसी को जानकारी मिल पाती है और न ही कोई लिखित रूप से शिकायत हो पाती है।
ऐसे में विज्ञापन लगवाने वाले बड़ी ही चालाकी से अधिकारियों की शह पर यह खेल चला रहे हैं। इसमें अधिकारी भी अनुमति के नाम पर आवेदन अपने पास रखकर अवैध रूप से विज्ञापनों को लगवाते हैं और उससे सरकारी राशि का दुरुपयोग करते हैं।